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करोड़ों रुपये खर्च कर रखे गए थे वाटर कूलर...अब हो गए कबाड़
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नई सराय चौकी मंदिर के पास खराब कबाड़ हुआ वाटर कूलर। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। गर्मी के तेवर तल्ख होने के साथ प्यास बुुझाने के लिए लोगों को सार्वजनिक स्थानों पर शीतल जल के लिए भटकना पड़ रहा है। जिले भर में सार्वजनिक स्थानों, धर्मस्थलों और शिक्षण संस्थाओं के आस-पास नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों के साथ विधायक निधि से विधायकों ने भी करोड़ों रुपये खर्च कर वाटर कूलर रखवाए थे, पर अब इनमें से अधिकतर कबाड़ हो गए हैं।
गर्मी के सीजन में लोगों को सार्वजनिक स्थानों पर शीतल जल मिले, इसके लिए 2012 से 2017 तक जमकर बजट खपाया गया। एक वाटर कूलर लगाने पर डेढ़ से दो लाख का खर्च आया। कुछ दिन बाद ही यह वाटर कूलर दुर्दशा का शिकार होने लगे। शहर समेत जिले भर में लगे ज्यादातर वाटर कूलर अब कबाड़ हो चुके हैं। यहां बता दें कि नगरीय इलाकों में वाटर कूलरों को दुरुस्त कराने का जिम्मा स्थानीय निकायों और देहात में ब्लॉकों पर था, लेकिन किसी ने अपनी जिम्मेदारी को निभाना जरूरी नहीं समझा। मुख्यालय पर ही मरम्मत और देखरेख न होने से लगभग सभी वाटर कूलर खराब पड़े हैं। कुछ स्थानों पर अगर वाटर कूलर काम भी कर रहे हैं तो उनसे शीतल जल नहीं मिल रहा। आसपास गंदगी के कारण लोग यहां पानी पीने से कतराते हैं। नई सराय चौकी मंदिर, रजी चौक के पास मस्जिद, गिंदो देवी महिला महाविद्यालय, लोटनपुरा, जोगीपुरा गुरुद्वारा के पास आदि स्थानों पर वाटर कूलर कबाड़ हो चुके हैं।
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मशीनें खराब हुईं, बोरिंग भी नहीं कर रहे काम
वाटर कूलर लगाने के लिए बोरिंग में सबमर्सिबल लगाया गया था। इसको इलेक्ट्रिक वाटर कूलर के ऊपर रखी पानी की बड़ी टंकी से जोड़ा गया था। सबमर्सिबल से पानी की टंकी में पानी भरा जाता था और पानी की टंकी से यह पानी वाटर कूलर की बिजली चलित मशीन से ठंडा होकर बाहर आता था। वाटर कूलर से सामान्य और शीतल जल दोनों मिलते थे। बिजली से चलने वाले इन वाटर कूलर में ज्यादातर की मशीन भी कबाड़ हो चुकी है। बोरिंग ने भी काम बंद कर दिया है। ऐसे में बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों के लिए गर्मी के मौसम में शीतल जल के लिए भटकना पड़ रहा है।
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लोगों ने कहा- नहीं मिलता शीतल जल, होती है परेशानी
सार्वजनिक स्थानों पर पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। बाजारों में लोगों को गर्मी के बीच पीने के पानी के लिए भटकना पड़ता है। वाटर कूलर कबाड़ हो चुके हैं।
-मोहम्मद
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लाखों रुपये खर्च करने के बाद वाटर कूलर लगाए गए थे, इसके बाद इन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। कुछ वाटर कूलर ऐसे हैं जिनको सिर्फ मरम्मत चाहिए।
-पप्पू
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जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी से भागते हैं। वाटर कूलर को लेकर भी लोगों ने राजनीति चमकाई है। धर्मस्थलों, शिक्षण संस्थाओं के आसपास भी शीतल जल नहीं मिल रहा।
-मनोज शर्मा
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नगर पालिका, नगर पंचायतों की भी जिम्मेदारी बनती थी कि वाटर कूलरों का ठीक से रखरखाव और समय पर मरम्मत हो, लेकिन इस ओर ध्यान ही नहीं दिया गया।
- लकी
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शहर में जो वाटर कूलर लगे हैं, उन सबकी जांच कराई जाएगी। जो खराब होंगे, उनमें कितना खर्च आएगा। उसका आकलन कराया जाएगा। उसके बाद में उन्हें सही कराया जाएगा।
-अमित कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट
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गर्मी के सीजन में लोगों को सार्वजनिक स्थानों पर शीतल जल मिले, इसके लिए 2012 से 2017 तक जमकर बजट खपाया गया। एक वाटर कूलर लगाने पर डेढ़ से दो लाख का खर्च आया। कुछ दिन बाद ही यह वाटर कूलर दुर्दशा का शिकार होने लगे। शहर समेत जिले भर में लगे ज्यादातर वाटर कूलर अब कबाड़ हो चुके हैं। यहां बता दें कि नगरीय इलाकों में वाटर कूलरों को दुरुस्त कराने का जिम्मा स्थानीय निकायों और देहात में ब्लॉकों पर था, लेकिन किसी ने अपनी जिम्मेदारी को निभाना जरूरी नहीं समझा। मुख्यालय पर ही मरम्मत और देखरेख न होने से लगभग सभी वाटर कूलर खराब पड़े हैं। कुछ स्थानों पर अगर वाटर कूलर काम भी कर रहे हैं तो उनसे शीतल जल नहीं मिल रहा। आसपास गंदगी के कारण लोग यहां पानी पीने से कतराते हैं। नई सराय चौकी मंदिर, रजी चौक के पास मस्जिद, गिंदो देवी महिला महाविद्यालय, लोटनपुरा, जोगीपुरा गुरुद्वारा के पास आदि स्थानों पर वाटर कूलर कबाड़ हो चुके हैं।
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मशीनें खराब हुईं, बोरिंग भी नहीं कर रहे काम
वाटर कूलर लगाने के लिए बोरिंग में सबमर्सिबल लगाया गया था। इसको इलेक्ट्रिक वाटर कूलर के ऊपर रखी पानी की बड़ी टंकी से जोड़ा गया था। सबमर्सिबल से पानी की टंकी में पानी भरा जाता था और पानी की टंकी से यह पानी वाटर कूलर की बिजली चलित मशीन से ठंडा होकर बाहर आता था। वाटर कूलर से सामान्य और शीतल जल दोनों मिलते थे। बिजली से चलने वाले इन वाटर कूलर में ज्यादातर की मशीन भी कबाड़ हो चुकी है। बोरिंग ने भी काम बंद कर दिया है। ऐसे में बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों के लिए गर्मी के मौसम में शीतल जल के लिए भटकना पड़ रहा है।
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लोगों ने कहा- नहीं मिलता शीतल जल, होती है परेशानी
सार्वजनिक स्थानों पर पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। बाजारों में लोगों को गर्मी के बीच पीने के पानी के लिए भटकना पड़ता है। वाटर कूलर कबाड़ हो चुके हैं।
-मोहम्मद
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लाखों रुपये खर्च करने के बाद वाटर कूलर लगाए गए थे, इसके बाद इन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। कुछ वाटर कूलर ऐसे हैं जिनको सिर्फ मरम्मत चाहिए।
-पप्पू
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जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी से भागते हैं। वाटर कूलर को लेकर भी लोगों ने राजनीति चमकाई है। धर्मस्थलों, शिक्षण संस्थाओं के आसपास भी शीतल जल नहीं मिल रहा।
-मनोज शर्मा
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नगर पालिका, नगर पंचायतों की भी जिम्मेदारी बनती थी कि वाटर कूलरों का ठीक से रखरखाव और समय पर मरम्मत हो, लेकिन इस ओर ध्यान ही नहीं दिया गया।
- लकी
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शहर में जो वाटर कूलर लगे हैं, उन सबकी जांच कराई जाएगी। जो खराब होंगे, उनमें कितना खर्च आएगा। उसका आकलन कराया जाएगा। उसके बाद में उन्हें सही कराया जाएगा।
-अमित कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट