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दाह संस्कार के बाद पीपीई किट गंगाघाट पर फेंक दे रहे परिजन
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उझानी (बदायूं)। कोरोना संक्रमित मृतकों के दाह संस्कार के दौरान की जाने वाली लापरवाही लोगों पर भारी पड़ सकती है। संक्रमितों का दाह संस्कार करने बाद परिजन पीपीई किट को वहीं उतारकर फेंक दे रहे हैं। तेज हवा के झोंके के साथ पीपीई किट गंगा में तैरने लगती है। आसपास के दुकानदार और वहां दाह संस्कार के लिए आने वाले अन्य लोग भी इस हरकत से भयभीत है।
लापरवाही का ऐसा माहौल तब है, जब कछला गंगाघाट पर विशेष स्नान पर्व पर श्रद्धालुओं की खासी भीड़ देखने को मिलती है। यही नहीं, किसी की स्वाभाविक मौत हो जाने पर उसके अंतिम संस्कार में परिवार के लोगों के साथ नाते-रिश्तेदार भी शामिल होते हैं। गंगाघाट किनारे के प्रसाद विक्रेताओं में हरीओम और ओमप्रकाश की ने बताया कि शुक्रवार को कोरोना संक्रमित तीन शवों का दाह संस्कार हुआ। प्रत्येक के साथ चार-छह लोग ही थे। दो चिताओं को मुखाग्नि पीपीई किट पहने लोगों ने दी। इसके बाद दो ने पीपीई किट चिताओं के पास ही फेंक दीं तो एक गंगा घाट के पास डाल गया। बाद में वह उड़कर गंगा में बहने लगी। बृहस्पतिवार को भी ऐसा ही देखने को मिला।
ऐसा भी नहीं कि पीपीई किटों के बारे में कछला नगर पंचायत प्रशासन को भनक नहीं हो। चार दिन पहले एक व्यक्ति के दाह संस्कार में शामिल होने को घाट पर पहुंचे सरकारी कर्मचारी ने शिकायत भी की थी। इसके बाद भी कोरोना संक्रमितों के दाह संस्कार के बाद पीपीई किटों को घाट के आसपास फेंकने से रोकने को किसी ने टोकने की जरूरत भी महसूस नहीं की। वैसे, गंगाघाट पर नगर पंचायत के सफाई कर्मी नियमित झाडू लगाते हैं लेकिन दाह संस्कार वाले स्थान के आसपास से पीपीई किटें हटाने में उन्हें भी डर लगता है। उनके पास न तो ग्लब्स होते हैं और न ही कोरोना संक्रमण से बचाव को दूसरा कोई पुख्ता इंतजाम। गंगाघाट समेत उसके आसपास इलाके में संक्रमण फैला तो लोगों की जान पर जोखिम बना रहेगा।
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पूर्वी छोर की तरफ बढ़ा श्मशान घाट का दायरा
उझानी। कछला गंगाघाट पर पिछले कई दिनों से चिताओं की संख्या में इजाफा होता जा रहा है। शायद ही ऐसा कोई दिन रहे, जब दो दर्जन से कम चिताएं नजर आएं। हालांकि इनमें दो-तीन कोरोना संक्रमितों की चिताएं होती हैं लेकिन फिर भी श्मशान घाट कम पड़ने लगा। इसके बाद श्मशान घाट का दायरा पूर्वी छोर की ओर बढ़ गया। बताते हैं कि कुछ लोग तड़के ही चिताओं की राख को गंगा में प्रवाहित कर जाते हैं। इससे गंगाजल प्रदूषित होने का खतरा बना हुआ है।
गंगा घाट पर खुले में पीपीई किटें फेंके जाने का मामला संज्ञान में नहीं आया है। कछला नगर पंचायत के ईओ को गाइडलाइन का पालन करने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए जा चुके हैं। संक्रमितों का अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकाल के अनुरूप होता है। - लाल बहादुर, एसडीएम सदर।
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लापरवाही का ऐसा माहौल तब है, जब कछला गंगाघाट पर विशेष स्नान पर्व पर श्रद्धालुओं की खासी भीड़ देखने को मिलती है। यही नहीं, किसी की स्वाभाविक मौत हो जाने पर उसके अंतिम संस्कार में परिवार के लोगों के साथ नाते-रिश्तेदार भी शामिल होते हैं। गंगाघाट किनारे के प्रसाद विक्रेताओं में हरीओम और ओमप्रकाश की ने बताया कि शुक्रवार को कोरोना संक्रमित तीन शवों का दाह संस्कार हुआ। प्रत्येक के साथ चार-छह लोग ही थे। दो चिताओं को मुखाग्नि पीपीई किट पहने लोगों ने दी। इसके बाद दो ने पीपीई किट चिताओं के पास ही फेंक दीं तो एक गंगा घाट के पास डाल गया। बाद में वह उड़कर गंगा में बहने लगी। बृहस्पतिवार को भी ऐसा ही देखने को मिला।
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ऐसा भी नहीं कि पीपीई किटों के बारे में कछला नगर पंचायत प्रशासन को भनक नहीं हो। चार दिन पहले एक व्यक्ति के दाह संस्कार में शामिल होने को घाट पर पहुंचे सरकारी कर्मचारी ने शिकायत भी की थी। इसके बाद भी कोरोना संक्रमितों के दाह संस्कार के बाद पीपीई किटों को घाट के आसपास फेंकने से रोकने को किसी ने टोकने की जरूरत भी महसूस नहीं की। वैसे, गंगाघाट पर नगर पंचायत के सफाई कर्मी नियमित झाडू लगाते हैं लेकिन दाह संस्कार वाले स्थान के आसपास से पीपीई किटें हटाने में उन्हें भी डर लगता है। उनके पास न तो ग्लब्स होते हैं और न ही कोरोना संक्रमण से बचाव को दूसरा कोई पुख्ता इंतजाम। गंगाघाट समेत उसके आसपास इलाके में संक्रमण फैला तो लोगों की जान पर जोखिम बना रहेगा।
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पूर्वी छोर की तरफ बढ़ा श्मशान घाट का दायरा
उझानी। कछला गंगाघाट पर पिछले कई दिनों से चिताओं की संख्या में इजाफा होता जा रहा है। शायद ही ऐसा कोई दिन रहे, जब दो दर्जन से कम चिताएं नजर आएं। हालांकि इनमें दो-तीन कोरोना संक्रमितों की चिताएं होती हैं लेकिन फिर भी श्मशान घाट कम पड़ने लगा। इसके बाद श्मशान घाट का दायरा पूर्वी छोर की ओर बढ़ गया। बताते हैं कि कुछ लोग तड़के ही चिताओं की राख को गंगा में प्रवाहित कर जाते हैं। इससे गंगाजल प्रदूषित होने का खतरा बना हुआ है।
गंगा घाट पर खुले में पीपीई किटें फेंके जाने का मामला संज्ञान में नहीं आया है। कछला नगर पंचायत के ईओ को गाइडलाइन का पालन करने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए जा चुके हैं। संक्रमितों का अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकाल के अनुरूप होता है। - लाल बहादुर, एसडीएम सदर।