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बेरोजगारी दूर न कर सको नेताजी तो आईटीआई भवन ही पूरा करा दो

Mon, 31 Jan 2022 11:42 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 31 Jan 2022 11:42 PM IST
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Civic Amenities
कादरचौक में आईटीआई कॉलेज का भवन।।संवाद - फोटो : BADAUN
बदायूं। चुनावी दौर में बेरोजगारी बड़े मुद्दे के रूप में सामने आ रही है। कादरचौक की बात करें तो आईटीआई भवन काफी समय से बन रहा है पर हैंडओवर करने लायक हालत में नहीं आ सका है। ऐसे में काफी संख्या में स्थानीय विद्यार्थी आईटीआई की पढ़ाई करने बदायूं जाते हैं। कादरचौक के लोगों में इसे लेकर नाराजगी है। वे नेताओं के साथ ही अफसरों को भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार मानते हैं।
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बड़ी समस्या है कि उच्च शिक्षा के लिए कादरचौक ब्लॉक में कोई महाविद्यालय नहीं है। इसके लिए बच्चों को बदायूं जाना पड़ता है। बालिकाओं की तो उच्च शिक्षा ही इस कारण रुक जाती है। ब्लॉक में तकनीकी शिक्षा के लिए आईटीआई कॉलेज का निर्माण तो हुआ लेकिन उसहैत रोड पर सिमरा गांव के पास इस भवन का काम वर्षों से बंद पड़ा है। अगर आईटीआई कॉलेज का भवन पूरा हो जाता और संसाधन और स्टाफ मिलता तो क्षेत्र में नई पीढ़ी तकनीकी रूप से सशक्त होकर रोजगार हासिल करती।
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भवन का निर्माण पूरा न होने से तमाम छात्र-छात्राओं को प्रवेश तो कादरचौक आईटीआई के नाम से मिलता है लेकिन पढ़ाई और सीखने के लिए बदायूं से भी आगे आंवला रोड पर बने आईटीआई विद्यालय में जाना पड़ता है। इससे गरीब परिवारों के छात्र-छात्राएं अधिक दूरी होने की वजह से पढ़ाई से वंचित रह जाते हैं।
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स्थानीय लोगों ने कहा
कादरचौक का आईटीआई चालू हो तो अच्छे कारीगर तैयार हो सकेंगे। बच्चे स्थानीय स्तर पर तकनीकी शिक्षा ग्रहण करके स्वरोजगार पा सकेंगे। नेताओं को भी इस बारे में सोचना चाहिए।
-बबलू
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आज के दौर में तमाम नौकरियों में आईटीआई की जरूरत होती है। आईटीआई चालू न होने से बच्चों को दूर जाना पड़ता है। भवन पूरा न हो पाना कार्यदायी संस्था और अधिकारियों की लापरवाही का नतीजा है।

- शशांक गुप्ता
-
बच्चे कारीगरी तकनीक को सीख सकें इसके लिए आईटीआई जरूरी है। लड़कियां भी कई क्षेत्रों में काम सीख सकती हैं। लेकिन स्कूल की कमी से शिक्षा नहीं ले पाती है। ऐसे में इस दिशा में जागरूक होने की जरूरत है।
- सरवे अली
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आईटीआई स्कूल का भवन वर्षों से नहीं बन पाया। नेताओं से लेकर अधिकारियों तक ने कोई दिलचस्पी नहीं ली। कार्यदायी संस्थान पर कार्रवाई होनी चाहिए।
- जीशान
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