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मांगे थे 3.83 करोड़, मिले 12.34 लाख..दुर्दशा के शिकार हैं कई पशु अस्पताल
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उसावां का राजकीय पशु चिकित्सालय। फाइल फोटो
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। जिला योजना 2021-22 ने पशुपालन विभाग को भी निराश किया। 20 से ज्यादा ऐसे विभाग हैं जो पूरे साल जिला योजना के तहत बजट का इंतजार करते रहे, लेकिन साल बीतने के बाद भी कुछ नहीं मिलता। ऐसे विभागों की संख्या भी काफी है जिनको बजट तो मिला, लेकिन वह नाकाफी था। ऐसे में वह कोई काम ही नहीं करा सके। पशुपालन विभाग के साथ भी ऐसा ही हुआ। विभाग को जिला योजना के तहत पशु चिकित्सालयों के उच्चीकरण समेत अन्य कार्यों के लिए 3.83 करोड़ की स्वीकृति दी गई, लेकिन इसके सापेक्ष 12.34 लाख ही अवमुक्त किए गए।
जिले में पशु अस्पतालों की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। कुल 26 पशु अस्पताल हैं। पशुओं के इलाज के नाम पर ज्यादातर अस्पतालों में कुछ नहीं है। कई पशु अस्पतालों के भवन जर्जर हो गए हैं। यहां ताले पड़े रहते हैं। अन्य सुविधाओं का भी अभाव है। जिले में करीब 2.79 लाख गोवंशीय और 11 लाख महिषवंशीय पशु हैं। करीब 12 हजार संरक्षित पशु भी हैं। बावजूद इसके इलाज न मिलने के कारण हर वर्ष बीमारियों के कारण सैकड़ों पशुओं की मौत हो जाती है। जिले के छह पशु अस्पतालों के उच्चीकरण और यहां पशु चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए पशुपालन विभाग ने 2021-22 में जिला योजना के तहत 3.83 करोड़ की कार्ययोजना दी थी।
सितंबर 2021 में हुई जिला योजना की बैठक में विभाग के लिए 3.83 करोड़ स्वीकृत भी कर दिए गए, लेकिन विभाग पूरे साल बजट का इंतजार करता रहा। स्वीकृत बजट के सापेक्ष 12.34 लाख ही अवमुक्त किए गए। यह बजट दवाओं, डीजल समेत अन्य मदों में खर्च हो गया। बजट न मिलने से पशु अस्पतालों की दशा नहीं सुधर सकी। अब पशुपालन विभाग फिर से कार्ययोजना तैयार कर रहा है।
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राजकीय गोशालाओं में भी बीमारियों से मर रहे पशु
जिले की कुल 131 राजकीय गोशालाओं में 15 हजार से ज्यादा गोवंशीय पशु हैं। जिले में कुल गोवंशीय पशुओं की संख्या की बात करें तो यह करीब 2.79 लाख है। बड़ी संख्या में गोवंशीय पशुओं को सड़कों पर आवारा घूमते देखा जा सकता है। अक्सर इनके हमले में लागों के घायल होने के साथ जान भी चली जाती है। गोशालाओं में रखे गए पशुओं के इलाज का जिम्मा भी इसी विभाग पर है, लेकिन गोशालाओं में भी पशुओं को समुचित इलाज नहीं मिल पाता। यहां हर वर्ष बड़ी संख्या में पशुओं की मौत हो रही है। सड़कों पर घूमने वाले पशु भी हादसों का शिकार होकर मर जा रहे हैं। पशुपालन विभाग संसाधनों का रोना रोता है। हालांकि, सरकार हर महीने गोशालाओं पर मोटा बजट खर्च करती है।
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जिले में पशु अस्पताल- 26
जिले में गोवंशीय पशु- 2.79 लाख
जिले में महिषवंशीय पशु- 11 लाख
जिले में राजकीय गोशालाएं- 131
जिले में संरक्षित पशु- 12 हजार
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जिला योजना- 2021-21-
कार्य योजना- 383.18 लाख
अनुमोदित बजट- 383.18 लाख
अवमुक्त बजट- 12.34 लाख
व्यय बजट- 11.18 लाख
अनुमोदित के सापेक्ष अवमुक्त बजट-3.22 प्रतिशत
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ये है स्टाफ का हाल
उसावां कस्बे के राजकीय पशु चिकित्सालय क़ो फार्मासिस्ट व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी चला रहे हैं। डॉक्टर का चार्ज दातागंज के डिप्टी सीवीओ पर है। यहां तैनात पशु चिकित्सक डॉ. मदनपाल का चार साल पहले स्थानांतरण हो गया था। पशु चिकित्सालय पर आने वाले बीमार पशुओं का इलाज फार्मासिस्ट सतीश चन्द्र सैनी व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मोहम्मद नाजिम करते हैं। यही हाल कादरचौक का भी है। पूरे ब्लॉक में एक ही पशु चिकित्सक है, जो तीन दिन कादरचौक व तीन दिन असरासी बैठते हैं। एक पशुधन प्रसार अधिकारी डॉ. अमित सक्सेना हैं। एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है। यहां स्टाफ की काफी कमी है। यह तो बनागी है ऐसा ही हाल जिले के अन्य पशु चिकित्सालयों का है।
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छह पशु अस्पतालों के उच्चीकरण और पशुओं के लिए बेहतर चिकित्सा सेवाएं शुरू करने को जिला योजना में 3.83 करोड़ का बजट अनुमोदित किया गया था। इसके सापेक्ष जिला योजना में 12.34 लाख बजट ही अवमुक्त हो सका। इस कारण पशु अस्पतालों के उच्चीकरण समेत कई काम पूरे नहीं हो सके। अवमुक्त बजट में से 11.18 लाख का उपयोग दवाओं समेत अन्य मदों में कर लिया गया।
-डॉ. एके जादौन, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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जिले में पशु अस्पतालों की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। कुल 26 पशु अस्पताल हैं। पशुओं के इलाज के नाम पर ज्यादातर अस्पतालों में कुछ नहीं है। कई पशु अस्पतालों के भवन जर्जर हो गए हैं। यहां ताले पड़े रहते हैं। अन्य सुविधाओं का भी अभाव है। जिले में करीब 2.79 लाख गोवंशीय और 11 लाख महिषवंशीय पशु हैं। करीब 12 हजार संरक्षित पशु भी हैं। बावजूद इसके इलाज न मिलने के कारण हर वर्ष बीमारियों के कारण सैकड़ों पशुओं की मौत हो जाती है। जिले के छह पशु अस्पतालों के उच्चीकरण और यहां पशु चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए पशुपालन विभाग ने 2021-22 में जिला योजना के तहत 3.83 करोड़ की कार्ययोजना दी थी।
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सितंबर 2021 में हुई जिला योजना की बैठक में विभाग के लिए 3.83 करोड़ स्वीकृत भी कर दिए गए, लेकिन विभाग पूरे साल बजट का इंतजार करता रहा। स्वीकृत बजट के सापेक्ष 12.34 लाख ही अवमुक्त किए गए। यह बजट दवाओं, डीजल समेत अन्य मदों में खर्च हो गया। बजट न मिलने से पशु अस्पतालों की दशा नहीं सुधर सकी। अब पशुपालन विभाग फिर से कार्ययोजना तैयार कर रहा है।
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राजकीय गोशालाओं में भी बीमारियों से मर रहे पशु
जिले की कुल 131 राजकीय गोशालाओं में 15 हजार से ज्यादा गोवंशीय पशु हैं। जिले में कुल गोवंशीय पशुओं की संख्या की बात करें तो यह करीब 2.79 लाख है। बड़ी संख्या में गोवंशीय पशुओं को सड़कों पर आवारा घूमते देखा जा सकता है। अक्सर इनके हमले में लागों के घायल होने के साथ जान भी चली जाती है। गोशालाओं में रखे गए पशुओं के इलाज का जिम्मा भी इसी विभाग पर है, लेकिन गोशालाओं में भी पशुओं को समुचित इलाज नहीं मिल पाता। यहां हर वर्ष बड़ी संख्या में पशुओं की मौत हो रही है। सड़कों पर घूमने वाले पशु भी हादसों का शिकार होकर मर जा रहे हैं। पशुपालन विभाग संसाधनों का रोना रोता है। हालांकि, सरकार हर महीने गोशालाओं पर मोटा बजट खर्च करती है।
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जिले में पशु अस्पताल- 26
जिले में गोवंशीय पशु- 2.79 लाख
जिले में महिषवंशीय पशु- 11 लाख
जिले में राजकीय गोशालाएं- 131
जिले में संरक्षित पशु- 12 हजार
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जिला योजना- 2021-21-
कार्य योजना- 383.18 लाख
अनुमोदित बजट- 383.18 लाख
अवमुक्त बजट- 12.34 लाख
व्यय बजट- 11.18 लाख
अनुमोदित के सापेक्ष अवमुक्त बजट-3.22 प्रतिशत
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ये है स्टाफ का हाल
उसावां कस्बे के राजकीय पशु चिकित्सालय क़ो फार्मासिस्ट व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी चला रहे हैं। डॉक्टर का चार्ज दातागंज के डिप्टी सीवीओ पर है। यहां तैनात पशु चिकित्सक डॉ. मदनपाल का चार साल पहले स्थानांतरण हो गया था। पशु चिकित्सालय पर आने वाले बीमार पशुओं का इलाज फार्मासिस्ट सतीश चन्द्र सैनी व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मोहम्मद नाजिम करते हैं। यही हाल कादरचौक का भी है। पूरे ब्लॉक में एक ही पशु चिकित्सक है, जो तीन दिन कादरचौक व तीन दिन असरासी बैठते हैं। एक पशुधन प्रसार अधिकारी डॉ. अमित सक्सेना हैं। एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है। यहां स्टाफ की काफी कमी है। यह तो बनागी है ऐसा ही हाल जिले के अन्य पशु चिकित्सालयों का है।
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छह पशु अस्पतालों के उच्चीकरण और पशुओं के लिए बेहतर चिकित्सा सेवाएं शुरू करने को जिला योजना में 3.83 करोड़ का बजट अनुमोदित किया गया था। इसके सापेक्ष जिला योजना में 12.34 लाख बजट ही अवमुक्त हो सका। इस कारण पशु अस्पतालों के उच्चीकरण समेत कई काम पूरे नहीं हो सके। अवमुक्त बजट में से 11.18 लाख का उपयोग दवाओं समेत अन्य मदों में कर लिया गया।
-डॉ. एके जादौन, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी