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बदायूं: आठ साल की बच्ची से दुष्कर्म करने वाले स्टेशनरी दुकानदार को 20 साल की कैद, कोर्ट ने जुर्माना भी लगाया
Thu, 17 Sep 2026 01:53 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 17 Sep 2026 01:53 AM IST
सार
बदायूं में आठ साल की बच्ची से दुष्कर्म के दोषी स्टेशनरी संचालक तारिक को 20 साल कैद की सजा सुनाई गई है। पॉक्सो कोर्ट ने बुधवार को उसे 1.05 लाख रुपये जुर्माने के साथ यह सजा सुनाई। यह घटना छह अक्तूबर 2024 की शाम हुई थी।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बदायूं में आठ साल की बच्ची से दुष्कर्म करने और जान से मारने की धमकी देने के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो कोर्ट ने स्टेशनरी दुकान संचालक तारिक को दोषी करार दिया है। न्यायाधीश नीलांजना ने बुधवार को दोषी को 20 साल कैद की और 1.05 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, छह अक्तूबर 2024 की शाम बच्ची दादी के घर से सामान लेने निकली थी। रास्ते में 25 वर्षीय तारिक ने उसे पैसों का लालच देकर दुकान में बुलाया और दुष्कर्म किया। इसके बाद उसने बच्ची को पांच रुपये थमाए और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। बच्ची के घर पहुंचकर रोने लगी और घटना की जानकारी दी। जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया था। कोर्ट में अभियोजन पक्ष ने 11 गवाह पेश किए।
तारिक को पहले से जानती थी बच्ची
पीड़िता ने कोर्ट को बताया कि वह तारिक को पहले से जानती थी और उसकी दुकान से कॉपी-पेंसिल खरीदती थी। तारिक ने उसके साथ रक्षाबंधन पर भी गलत काम किया था। आरोपी ने बचाव में जमीन के विवाद और रंजिश की झूठी कहानी गढ़कर आठ गवाह पेश किए, लेकिन मजबूत साक्ष्यों के आगे उसकी एक न चली। अदालत ने तारिक को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार, छह अक्तूबर 2024 की शाम बच्ची दादी के घर से सामान लेने निकली थी। रास्ते में 25 वर्षीय तारिक ने उसे पैसों का लालच देकर दुकान में बुलाया और दुष्कर्म किया। इसके बाद उसने बच्ची को पांच रुपये थमाए और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। बच्ची के घर पहुंचकर रोने लगी और घटना की जानकारी दी। जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया था। कोर्ट में अभियोजन पक्ष ने 11 गवाह पेश किए।
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तारिक को पहले से जानती थी बच्ची
पीड़िता ने कोर्ट को बताया कि वह तारिक को पहले से जानती थी और उसकी दुकान से कॉपी-पेंसिल खरीदती थी। तारिक ने उसके साथ रक्षाबंधन पर भी गलत काम किया था। आरोपी ने बचाव में जमीन के विवाद और रंजिश की झूठी कहानी गढ़कर आठ गवाह पेश किए, लेकिन मजबूत साक्ष्यों के आगे उसकी एक न चली। अदालत ने तारिक को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
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पीड़िता ने यह दी थी गवाही
अभियोजन पक्ष ने पीड़िता से घटनाक्रम को लेेकर किए गए कई सवाल-जवाब के उत्तर लिखित में कोर्ट में बताए। इसमें पीड़िता ने घटना वाला दिन रविवार बताया। कहा, रास्ते में तारिक खड़ा था। उसने उसे बुलाया। तारिक को वह पहले से जानती थी। उसकी दुकान पर कॉपी-पेंसिल लेने जाती थी। गंदा काम करने के बाद उसने डराया और धमकाया। कहा, घर पर किसी को मत बताना, नहीं तो जान से मार देगा। तारिक ने दूसरी बार इस साल रक्षाबंधन पर भी गलत काम किया था।
दोषी ने यह कहकर खुद को बचाने का किया प्रयास
दोषसिद्ध तारिक ने कोर्ट में कई तरह से बचने का प्रयास किया। दोषी ने कोर्ट को बताया था कि उसकी मां ने पीड़िता के पिता से उसकी जमीन खरीदी थी। बाद में पीड़िता का पिता वो जमीन वापस लेने को कहता था। पिता ने मना कर दिया था। पीड़िता के पिता ने अपना मकान बनवाने के लिए उसके ईंट भट्ठे से ईंटें भी ली थीं और भाई की शादी में मैरिज हाल भी बुक कराया था।
अभियोजन पक्ष ने पीड़िता से घटनाक्रम को लेेकर किए गए कई सवाल-जवाब के उत्तर लिखित में कोर्ट में बताए। इसमें पीड़िता ने घटना वाला दिन रविवार बताया। कहा, रास्ते में तारिक खड़ा था। उसने उसे बुलाया। तारिक को वह पहले से जानती थी। उसकी दुकान पर कॉपी-पेंसिल लेने जाती थी। गंदा काम करने के बाद उसने डराया और धमकाया। कहा, घर पर किसी को मत बताना, नहीं तो जान से मार देगा। तारिक ने दूसरी बार इस साल रक्षाबंधन पर भी गलत काम किया था।
दोषी ने यह कहकर खुद को बचाने का किया प्रयास
दोषसिद्ध तारिक ने कोर्ट में कई तरह से बचने का प्रयास किया। दोषी ने कोर्ट को बताया था कि उसकी मां ने पीड़िता के पिता से उसकी जमीन खरीदी थी। बाद में पीड़िता का पिता वो जमीन वापस लेने को कहता था। पिता ने मना कर दिया था। पीड़िता के पिता ने अपना मकान बनवाने के लिए उसके ईंट भट्ठे से ईंटें भी ली थीं और भाई की शादी में मैरिज हाल भी बुक कराया था।