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मोबाइल नेटवर्क कंपनी में काम करते करते जालसाजी का मास्टर बन गया सहसवान का अंशुल

Tue, 19 Jan 2021 01:03 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 19 Jan 2021 01:03 AM IST
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बदायूं। साइबर ठगी के अंतरराष्ट्रीय रैकेट का खुलासा होने के बाद एक बार फिर बदायूं चर्चा में आ गया है। एटीएस ने जिन जालसाजों को पकड़ा है, उनमें एक सहसवान तहसील का रहने वाला है जबकि एक मुरादाबाद का है। सहसवान का रहने वाला युवक पहले से ही एक मोबाइल नेटवर्क कंपनी से जुड़ा था, जिसके बाद वह धीरे-धीरे जालसाली के धंधे में उतर गया। धीरे-धीरे वह जालसाजी का मास्टर बन गया। जालसाजों पर इतनी बड़ी कार्रवाई होने के बाद माना जा रहा है कि बिसौली इलाके में सक्रिय बाकी हवाला के धंधेबाज भी एसटीएफ के निशाने पर जल्द आ सकते हैं। इससे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है।
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20 दिन से एटीएस बिसौली इलाके में नजर रखे हुए है। पंद्रह दिन पहले एटीएस टीम को संग्रामपुर और लक्ष्मीपुर गांव के आसपास देखा गया था। उसी समय हवाला के धंधेबाजों में हड़कंप मच गया था। सूत्रों के मुताबिक हवाला के धंधेबाजों के अपने सूत्र काम कर रहे थे। एटीएस उनकी लोकेशन ले रही थी तो धंधेबाज एटीएस की लोकेशन तलाश कर रहे थे। इस दौरान कोई धंधेबाज एटीएस की पकड़ में नहीं आया लेकिन शुक्रवार को टीम ने ओरछी चौराहे से तीन लोगों को दबोचा था। उनमें से एक को छोड़ दिया गया था। उसने खुद को दुकान का नौकर बताया था। एटीएस ने पकड़े गए चंदौसी निवासी पीयूष वार्ष्णेय और मुरादाबाद निवासी प्रेम सिंह का नाम सार्वजनिक कर दिया। फिलहाल उनके खिलाफ बड़ी कार्रवाई चल रही है। इसके अलावा एटीएस द्वारा पकड़े गए 14 लोगों में एक नाम अंशुल कुमार सक्सेना का है, जो मूल रूप से सहसवान तहसील का रहने वाला है। वह पिछले कई साल से एक मोबाइल नेटवर्क कंपनी से जुड़ा है। स्थानीय लोगों के अनुसार वह जब भी सहसवान आता था तो खुद को उसी कंपनी का अधिकारी बताता था। पकड़े जाने के बाद माना जा रहा है कि आगे उससे जुड़े और भी नाम सामने आ सकते हैं। इधर, बताते हैं कि करीब एक माह पूर्व गोपनीय टीम ने क्षेत्र में भ्रमण कर हवाला के धंधेबाजों की सूची बनाई थी। इसकी जानकारी से इलाके में हड़कंप मच गया था। इस दौरान 35 धंधेबाज चिह्नित भी किए गए थे जिसके बाद हवाला के धंधेबाज भी अलर्ट हो गए थे। इससे धंधेबाज अपना घर छोड़कर गैर प्रांतों में पहुंच गए। इसके बावजूद एटीएस उनकी तलाश में क्षेत्र में लगी हुई है। फिलहाल एटीएस द्वारा 14 लोगों के पकड़े जाने के बाद माना जा रहा है कि अभी और धंधेबाज उसके रडार पर हैं, जो जल्द ही पकड़े जा सकते हैं।
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सहसवान के अकबराबाद का है अंशुल
एटीएस ने जिस अंशुल सक्सेना को पकड़ा है, वह सहसवान के मोहल्ला अकबराबाद का स्थानीय निवासी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक वह तकरीबन पांच साल पहले सहसवान में ही एक मोबाइल नेटवर्क कंपनी में सिम एक्टिवेट करने का काम करता था। इसके बाद वह दिल्ली चला गया और वहां एक कैब कंपनी में नौकरी कर ली। हाल ही में वह अमरोहा के हसनपुर में उसी मोबाइल नेटवर्क कंपनी में खुद को एक अधिकारी बताता था। स्थानीय लोगों के अनुसार अंशुल जब भी सहसवान आता था तो वह कहता था कि उसकी नेटवर्क कंपनी में बहुत अच्छी जॉब है। लोगों को इसके अलावा उसके बारे में कुछ और जानकारी नहीं है। माना जा रहा है कि मोबाइल नेटवर्क कंपनी में काम करते करते ही उसने जालसाजी की राह पकड़ ली। चूंकि वह जानता था कि सिम कैसे एक्टिवेट होते हैं, इसलिए वह इसका मास्टर बन गया।
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बिसौली इलाके में भी खोले गए थे फर्जी खाते
दबतोरी। बिसौली इलाके में भी पहले फर्जी खाते खोलने का मामला सामने आया था। लक्ष्मीपुर और बिसौली एक बैंक में फर्जी खाते खोले गए थे। उनसे करोड़ों रुपये का लेन देन हुआ था। मामले की जांच शुरू हुई लेकिन बाद में सब कुछ ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इसी तरह उझानी इलाके में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया था। इसमें एक आरोपी जेल भेजा जा चुका है। जबकि आज तक ये पता नहीं चला कि बैंक में खोले गए फर्जी खातों में रुपया कहां से आता था और कहां जाता था। संवाद
वर्ष 2016 में मिले थे पचास लाख से कम के कई चेक
दबतोरी। वर्ष 2016 में बिसौली कोतवाली पुलिस को पचास लाख से कम धनराशि के कई चेक मिले थे। सभी कोलकाता की एक बैंक के थे। उन पर हस्ताक्षर मौजूद थे लेकिन रकम नहीं लिखी थी। बताया जा रहा था कि उन चेकों के माध्यम से एक बार में पचास लाख से कुछ कम रुपये निकाले जा सकते थे। वो चेक बिसौली पुलिस के कब्जे में थे। कुछ दिन जांच चली लेकिन बाद में उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। आज तक यही पता नहीं चला कि चेक किसने भेजे और क्यों भेजे। संवाद

शुक्रवार को ओरछी इलाके में एटीएस आई थी। जानकारी मिली थी, इससे लोकल पुलिस को भेज दिया गया था। इसके अलावा स्थानीय कोई मामला सामने नहीं आया है। अगर ऐसा होता तो जिला स्तर पर सूचना जरूर आती। ये जांच लखनऊ से चल रही है, इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।- सिद्धार्थ वर्मा, एसपी देहात
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