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दो महीने में दो कोस भी आगे नहीं बढ़ पाया गंगा एक्सप्रेस-वे का काम
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गंगा एक्सप्रेस वे पर चले रहे काम का फाइल फोटो। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। गंगा एक्सप्रेस-वे का काम दो महीने में दो कोस भी आगे नहीं बढ़ पाया। ऐसा अधिकारियों की लापरवाही के कारण हुआ। दरअसल, अब तक नए सिरे से एक्सप्रेस-वे की सीमाएं तय नहीं हो सकी हैं। दस अप्रैल को जिन सीमाओं और एक्सप्रेस-वे के नक्शे के अनुसार भूमि समतलीकरण का काम शुरू हुआ था वह गलत थीं। अब नए सिरे से पैमाइश का काम चल रहा है। ऐसे में दो महीने में जितना काम होना था उसका दस फीसदी भी नहीं हो सका है।
गंगा एक्सप्रेस-वे बदायूं की चार तहसीलों के 85 गांवों से होता हुआ जिले में करीब 95 किमी दूरी तय करेगा। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस-वे डवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) ने एक्सप्रेस-वे के लिए जिले में भूमि अधिग्रहण का काम फरवरी 2020 में शुरू किया था।
बिसौली के 38, दातांगज के 27, बदायूं के 17 और बिल्सी के दो गांवों में भूमि अधिग्रहण किया गया। सबसे ज्यादा बिसौली के 38 गांवों में 511.222 हेक्टेयर, बिल्सी में 23.424, सदर में 259.973 और दातागंज तहसील में 264.7348 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया।
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यूपी विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने शाहजहांपुर में एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास किया। चुनाव निपटने के बाद दस अप्रैल को कार्यदायी संस्था अदानी ग्रुप की एसजी इंफ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड ने यूपीडा के नक्शे के अनुसार काम शुरू कर दिया। काम शुरू होने के साथ ही इसका विरोध होने लगा। लगभग सभी स्थानों पर किसानों ने विरोध किया। बाद में पता लगा कि गलत स्थानों पर पिलर लगाकर काम शुरू करा दिया गया है। ऐसे में जिले में नए सिरे से पैमाइश की गई।
पैमाइश के बाद भी भूमि को लेकर विवाद खत्म नहीं हो रहे। तमाम गांवों में अभी पैमाइश भी नहीं हो सकी है। ऐसे में एक्सप्रेस-वे का काम गति नहीं पकड़ रहा। दो माह से कार्यदायी संस्था के अधिकारियों और कर्मचारी मशीनों के साथ बदायूं में डेरा डाले हैं, तीन स्थानों पर साइट बनाई गई हैं, लेकिन काम रफ्तार नहीं पकड़ रहा।
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एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि समतलीकरण का काम शुरू हुए करीब दो महीने बीत चुके हैं। जितना काम दो महीने में हो जाना चाहिए था उसका दस फीसदी भी काम नहीं हो सका है। कई स्थानों पर अब भी भूमि को लेकर विवाद सामने आ रहे हैं। कई स्थानों पर नए सिरे से पैमाइश पूरी नहीं हो सकी है।
-केके तिवारी, सुपरवाइजर एसजी इंफ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड
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गंगा एक्सप्रेस-वे बदायूं की चार तहसीलों के 85 गांवों से होता हुआ जिले में करीब 95 किमी दूरी तय करेगा। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस-वे डवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) ने एक्सप्रेस-वे के लिए जिले में भूमि अधिग्रहण का काम फरवरी 2020 में शुरू किया था।
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बिसौली के 38, दातांगज के 27, बदायूं के 17 और बिल्सी के दो गांवों में भूमि अधिग्रहण किया गया। सबसे ज्यादा बिसौली के 38 गांवों में 511.222 हेक्टेयर, बिल्सी में 23.424, सदर में 259.973 और दातागंज तहसील में 264.7348 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया।
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यूपी विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने शाहजहांपुर में एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास किया। चुनाव निपटने के बाद दस अप्रैल को कार्यदायी संस्था अदानी ग्रुप की एसजी इंफ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड ने यूपीडा के नक्शे के अनुसार काम शुरू कर दिया। काम शुरू होने के साथ ही इसका विरोध होने लगा। लगभग सभी स्थानों पर किसानों ने विरोध किया। बाद में पता लगा कि गलत स्थानों पर पिलर लगाकर काम शुरू करा दिया गया है। ऐसे में जिले में नए सिरे से पैमाइश की गई।
पैमाइश के बाद भी भूमि को लेकर विवाद खत्म नहीं हो रहे। तमाम गांवों में अभी पैमाइश भी नहीं हो सकी है। ऐसे में एक्सप्रेस-वे का काम गति नहीं पकड़ रहा। दो माह से कार्यदायी संस्था के अधिकारियों और कर्मचारी मशीनों के साथ बदायूं में डेरा डाले हैं, तीन स्थानों पर साइट बनाई गई हैं, लेकिन काम रफ्तार नहीं पकड़ रहा।
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एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि समतलीकरण का काम शुरू हुए करीब दो महीने बीत चुके हैं। जितना काम दो महीने में हो जाना चाहिए था उसका दस फीसदी भी काम नहीं हो सका है। कई स्थानों पर अब भी भूमि को लेकर विवाद सामने आ रहे हैं। कई स्थानों पर नए सिरे से पैमाइश पूरी नहीं हो सकी है।
-केके तिवारी, सुपरवाइजर एसजी इंफ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड