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तीन घोड़ों में ग्लैंडर्स की पुष्टि, खलबली
बदायूं।
Updated Fri, 30 Jun 2017 12:09 AM IST
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200 सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे अश्व अनुसंधान केंद्र, हिसार
पशु चिकित्सा विभाग की ओर से दो महीने पहले 200 सैंपल जांच के लिए राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार भेजे गए थे। इनमें से तीन में ग्लैंडर्स की पुष्टि होने पर विभाग में खलबली मची हुई है।
जिले में करीब आठ हजार से अधिक अश्व प्रजाति के पशु हैं। इनमें से अप्रैल माह से अब तक 232 सैंपल जांच के लिए भेजे जा चुके हैं। करीब 15 दिन पहले आई रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ है कि बिसौली क्षेत्र के गांव मुड़िया धुरेकी से जो दस सैंपल लिए गए थे। उनमें तीन घोड़ों में ग्लैंडर्स की पुष्टि हुई है। इसके बाद पूरे जिले में अलर्ट जारी कर दिया गया है। वहीं पशु चिकित्साधिकारी अरुण कुमार जादौन ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देशन में तीनों घोड़ों को यूथेनाइज कर दिया गया है। यानी आठ फुट गहरे गड्डे में जिंदा दफन कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि दो साल पहले गुजरात से कुछ लोग घोड़ों के साथ काम करने के लिए यहां आए थे। उनसे ही यहां ग्लैंडर्स फैला। उन्होंने कहा कि हर उप चिकित्साधिकारियों को निर्देश दिया जा चुका है कि वो अपने-अपने इलाके में अश्वपालकों को जागरूक करें।
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रोक के बाद भी बाहर से आ रहे अश्व प्रजाति के पशु
कादरचौक। गधा, घोड़ा, खच्चर आदि जानवरों मे होने वाली जानलेवा बीमारी दो साल पहले जिले में आई थी। जिलाधिकारी के निर्देश पर इस बीमारी से बचने के लिए करीब दर्जन भर अश्व प्रजाति के पशुओं को जिंदा दफन कर दिया गया था। बाहरी जिलों से अश्व प्रजाति के आने जाने का सिलसिला लगा रहता है। हालांकि इस पर प्रतिबंध भी लगा है, फिर भी इसका पालन नहीं होता।
ग्लैंडर्स के लक्षण
ग्लैंडर पीड़ित पशु के शरीर में गांठे बनने लगती है।
आंख से पानी गिरना शरीर पर फफोले पड़ जाना प्राथमिक पहचान है।
---------------
ग्लैंडर को लेकर जिले में अलर्ट जारी कर दिया गया है। बाहर से आने वाले अश्व प्रजाति के पशुओं पर रोक लगा दी गई है। जो अश्वपालक गुजरात को काम करने जाते है, उनकी वजह से जिले में ग्लैंडर्स बढ़ रहा है। हालांकि इसके लिए भी प्रयास किया जा रहा है। समय-समय पर गोष्ठी और सेमिनार आयोजित किए जा रहे हैं। पोस्टर और दीवार लेखन के माध्यम से भी ग्लैंडर को लेकर जानकारियां दी जा रही हैं। पशु चिकित्सा विभाग गंभीरता से इस कार्य में जुटा हआ है।
-अरुण कुमार जादौन, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, बदायूं
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पशु चिकित्सा विभाग की ओर से दो महीने पहले 200 सैंपल जांच के लिए राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार भेजे गए थे। इनमें से तीन में ग्लैंडर्स की पुष्टि होने पर विभाग में खलबली मची हुई है।
जिले में करीब आठ हजार से अधिक अश्व प्रजाति के पशु हैं। इनमें से अप्रैल माह से अब तक 232 सैंपल जांच के लिए भेजे जा चुके हैं। करीब 15 दिन पहले आई रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ है कि बिसौली क्षेत्र के गांव मुड़िया धुरेकी से जो दस सैंपल लिए गए थे। उनमें तीन घोड़ों में ग्लैंडर्स की पुष्टि हुई है। इसके बाद पूरे जिले में अलर्ट जारी कर दिया गया है। वहीं पशु चिकित्साधिकारी अरुण कुमार जादौन ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देशन में तीनों घोड़ों को यूथेनाइज कर दिया गया है। यानी आठ फुट गहरे गड्डे में जिंदा दफन कर दिया गया है।
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उन्होंने कहा कि दो साल पहले गुजरात से कुछ लोग घोड़ों के साथ काम करने के लिए यहां आए थे। उनसे ही यहां ग्लैंडर्स फैला। उन्होंने कहा कि हर उप चिकित्साधिकारियों को निर्देश दिया जा चुका है कि वो अपने-अपने इलाके में अश्वपालकों को जागरूक करें।
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रोक के बाद भी बाहर से आ रहे अश्व प्रजाति के पशु
कादरचौक। गधा, घोड़ा, खच्चर आदि जानवरों मे होने वाली जानलेवा बीमारी दो साल पहले जिले में आई थी। जिलाधिकारी के निर्देश पर इस बीमारी से बचने के लिए करीब दर्जन भर अश्व प्रजाति के पशुओं को जिंदा दफन कर दिया गया था। बाहरी जिलों से अश्व प्रजाति के आने जाने का सिलसिला लगा रहता है। हालांकि इस पर प्रतिबंध भी लगा है, फिर भी इसका पालन नहीं होता।
ग्लैंडर्स के लक्षण
ग्लैंडर पीड़ित पशु के शरीर में गांठे बनने लगती है।
आंख से पानी गिरना शरीर पर फफोले पड़ जाना प्राथमिक पहचान है।
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ग्लैंडर को लेकर जिले में अलर्ट जारी कर दिया गया है। बाहर से आने वाले अश्व प्रजाति के पशुओं पर रोक लगा दी गई है। जो अश्वपालक गुजरात को काम करने जाते है, उनकी वजह से जिले में ग्लैंडर्स बढ़ रहा है। हालांकि इसके लिए भी प्रयास किया जा रहा है। समय-समय पर गोष्ठी और सेमिनार आयोजित किए जा रहे हैं। पोस्टर और दीवार लेखन के माध्यम से भी ग्लैंडर को लेकर जानकारियां दी जा रही हैं। पशु चिकित्सा विभाग गंभीरता से इस कार्य में जुटा हआ है।
-अरुण कुमार जादौन, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, बदायूं