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कोरोना: ताउम्र सतायेगा मां-बाप खोने का गम
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बदायूं। कोरोना संक्रमण से देश की अर्थव्यवस्था पर ही नहीं, हर वर्ग के व्यक्ति पर असर पड़ा है। किसी का धंधा चौपट हुआ है तो किसी को रोटी के लाले पड़ रहे। सबसे ज्यादा दुख उन लोगों को पहुंचा है, जिनके अपने कोरोना से हमेशा के लिए छिन गए। हालांकि परिवार के लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश की थी। उनका इलाज कराया था, अस्पतालों में भर्ती रखा लेकिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। उनकी लाख कोशिशों के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी। जिले में कई परिवार ऐसे भी हैं, जिनके परिवार में एक नहीं दो-दो लोगों की मौत हो चुकी है। ये उनके लिए सबसे बड़ा दुख था। खैर उन्होंने जैसे-तैसे खुद को संभाला और दोबारा अपनी जिंदगी शुरू की लेकिन ये दुख उन्हें हमेशा सताएगा।
केस-1
- उझानी के किलाखेड़ा निवासी अनिल वर्मा कोरोना से आखिरी सांस तक लड़ते रहे लेकिन आखिर में जंग हार गए। इस जंग में उनकी पत्नी नीतू वर्मा भी हार गईं। नीतू वर्मा की कोरोना संक्रमण से 29 अप्रैल को मौत हुई थी। उस दौरान अनिल कुमार कोरोना पॉजिटिव थे। वह एक निजी अस्पताल में अपना इलाज करा रहे थे। एक मई को उनकी भी मौत हो गई। उनके दो बेटे हैं, दोनों पुलिस में सिपाही हैं।
केस-2
- उझानी के अयोध्यागंज मोहल्ला निवासी डॉ. देवी सिंह की मौत पांच मई को हुई थी। वह कई दिन तक कोरोना से लड़ते रहे लेकिन आखिर में कोरोना से हार गए। उनकी सेवा करते-करते पत्नी गिरिजा देवी कोरोना पॉजिटिव हो गईं थीं। पति की मौत के बाद कोरोना संक्रमण की वजह से उनकी भी जान चली गई। उनके दो जवान बेटे हैं। अब उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी संभाल ली है।
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केस-3
- शहर में श्रीकृष्ण इंटर कॉलेज के शिक्षक कोरोना पॉजिटिव थे। परिवार वाले उन्हें बरेली के एक निजी अस्पताल ले गए थे। करीब पंद्रह दिन पहले उनकी कोरोना संक्रमण से मौत हो गई। इसके बाद उनकी पत्नी की भी जान चली गई। इस खबर से उनके परिवार वाले ही नहीं बल्कि उनके रिश्तेदार, परिचित दुखी हुए थे। उनके दो बच्चे हैं। एक बेटा और एक बेटी है। दोनों ही बालिग हैं। वह इस समय पढ़ाई कर रहे हैं।
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केस-1
- उझानी के किलाखेड़ा निवासी अनिल वर्मा कोरोना से आखिरी सांस तक लड़ते रहे लेकिन आखिर में जंग हार गए। इस जंग में उनकी पत्नी नीतू वर्मा भी हार गईं। नीतू वर्मा की कोरोना संक्रमण से 29 अप्रैल को मौत हुई थी। उस दौरान अनिल कुमार कोरोना पॉजिटिव थे। वह एक निजी अस्पताल में अपना इलाज करा रहे थे। एक मई को उनकी भी मौत हो गई। उनके दो बेटे हैं, दोनों पुलिस में सिपाही हैं।
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केस-2
- उझानी के अयोध्यागंज मोहल्ला निवासी डॉ. देवी सिंह की मौत पांच मई को हुई थी। वह कई दिन तक कोरोना से लड़ते रहे लेकिन आखिर में कोरोना से हार गए। उनकी सेवा करते-करते पत्नी गिरिजा देवी कोरोना पॉजिटिव हो गईं थीं। पति की मौत के बाद कोरोना संक्रमण की वजह से उनकी भी जान चली गई। उनके दो जवान बेटे हैं। अब उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी संभाल ली है।
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केस-3
- शहर में श्रीकृष्ण इंटर कॉलेज के शिक्षक कोरोना पॉजिटिव थे। परिवार वाले उन्हें बरेली के एक निजी अस्पताल ले गए थे। करीब पंद्रह दिन पहले उनकी कोरोना संक्रमण से मौत हो गई। इसके बाद उनकी पत्नी की भी जान चली गई। इस खबर से उनके परिवार वाले ही नहीं बल्कि उनके रिश्तेदार, परिचित दुखी हुए थे। उनके दो बच्चे हैं। एक बेटा और एक बेटी है। दोनों ही बालिग हैं। वह इस समय पढ़ाई कर रहे हैं।