फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   Civic Amenities

खतरे में मासूमों की जान : आधे से ज्यादा स्कूल वाहनों की फिटनेस नहीं

Tue, 26 Apr 2022 01:30 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 26 Apr 2022 01:30 AM IST
विज्ञापन
Civic Amenities
वाहन चेकिंग करते परिवहन विभाग के अधिकारी। फाइल फोटो - फोटो : BADAUN
बदायूं। तीन दिन पहले गाजियाबाद में स्कूल बस में सवार बच्चे की हादसे में मौत के बाद परिवहन विभाग यहां भी कुछ सतर्क हुआ है। इसी के चलते जिले में स्कूल वाहनों के सत्यापन में जो तस्वीर सामने आई है उससे साफ है कि यहां भी मासूमों की जान खतरे में है। दरअसल, जिले में 100 से ज्यादा स्कूल वाहनों की फिटनेस ही नहीं हुई है। यह वाहन बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने के मानकों को पूरा नहीं कर रहे। विभाग में पंजीकृत स्कूल वाहनों की बात करें तो इनकी संख्या सिर्फ 288 है।
विज्ञापन

जिले में सैकड़ों की संख्या में कान्वेंट और मान्टेसरी स्कूल हैं। ज्यादातर निजी स्कूल छात्र-छात्राओं को स्कूल लाने और घर पहुंचाने के लिए वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। शहर की ही बात करें तो कई बड़े नामी स्कूलों के पास जितने पंजीकृत स्कूल वाहन हैं उससे कहीं ज्यादा वाहनों का वह इस्तेमाल कर रहे हैं। परिवहन विभाग स्कूल वाहनों की फिटनेस और मानकों को लेकर तभी सुध लेता है जब किसी नौनिहाल की जान चली जाती है। गाजियाबाद की ताजा घटना के बाद यहां परिवहन विभाग हरकत में आया तो सच्चाई से कुछ पर्दा उठ गया, हालांकि पूरी सच्चाई अब भी सामने नहीं आई है।
विज्ञापन

दरअसल, बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल कॉलेज भी हैं जो डग्गामार वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन स्कूल कॉलेजों में खटारा बसों के अलावा टेंपो, ई-रिक्शा तक का इस्तेमाल किया जाता है। दो वर्ष पहले बिसौली-इस्लामनगर रोड पर स्कूली बच्चों को ले जा रहा टेंपो पलटने से एक छात्रा की जान चली गई थी। दातागंज में भी स्कूल वाहन पलटने से बच्चे घायल हुए थे। गाजियाबाद की घटना के बाद परिवहन विभाग ने स्कूल-कॉलेजों के संचालकों को नोटिस देकर 28 अप्रैल तक वाहनों की फिटनेस कराने के निर्देश दिए हैं। यह भी चेताया है कि इसके बाद वाहनों को सीज करने की कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

-
आटो, ई-रिक्शा भी कम नहीं जिम्मेदार
स्कूल वाहन पंजीकृत होने के बावजूद नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। शहर में तमाम ई-रिक्शा व ऑटो भी बच्चों को स्कूल पहुंचने का जिम्मा उठाए हुए हैं। यह न तो पंजीकृत है न ही निर्धारित सवारी बैठा रहे हैं। ई-रिक्शा चालक 10 से 15 बच्चे तक बैठाकर सफर कर रहे हैं। इनकी यह लापरवाही बच्चों पर भारी पड़ सकती है। ऑटो चालक दिन में दो बार स्कूल के बच्चों को लाने और ले जाने का काम करते हैं इसके बाद पूरा दिन यह डग्गामारी भी करते हैं।

-
जिले में कुल 288 स्कूल वाहन पंजीकृत हैं। इनमें 100 की फिटनेस नहीं है। स्कूल संचालकों को 28 अप्रैल तक का समय दिया गया है। इसके बाद वाहनों को सीज करने की कार्रवाई की जाएगी।
- आरबी गुप्ता, एआरटीओ प्रशासन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed