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Budaun News: दो लाख की रिश्वत लेते चकबंदी विभाग का कर्मचारी गिरफ्तार
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रिश्वत लेने का आरोपी राम नरेश।स्रोत-पुलिस
बिसौली (बदायूं)। एंटी करप्शन टीम ने सोमवार दोपहर चकबंदी अधिकारी कार्यालय में दो लाख रुपये की रिश्वत लेते चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को पकड़ लिया। रंगेहाथ पकड़े गए कर्मचारी ने बताया कि सीओ चकबंदी के कहने पर उसने जमीन के मामले में यह रुपये लिए थे। मौके से भागे चकबंदी अधिकारी को पुलिस तलाश रही है।
इस्लामनगर थाना क्षेत्र के गांव सिठौली निवासी अजीत सिंह ने बताया कि साल 2007 में उनकी मां मंजुल ने तीन लोगों से करीब 20 बीघा जमीन खरीद कर बैनामा कराया था। मां के नाम दाखिल खारिज भी हो गया। चकबंदी अधिकारी जमीन को ग्रामसभा की जमीन घोषित करने की लगातार धमकी दे रहे थे। अजीत सिंह ने इस मामले की शिकायत बरेली जाकर एंटी करप्शन टीम से की। इस पर टीम के प्रभारी प्रवीण सान्याल ने रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार करने के लिए सोमवार को चकबंदी अधिकारी कार्यालय के परिसर की घेराबंदी कर दी।
इसी बीच अजीत सिंह दो लाख रुपये लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रामनरेश के पास पहुंचे। जैसे ही अजीत ने रामनरेश को दो लाख रुपये दिए, टीम ने रंगेहाथ उसको गिरफ्तार कर लिया। टीम उसे सिविल लाइंस थाने ले गई। यहां उसने सीओ चकबंदी प्रमोद कुमार सिंघल के कहने पर दो लाख रुपये की रिश्वत लेने की बात स्वीकार की। एंटी करप्शन टीम के प्रभारी प्रवीण सान्याल की तहरीर पर हरदोई के बिलग्राम थानाक्षेत्र के गांव घनसरे निवासी राम नरेश और सीओ चकबंदी प्रमोद कुमार सिंघल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
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हाईकोर्ट का आदेश भी नहीं मान रहे थे सीओ चकबंदी
- पीड़ित पक्ष को ग्राम सभा की जमीन घोषित करने की दे रहे थे धमकी
- हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया था चकबंदी अधिकारी का आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। सीओ चकबंदी लालच में इस कदर अंधे हो गए थे कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी जमीन अजीत की मां के नाम दर्ज नहीं कर रहे थे। इसके बदले में दो लाख रुपये की मांग की जा रही थी। हाईकोर्ट ने चकबंदी अधिकारी का आदेश निरस्त कर दिया था।
अजीत ने एंटी करप्शन टीम के अधिकारियों को बताया कि 2007 में उनकी मां मंजुल ने तीन लोगों से करीब 20 बीघा जमीन खरीदकर बैनामा कराया था। सीओ चकबंदी प्रमोद कुमार सिंघल जमीन को ग्रामसभा की जमीन घोषित करने की लगातार धमकी दे रहे थे। करीब तीन माह पहले उन्होंने और उनकी टीम ने मां के नाम दर्ज जमीन को नवीनपर्ती में दर्ज करा दिया।
इसके चलते अजीत ने हाईकोर्ट प्रयागराज में एक याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने सीओ चकबंदी के आदेश को निरस्त कर उस जमीन को पुन: अजीत सिंह की मां के नाम पर दर्ज करने का आदेश दिया। फिर भी सीओ चकबंदी प्रमोद कुमार सिंघल इसके एवज में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी राम नरेश की मदद से उनसे दो लाख रुपये मांग रहा था।
अजीत काफी समय से चकबंदी विभाग के चक्कर लगा रहा था। हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर उन्हें टरका दिया जाता। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने साफ कहा कि जब तक दो लाख रुपये नहीं दोगे साहब काम नहीं करेंगे। अजीत समझ गया कि बगैर रिश्वत लिए यह हाईकोर्ट का आदेश भी नहीं मानेंगे। तब उन्होंने बरेली जाकर भ्रष्टाचार निवारण संगठन के अधिकारियों से शिकायत की। दस्तावेज दिखाए। इसके बाद टीम यहां आई और कार्रवाई की।
भ्रष्टाचार के लिए चर्चित हो गया है चकबंदी विभाग
जिले में चकबंदी विभाग भ्रष्टाचार के लिए चर्चित हो गया है। बताया जाता है कि यहां अधिकारी से लेकर नीचे तक के कर्मचारी बगैर रुपये लिए कोई काम नहीं करते। कई जांचें ऐसी हैं जो यहां लंबित पड़ी हैं।
ट्रैप होते ही भाग खड़े हुए कर्मचारी
एंटी करप्शन की टीम ने जैसे ही सोमवार दोपहर में चकबंदी विभाग में जाकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी राम नरेश को पकड़ा तो विभाग में खलबली मच गई। अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक भाग गए। सीओ चकबंदी प्रमोद कुमार सिंघल भाग गया। जब कर्मचारियों को पता चला कि एंटी करप्शन की टीम ने छापा मारा है तब अधिकांश कर्मचारी कार्यालय छोड़कर भाग गए। टीम के जाने के करीब एक घंटे बाद यहां हालात कुछ ठीक हो सके।
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इस्लामनगर थाना क्षेत्र के गांव सिठौली निवासी अजीत सिंह ने बताया कि साल 2007 में उनकी मां मंजुल ने तीन लोगों से करीब 20 बीघा जमीन खरीद कर बैनामा कराया था। मां के नाम दाखिल खारिज भी हो गया। चकबंदी अधिकारी जमीन को ग्रामसभा की जमीन घोषित करने की लगातार धमकी दे रहे थे। अजीत सिंह ने इस मामले की शिकायत बरेली जाकर एंटी करप्शन टीम से की। इस पर टीम के प्रभारी प्रवीण सान्याल ने रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार करने के लिए सोमवार को चकबंदी अधिकारी कार्यालय के परिसर की घेराबंदी कर दी।
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इसी बीच अजीत सिंह दो लाख रुपये लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रामनरेश के पास पहुंचे। जैसे ही अजीत ने रामनरेश को दो लाख रुपये दिए, टीम ने रंगेहाथ उसको गिरफ्तार कर लिया। टीम उसे सिविल लाइंस थाने ले गई। यहां उसने सीओ चकबंदी प्रमोद कुमार सिंघल के कहने पर दो लाख रुपये की रिश्वत लेने की बात स्वीकार की। एंटी करप्शन टीम के प्रभारी प्रवीण सान्याल की तहरीर पर हरदोई के बिलग्राम थानाक्षेत्र के गांव घनसरे निवासी राम नरेश और सीओ चकबंदी प्रमोद कुमार सिंघल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
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हाईकोर्ट का आदेश भी नहीं मान रहे थे सीओ चकबंदी
- पीड़ित पक्ष को ग्राम सभा की जमीन घोषित करने की दे रहे थे धमकी
- हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया था चकबंदी अधिकारी का आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। सीओ चकबंदी लालच में इस कदर अंधे हो गए थे कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी जमीन अजीत की मां के नाम दर्ज नहीं कर रहे थे। इसके बदले में दो लाख रुपये की मांग की जा रही थी। हाईकोर्ट ने चकबंदी अधिकारी का आदेश निरस्त कर दिया था।
अजीत ने एंटी करप्शन टीम के अधिकारियों को बताया कि 2007 में उनकी मां मंजुल ने तीन लोगों से करीब 20 बीघा जमीन खरीदकर बैनामा कराया था। सीओ चकबंदी प्रमोद कुमार सिंघल जमीन को ग्रामसभा की जमीन घोषित करने की लगातार धमकी दे रहे थे। करीब तीन माह पहले उन्होंने और उनकी टीम ने मां के नाम दर्ज जमीन को नवीनपर्ती में दर्ज करा दिया।
इसके चलते अजीत ने हाईकोर्ट प्रयागराज में एक याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने सीओ चकबंदी के आदेश को निरस्त कर उस जमीन को पुन: अजीत सिंह की मां के नाम पर दर्ज करने का आदेश दिया। फिर भी सीओ चकबंदी प्रमोद कुमार सिंघल इसके एवज में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी राम नरेश की मदद से उनसे दो लाख रुपये मांग रहा था।
अजीत काफी समय से चकबंदी विभाग के चक्कर लगा रहा था। हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर उन्हें टरका दिया जाता। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने साफ कहा कि जब तक दो लाख रुपये नहीं दोगे साहब काम नहीं करेंगे। अजीत समझ गया कि बगैर रिश्वत लिए यह हाईकोर्ट का आदेश भी नहीं मानेंगे। तब उन्होंने बरेली जाकर भ्रष्टाचार निवारण संगठन के अधिकारियों से शिकायत की। दस्तावेज दिखाए। इसके बाद टीम यहां आई और कार्रवाई की।
भ्रष्टाचार के लिए चर्चित हो गया है चकबंदी विभाग
जिले में चकबंदी विभाग भ्रष्टाचार के लिए चर्चित हो गया है। बताया जाता है कि यहां अधिकारी से लेकर नीचे तक के कर्मचारी बगैर रुपये लिए कोई काम नहीं करते। कई जांचें ऐसी हैं जो यहां लंबित पड़ी हैं।
ट्रैप होते ही भाग खड़े हुए कर्मचारी
एंटी करप्शन की टीम ने जैसे ही सोमवार दोपहर में चकबंदी विभाग में जाकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी राम नरेश को पकड़ा तो विभाग में खलबली मच गई। अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक भाग गए। सीओ चकबंदी प्रमोद कुमार सिंघल भाग गया। जब कर्मचारियों को पता चला कि एंटी करप्शन की टीम ने छापा मारा है तब अधिकांश कर्मचारी कार्यालय छोड़कर भाग गए। टीम के जाने के करीब एक घंटे बाद यहां हालात कुछ ठीक हो सके।

रिश्वत लेने का आरोपी राम नरेश।स्रोत-पुलिस

रिश्वत लेने का आरोपी राम नरेश।स्रोत-पुलिस

रिश्वत लेने का आरोपी राम नरेश।स्रोत-पुलिस