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जिले में बढ़ रहा संक्रमण का खतरा, मेडिकल कॉलेज प्रशासन बेखबर
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बदायूं। कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण के कारण जिले में लगातार पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। यहां तक की मौत का सिलसिला भी रुकने का अभी नाम नहीं ले रहा है। कोविड-19 के मरीजों को भर्ती करने के लिए जिला प्रशासन ने राजकीय मेडिकल कॉलेज को एल-2 का अस्पताल घोषित किया है। जहां पर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है, लेकिन कॉलेज प्रशासन की लापरवाही साफ देखने को मिल रही है। कॉलेज में जहां-तहां पीपीई किट, दस्ताने आदि पड़े नजर आ रहे हैं, इससे संक्रमण कम होने की जगह फैलने के आसार ज्यादा नजर आ रहे हैं।
गत वर्ष कोरोना वायरस की वजह से लोगों को काफी परेशानी हुई थी। वर्ष 2020 में मौत का आकड़ा कम था, इस साल जब दोबारा से कोरोना की लहर आयी। तो एक साथ पॉजिटिव की संख्या में बढ़ोतरी हो गई और मौत का आंकड़ा भी बहुत तेजी के साथ बढ़ाने लगा है। ऐसे में जिला प्रशासन के निर्देश पर अभी तक पॉजिटिव मरीजों को होम आइसोलेट किया जा रहा है। वहीं गंभीर पॉजिटिव मरीजों को राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया जा रहा है, क्योंकि इसे एल-2 श्रेणी का कोविड-19 अस्पताल बनाया गया है। यहां पर अभी एक सौ लिए अधिक मरीज गंभीर हालात में भर्ती है। हाल-फिलहाल में कॉलेज में हुई मौतों पर नजर डालते तो रोजाना औसतन चार से पांच मौत हो रही है। मामला यहां पर और भी ज्यादा गंभीर नजर आ रहा है।
दरअसल, राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रशासन की तरफ से पॉजिटिव मरीजों का इलाज कोविड-19 की गाइड लाइन के अनुरूप पीपीई किट, मास्क, दस्ताने पहनकर किया जा रहा है, लेकिन उपयोग के बाद में उन्हें यूं ही कॉलेज में फेंक दिया जा रहा है। जिसकी वजह से तीमारदारों में दहशत का माहौल है। लापरवाही का आलम ये हैं कि उपयोग किए गए मास्क, दस्तानों से लेकर पीपीई किट कहीं पर एक साइड में नहीं, ब्लकि कॉलेज परिसर में गेट के पास में पड़ी हुई। जहां से मरीजों और तीमारदारों का आना जाना लगा रहा है।
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28 सौ से ज्यादा एक्टिव केस
जिले में पॉजिटिव मरीजों की संख्या कई गुना तेजी से बढ़ रही है। अब तक पॉजिटिव मरीजों की संख्या 88 सौ से भी अधिक है। जिले में एक्टिव केस लगभग 2827 हैं। जिसमें से करीब 26 सौ पॉजिटिव होम आइसोलेट थे।
ये हैं गाइड लाइन
कोविड-19 की गाइड लाइन में साफ कहा गया कि कोरोना मरीज की जांच या फिर किसी दूसरी चीज में उपयोग के बाद पीपीई किट व दस्ताने को एक जगह एकत्र कर पीले रंग की पॉलीथिन बैग में भरकर रखना है। बाद में बैग का निष्पादन करना होगा,ऐसा करने पर निष्पादन करने वाले सफाई कर्मी में संक्रमण की आशंका नहीं होगी, लेकिन राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ऐसा कुछ नहीं हो रहा है।
खुले में कहीं पर भी पीपीई किट, उपयोग किए गए दस्ताने आदि फेंकना मना है। इसको दिखवाया जाएगा कि इससे किसने फेंका है। - दीपा रंजन, डीएम
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गत वर्ष कोरोना वायरस की वजह से लोगों को काफी परेशानी हुई थी। वर्ष 2020 में मौत का आकड़ा कम था, इस साल जब दोबारा से कोरोना की लहर आयी। तो एक साथ पॉजिटिव की संख्या में बढ़ोतरी हो गई और मौत का आंकड़ा भी बहुत तेजी के साथ बढ़ाने लगा है। ऐसे में जिला प्रशासन के निर्देश पर अभी तक पॉजिटिव मरीजों को होम आइसोलेट किया जा रहा है। वहीं गंभीर पॉजिटिव मरीजों को राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया जा रहा है, क्योंकि इसे एल-2 श्रेणी का कोविड-19 अस्पताल बनाया गया है। यहां पर अभी एक सौ लिए अधिक मरीज गंभीर हालात में भर्ती है। हाल-फिलहाल में कॉलेज में हुई मौतों पर नजर डालते तो रोजाना औसतन चार से पांच मौत हो रही है। मामला यहां पर और भी ज्यादा गंभीर नजर आ रहा है।
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दरअसल, राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रशासन की तरफ से पॉजिटिव मरीजों का इलाज कोविड-19 की गाइड लाइन के अनुरूप पीपीई किट, मास्क, दस्ताने पहनकर किया जा रहा है, लेकिन उपयोग के बाद में उन्हें यूं ही कॉलेज में फेंक दिया जा रहा है। जिसकी वजह से तीमारदारों में दहशत का माहौल है। लापरवाही का आलम ये हैं कि उपयोग किए गए मास्क, दस्तानों से लेकर पीपीई किट कहीं पर एक साइड में नहीं, ब्लकि कॉलेज परिसर में गेट के पास में पड़ी हुई। जहां से मरीजों और तीमारदारों का आना जाना लगा रहा है।
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28 सौ से ज्यादा एक्टिव केस
जिले में पॉजिटिव मरीजों की संख्या कई गुना तेजी से बढ़ रही है। अब तक पॉजिटिव मरीजों की संख्या 88 सौ से भी अधिक है। जिले में एक्टिव केस लगभग 2827 हैं। जिसमें से करीब 26 सौ पॉजिटिव होम आइसोलेट थे।
ये हैं गाइड लाइन
कोविड-19 की गाइड लाइन में साफ कहा गया कि कोरोना मरीज की जांच या फिर किसी दूसरी चीज में उपयोग के बाद पीपीई किट व दस्ताने को एक जगह एकत्र कर पीले रंग की पॉलीथिन बैग में भरकर रखना है। बाद में बैग का निष्पादन करना होगा,ऐसा करने पर निष्पादन करने वाले सफाई कर्मी में संक्रमण की आशंका नहीं होगी, लेकिन राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ऐसा कुछ नहीं हो रहा है।
खुले में कहीं पर भी पीपीई किट, उपयोग किए गए दस्ताने आदि फेंकना मना है। इसको दिखवाया जाएगा कि इससे किसने फेंका है। - दीपा रंजन, डीएम