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बिना अनुभव के बन गए स्वच्छता के जिला सलाहकार, नौकरी खत्म
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बदायूं। डीपीआरओ कार्यालय में जिला सलाहकार स्वच्छता के पद को बिना अनुभव के हासिल करने वाले अंजुम पटेल की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। आरोप है कि अब भी पर्दे के पीछे से उनसे काम लिया जा रहा है। डीपीआरओ ने इससे इनकार किया है।
पिछले साल डीपीआरओ कार्यालय में अंजुम पटेल नाम के व्यक्ति की नियुक्ति जिला सलाहकार स्वच्छता के पद पर हुई थी। इस नौकरी के लिए बीटेक सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री के साथ तीन वर्ष का अनुभव होना चाहिए था। अंजुम को इसका अनुभव नहीं था और उन्होंने इसी वर्ष बीटेक किया था। इसकी शिकायत निदेशक पंचायती राज से की गई थी। इसकी जांच उप निदेशक बरेली मंडल द्वारा कराई गई। इसमें तथ्यों को छुपाकर फर्जी तरीके से नौकरी करने में अंजुम को दोषी पाया गया। इसके लिए नियुक्ति को फर्जी मानते हुए डीएम निर्देश दिए गए कि इनकी सेवा समाप्त कर दी जाए। दोषी पाए गए अंजुम पटेल को इसके बाद कार्यालय से हटा दिया गया। हालांकि बिना अनुभव के उन्हें लगाने व तथ्य छुपाने में अलग से कार्रवाई नहीं की गई है। चर्चा ये भी है कि उनसे पर्दे के पीछे अब भी काम लिया जा रहा है।
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अंजुम पटेल के अभिलेखों की जांच कराई गई तो पाया कि उनका अनुभव संबंधित पद के हिसाब से कम था। ऐसे में उनको पद से हटा दिया गया है। फर्जी अभिलेख होने का मामला होता तो अलग से कानूनी कार्रवाई कराई जाती।
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-श्रेया मिश्रा, डीपीआरओ
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पिछले साल डीपीआरओ कार्यालय में अंजुम पटेल नाम के व्यक्ति की नियुक्ति जिला सलाहकार स्वच्छता के पद पर हुई थी। इस नौकरी के लिए बीटेक सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री के साथ तीन वर्ष का अनुभव होना चाहिए था। अंजुम को इसका अनुभव नहीं था और उन्होंने इसी वर्ष बीटेक किया था। इसकी शिकायत निदेशक पंचायती राज से की गई थी। इसकी जांच उप निदेशक बरेली मंडल द्वारा कराई गई। इसमें तथ्यों को छुपाकर फर्जी तरीके से नौकरी करने में अंजुम को दोषी पाया गया। इसके लिए नियुक्ति को फर्जी मानते हुए डीएम निर्देश दिए गए कि इनकी सेवा समाप्त कर दी जाए। दोषी पाए गए अंजुम पटेल को इसके बाद कार्यालय से हटा दिया गया। हालांकि बिना अनुभव के उन्हें लगाने व तथ्य छुपाने में अलग से कार्रवाई नहीं की गई है। चर्चा ये भी है कि उनसे पर्दे के पीछे अब भी काम लिया जा रहा है।
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अंजुम पटेल के अभिलेखों की जांच कराई गई तो पाया कि उनका अनुभव संबंधित पद के हिसाब से कम था। ऐसे में उनको पद से हटा दिया गया है। फर्जी अभिलेख होने का मामला होता तो अलग से कानूनी कार्रवाई कराई जाती।
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-श्रेया मिश्रा, डीपीआरओ