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कोरोना के कारण जिला कारागार से छोड़े गए 42 विचाराधीन बंदी
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बदायूं। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए प्रदेश सरकार के निर्देश पर जिला कारागार से 42 विचाराधीन बंदियों को छोड़ा गया है। देर शाम सभी कैदियों को घर तक पहुंचाने की भी व्यवस्था की गई। इनमें अधिकतर बंदी बदायूं जिले के रहने वाले हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए प्रदेश सरकारों को निर्देश दिए थे कि सात साल से कम अपराध वाले बंदियों को आठ सप्ताह के लिए निजी मुचलके पर रिहा किया जाए। इस पर प्रदेश सरकार ने प्रत्येक जेल अधिकारियों से ऐसे बंदियों का विवरण मांगा था। जिस पर जिला कारागार में 42 कैदियों की सूची तैयार की गई थी। इनमें अधिकतर बंदी बदायूं जिले के हैं। बाकी कासगंज, संभल और आसपास जिले के बताए जा रहे हैं। सोमवार शाम करीब चार बजे से इन बंदियों को छोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। बताते हैं कि रात आठ बजे तक सभी बंदियों को पैरोल पर छोड़ दिया गया।
सरकार के निर्देश पर 42 बंदियों को छोड़ा गया है। उन्हें घर तक पहुंचाने की भी व्यवस्था की गई है। जिससे बंदी आराम से अपने घर पहुंच सकें और उन्हें रास्ते में लॉकडाउन के कारण कोई परेशानी न हो। - आदित्य कुमार, जेलर
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सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए प्रदेश सरकारों को निर्देश दिए थे कि सात साल से कम अपराध वाले बंदियों को आठ सप्ताह के लिए निजी मुचलके पर रिहा किया जाए। इस पर प्रदेश सरकार ने प्रत्येक जेल अधिकारियों से ऐसे बंदियों का विवरण मांगा था। जिस पर जिला कारागार में 42 कैदियों की सूची तैयार की गई थी। इनमें अधिकतर बंदी बदायूं जिले के हैं। बाकी कासगंज, संभल और आसपास जिले के बताए जा रहे हैं। सोमवार शाम करीब चार बजे से इन बंदियों को छोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। बताते हैं कि रात आठ बजे तक सभी बंदियों को पैरोल पर छोड़ दिया गया।
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सरकार के निर्देश पर 42 बंदियों को छोड़ा गया है। उन्हें घर तक पहुंचाने की भी व्यवस्था की गई है। जिससे बंदी आराम से अपने घर पहुंच सकें और उन्हें रास्ते में लॉकडाउन के कारण कोई परेशानी न हो। - आदित्य कुमार, जेलर
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