संकट के सिपाही : अस्पतालों में बेड मिलने तक कई मरीजों को एंबुलेंस में देते रहे सांसें
- मरीजों की मदद करते-करते खुद हो गए कोरोना संक्रमित
- कई मरीजों की जान बचा चुके हैं रोहित यादव
विस्तार
देश भर में जब ऑक्सीजन की कमी से लोग दम तोड़ रहे थे तब बदायूं में एक शख्स शिद्दत से लोगों की जान बचाने में जुटा था। हम यहां एंबुलेंस 102 व 108 के जिला प्रभारी रोहित यादव का जिक्र कर रहे हैं। रोहित ने उन दिनों टीम की मदद से लोगों को अस्पताल पहुंचाने का काम किया। ऐसे लोगों को एंबुलेंस में ही ऑक्सीजन दी जिन्हें अस्पतालों में बेड नहीं मिल पा रहे थे। इस दौरान वह खुद संक्रमित हो गए थे।
रोहित यादव के मुताबिक ऑक्सीजन संकट के दिनों में वैसे तो वह अपनी ड्यूटी कर रहे थे लेकिन उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी ये थी कि हर मरीज को ऑक्सीजन मिल सके। वह सिर्फ एंबुलेंसों में ऑक्सीजन सप्लाई नहीं करा रहे थे बल्कि उन्होंने जिला अस्पताल तक को ऑक्सीजन उपलब्ध कराई। इसके अलावा 85 ऐसे मरीजों की जान बचाई जिन्हें वास्तव में कोविड हॉस्पिटल में भर्ती होना चाहिए था और जो मरीज कई-कई घंटे तक अस्पताल में भर्ती नहीं हो सके थे।
तब वह उन्हें एंबुलेंस में ही रोक कर ऑक्सीजन मुहैया कराते रहे जब अस्पताल में बेड खाली होता था, तब मरीजों को भर्ती कराया जाता था। ये जिम्मेदारी निभाने के दौरान उन्होंने अपनी बुआ, कई रिश्तेदार और परिचितों को खोया। उनकी मां भी कोरोना पॉजिटिव हुईं थीं लेकिन वह अपनी मां को अपने मैनपुरी स्थित निवास पर देखने नहीं जा सके। बाद में वह खुद पॉजिटिव हुए। 14 दिन तक होम आइसोलेट रहे। इसके बावजूद वह अपने कर्मचारियों को दिशानिर्देश देते रहे। इस दौरान उन्होंने कई लोगों की जान बचाई।
668 मरीजों को अस्पताल पहुंचवाया एंबुलेंस से
कोरोना काल वास्तव में संकट की घड़ी रही। उन्होंने लोगों की एक-एक सांस के लिए लड़ाई लड़ी। करीब 668 होम आइसोलेट मरीजों की हालत बिगड़ी। एंबुलेंस स्टाफ ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया। उन्हें जैसे ही सूचना मिली कि तुरंत गाड़ी पहुंचाई गई और मरीज को अस्पताल भेजा गया।
गर्भवती महिलाओं की अलग कराई व्यवस्था
एंबुलेंस प्रभारी रोहित यादव ने गर्भवती महिलाओं को देखते हुए उनकी अलग से व्यवस्था कराई थी। उन्हें ऑक्सीजन से लेकर 102 एंबुलेंस अलग दी थीं, जिससे उन्हें दिक्कत न हो। उन्हें भी समय पर पहुंचाया जा सके। उनके लिए ऑक्सीजन की कमी नहीं होने दी।
प्रेरणा देने वाला है इनका सेवा भाव
कोरोना कर्फ्यू में पांच हजार लोगों को बांटा खाना, बनाया दवा बैंक
गौरव जैन, झांसी
कोविड महामारी में कोरोना कर्फ्यू के चलते रोजमर्रा कमाने वालों की आर्थिक स्थिति गड़बड़ा गई तब झांसी में गौरव जैन ने युवाओं की टीम तैयार की। कोरोना कर्फ्यू के दौरान वह पिछले एक महीने में पांच हजार जरूरतमंदों व मरीजों को खाना बांट चुके हैं। इसके अलावा दवा बैंक भी तैयार किया है। डॉक्टरों की मदद से वह गरीब लोगों को नि:शुल्क दवाएं दे रहे हैं।
शहर निवासी गौरव, सनी जैन, जीतू और अनूप जैन ने कोरोना की दूसरी लहर की शुरूआत में ही जरूरतमंदों की मदद की ठान ली थी। युवाओं की टीम ने सोशल मीडिया पर चार नंबर जारी किए और लिखा कि किसी भी जरूरतमंद को खाने की समस्या हो तो संपर्क करें। यही नहीं, कोविड अस्पताल के बाहर बैठे मरीजों के तीमारदारों के लिए भी भोजन की व्यवस्था की।
युवाओं की यह टीम झोपड़ पट्टियों में भी गई। वहां भी खाना बांटा और कोविड से बचाव के लिए मास्क और सैनिटाइजर भी दिए। हाल ही में इन्होंने दवा बैंक भी तैयार किया है। इसमें डॉक्टर भी शामिल हैं, अब दवाएं देने में मदद कर रहे हैं। ये दवाएं गरीबों को नि:शुल्क दी जा रही हैं।
कोरोना संक्रमित हुए तो फोन पर करने लगे इलाज
डॉ. विवेक वर्मा, शाहजहांपुर
राजकीय मेडिकल कॉलेज में नियुक्त डा. विवेक वर्मा कोरोना संक्रमित होने के बावजूद अपनी ड्यूटी से पीछे नहीं हटे। मरीजों को लगातार फोन पर इलाज और सलाह देते रहे। जैसे ही ठीक हुए तो पहुंच गए अस्पताल में अपनी सेवा देने।
मूल रूप से हरदोई के रहने वाले विवेक वर्मा पहले राजकीय मेडिकल कॉलेज के एलटू आइसोलेशन वार्ड में कोरोना संक्रमितों का इलाज कर रहे थे। 24 मई से अब वे जूनियर रेजीडेंट डाक्टरों को ट्रेनिंग दे रहे हैं। कोरोना संक्रमितों का इलाज करते-करते 17 अप्रैल को वह खुद बीमार हो गए थे। उन्हें निमोनिया हो गया था। जांच कराने पर रिपोर्ट में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। कुछ दिन आराम और इलाज के बाद जैसे ही स्वस्थ हुए उन्होंने फिर से अपनी जिम्मेदारी निभानी शुरू कर दी।
आइसोलेशन के दौरान भी डा. विवेक मरीजों के संपर्क में रहे और इलाज करते रहे। डॉ. विवेक की शादी लखनऊ में डॉ. कल्पना से हुई है। राजकीय मेडिकल कॉलेज कैंपस में पत्नी के साथ डॉ. विवेक रहते हैं। डॉ. विवेक कहते हैं कि एलटू आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी के बाद जब घर जाते थे तो पूरी सावधानी बरतनी पड़ती थी। परिवार में भी ध्यान रखना पड़ता था। कोरोना संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। हर डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी पूरी तन्मयता से लोगों की सेवा में लगा है।