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धोखा मत खाना...उत्तर प्रदेश परिवहन नहीं उत्तर प्रदेश परिवार है ये, पुलिस ने कर दिया सीज
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बदायूं। परिवहन निगम को रोजाना हजारों रुपये का चूना लगा रही एक फर्जी रोडवेज बस बुधवार को पकड़ी गई। यह बस यात्रियों को छोड़ने रोडवेज स्टैंड आई थी, उसी समय पुलिस के हत्थे चढ़ गई। उसके शीशे पर उत्तर प्रदेश परिवहन की जगह उत्तर प्रदेश परिवार लिखा था, जबकि दोनों साइडों पर साधारण किराया लिखवाकर यात्रियों को धोखा दिया जा रहा था। फिलहाल पुलिस ने बस को सीज कर दिया है।
बुधवार को रोडवेज बसों की तरह दिखने वाली एक डग्गामार बस स्टैंड पर पहुंची। चालक ने बस को चौराहे पर ही रोक लिया और यात्रियों को नीचे उतारना शुरू कर दिया। इससे चौराहे पर जाम लगने जैसी स्थिति पैदा हो गई। उसके आगे-पीछे कई वाहनों की लाइन लग गई। इसकी सूचना पर पहुंची रोडवेज चौकी पुलिस ने चौराहे से वाहनों को हटवाना शुरू कर दिया। उसी दौरान अचानक पुलिस की नजर डग्गामार बस के शीशे पर लिखे उत्तर प्रदेश परिवार पर पड़ी। पुलिस बस का रंग और उत्तर प्रदेश परिवार लिखा देखकर हैरत में पड़ गई। पुलिस ने पहले उसको साइड से लगवाकर जाम खुलवाया। उसके बाद बस की छानबीन शुरू कर दी। बस के दोनों साइडों पर सफेद रंग से साधारण किराया लिखा था। यानी डग्गामार बस को रोडवेज बसों की तरह दिखाने के हर प्रयास किए गए थे। इससे पुलिस बस को थाने ले गई, जहां बाद में उसको सीज कर दिया गया। उसके चालक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। चालक ने पूछताछ के दौरान बताया कि बस को बरेली-बदायूं रोड पर चलाया जा रहा था। यात्रियों से किराए के उतने ही रुपये लिए जाते हैं, जितने रोडवेज बसों में जाते हैं।
एक बस के परमिट पर दौड़ रहीं बीस डग्गामार बसें
परिवहन निगम के अधिकारियों की मानें तो कुछ दिन पहले उन्होंने एआरटीओ दफ्तर से डग्गामार बसों का रिकॉर्ड निकलवाया था। इससे पता चला कि बरेली-बदायूं रूट पर एक बस का परमिट है, जबकि इस रूट पर करीब 20 डग्गामार बसें बेखौफ होकर दौड़ रही हैं। इससे परिवहन निगम को अच्छा खासा नुकसान हो रहा है।
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पहले भी पकड़ी गईं थीं उत्तर प्रदेश परिवार की बसें
बुधवार को पकड़ी गई बस की तरह दो बसें पहले भी पकड़ी गईं थीं। उनमें एक बस करीब एक साल पहले मुजरिया थाना पुलिस ने पकड़ी थी। वह बस दिल्ली बदायूं रूट पर चलती थी। अक्सर रात में ही यात्रियों को ले जाती थी। इससे पुलिस की नजरों से भी चूक हो जाती थी लेकिन बाद में बस पुलिस के हत्थे चढ़ गई। एक बस लगभग आठ माह पहले बरेली-बदायूं रूट पर एआरएम और एआरटीओ की संयुक्त चेकिंग के दौरान पकड़ी गई थी। उसको भी सीज किया गया था।
रोडवेज चौराहे पर बंद नहीं हुई डग्गामार बसें
इन डग्गामार बसों के खिलाफ परिवहन निगम के कर्मचारी धरना, प्रदर्शन और भूख हड़ताल कर करके हार गए लेकिन डग्गामार बसें बंद नहीं हुई। करीब पांच माह पूर्व परिवहन निगम के कर्मचारियों ने धरना प्रदर्शन किया था। उस समय डीएम दिनेश कुमार सिंह ने मामले को गंभीरता से लिया था। उन्होंने इन बसों के खिलाफ कार्रवाई कराने के लिए कई अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी थी, जिसमें एडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट, एसडीएम, एआरटीओ, एआरएम और पुलिस के अधिकारी शामिल थे। उस समय लिखित में फैसला हुआ था कि कोई डग्गामार बस चौराहे पर नहीं आएगी। इसके बावजूद आज भी चौराहे पर रोजाना डग्गामार बसें आ रहीं हैं।
डग्गामार बसों के खिलाफ जितना हमारे कर्मचारियों ने संघर्ष किया है, उतना विभाग को लाभ नहीं मिला। आज भी चौराहे पर डग्गामार बसें खड़ी हो रही हैं। किसको दिखाई नहीं दे रहीं, लेकिन कोई कार्रवाई करना नहीं चाहता। जबकि इन डग्गामार बसों से विभाग का रोजाना दो-ढाई लाख रुपये का नुकसान हो रहा है।
राजेश कुमार, एआरएम
यह बस रोडवेज चौराहे से पकड़ी गई है। पहले तो वह पहचान में ही नहीं आ रही थी कि बस रोडवेज है या डग्गामार, लेेकिन उसके शीशे पर उत्तर प्रदेश परिवार लिखा था, जिससे बस पकड़ी गई। बस को सीज कर दिया गया है।
ओपी गौतम, इंस्पेक्टर सिविल लाइंस
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बुधवार को रोडवेज बसों की तरह दिखने वाली एक डग्गामार बस स्टैंड पर पहुंची। चालक ने बस को चौराहे पर ही रोक लिया और यात्रियों को नीचे उतारना शुरू कर दिया। इससे चौराहे पर जाम लगने जैसी स्थिति पैदा हो गई। उसके आगे-पीछे कई वाहनों की लाइन लग गई। इसकी सूचना पर पहुंची रोडवेज चौकी पुलिस ने चौराहे से वाहनों को हटवाना शुरू कर दिया। उसी दौरान अचानक पुलिस की नजर डग्गामार बस के शीशे पर लिखे उत्तर प्रदेश परिवार पर पड़ी। पुलिस बस का रंग और उत्तर प्रदेश परिवार लिखा देखकर हैरत में पड़ गई। पुलिस ने पहले उसको साइड से लगवाकर जाम खुलवाया। उसके बाद बस की छानबीन शुरू कर दी। बस के दोनों साइडों पर सफेद रंग से साधारण किराया लिखा था। यानी डग्गामार बस को रोडवेज बसों की तरह दिखाने के हर प्रयास किए गए थे। इससे पुलिस बस को थाने ले गई, जहां बाद में उसको सीज कर दिया गया। उसके चालक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। चालक ने पूछताछ के दौरान बताया कि बस को बरेली-बदायूं रोड पर चलाया जा रहा था। यात्रियों से किराए के उतने ही रुपये लिए जाते हैं, जितने रोडवेज बसों में जाते हैं।
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एक बस के परमिट पर दौड़ रहीं बीस डग्गामार बसें
परिवहन निगम के अधिकारियों की मानें तो कुछ दिन पहले उन्होंने एआरटीओ दफ्तर से डग्गामार बसों का रिकॉर्ड निकलवाया था। इससे पता चला कि बरेली-बदायूं रूट पर एक बस का परमिट है, जबकि इस रूट पर करीब 20 डग्गामार बसें बेखौफ होकर दौड़ रही हैं। इससे परिवहन निगम को अच्छा खासा नुकसान हो रहा है।
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पहले भी पकड़ी गईं थीं उत्तर प्रदेश परिवार की बसें
बुधवार को पकड़ी गई बस की तरह दो बसें पहले भी पकड़ी गईं थीं। उनमें एक बस करीब एक साल पहले मुजरिया थाना पुलिस ने पकड़ी थी। वह बस दिल्ली बदायूं रूट पर चलती थी। अक्सर रात में ही यात्रियों को ले जाती थी। इससे पुलिस की नजरों से भी चूक हो जाती थी लेकिन बाद में बस पुलिस के हत्थे चढ़ गई। एक बस लगभग आठ माह पहले बरेली-बदायूं रूट पर एआरएम और एआरटीओ की संयुक्त चेकिंग के दौरान पकड़ी गई थी। उसको भी सीज किया गया था।
रोडवेज चौराहे पर बंद नहीं हुई डग्गामार बसें
इन डग्गामार बसों के खिलाफ परिवहन निगम के कर्मचारी धरना, प्रदर्शन और भूख हड़ताल कर करके हार गए लेकिन डग्गामार बसें बंद नहीं हुई। करीब पांच माह पूर्व परिवहन निगम के कर्मचारियों ने धरना प्रदर्शन किया था। उस समय डीएम दिनेश कुमार सिंह ने मामले को गंभीरता से लिया था। उन्होंने इन बसों के खिलाफ कार्रवाई कराने के लिए कई अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी थी, जिसमें एडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट, एसडीएम, एआरटीओ, एआरएम और पुलिस के अधिकारी शामिल थे। उस समय लिखित में फैसला हुआ था कि कोई डग्गामार बस चौराहे पर नहीं आएगी। इसके बावजूद आज भी चौराहे पर रोजाना डग्गामार बसें आ रहीं हैं।
डग्गामार बसों के खिलाफ जितना हमारे कर्मचारियों ने संघर्ष किया है, उतना विभाग को लाभ नहीं मिला। आज भी चौराहे पर डग्गामार बसें खड़ी हो रही हैं। किसको दिखाई नहीं दे रहीं, लेकिन कोई कार्रवाई करना नहीं चाहता। जबकि इन डग्गामार बसों से विभाग का रोजाना दो-ढाई लाख रुपये का नुकसान हो रहा है।
राजेश कुमार, एआरएम
यह बस रोडवेज चौराहे से पकड़ी गई है। पहले तो वह पहचान में ही नहीं आ रही थी कि बस रोडवेज है या डग्गामार, लेेकिन उसके शीशे पर उत्तर प्रदेश परिवार लिखा था, जिससे बस पकड़ी गई। बस को सीज कर दिया गया है।
ओपी गौतम, इंस्पेक्टर सिविल लाइंस