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पति को बचाने के चक्कर में दी राबिया ने दे दी जान
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हादसे के बाद एहसान के घर के बाहर एकत्र लोग। संवाद
- फोटो : BADAUN
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ककराला (बदायूं)। मंगलवार सुबह जिस दौरान ककराला कस्बे में हादसा हुआ। उस समय पूर्व सभासद राबिया बेगम पशुशाला में मौजूद नहीं थीं। उससे पहले ही एहसान खां करंट लगने से जमीन पर गिर गए थे। जब राबिया बेगम ने पति को जमीन पर छटपटाते देखा तो बचाने की कोशिश में उनकी भी जान चली गई।
राबिया बेगम वर्ष 2007 में सभासद का चुनाव लड़ी थीं। उस चुनाव में वह जीत भी गईं और अपने वार्ड की सभासद बनीं। उनके बाद दो बार एहसान खां भी सभासद का चुनाव लड़े लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। तब से उन्होंने चुनाव भी नहीं लड़ा था। एहसान खां खेतीबाड़ी करके परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। वह ठेकेदार भी थे। उनकी पत्नी राबिया जुझारू महिला थीं। इससे पति को बचाने के चक्कर में उन्होंने मौत को गले लगा लिया।
राबिया बेगम पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष महबूब सकलैनी की बुआ थीं। परिवारवालों की माने तो जिस समय ये हादसा हुआ उस दौरान एहसान खां अपनी पशुशाला में थे। जबकि पत्नी राबिया बेगम घर में थीं। वह इत्तेफाक से पशुशाला में पहुंचीं और उन्होंने अपने पति को छटपटाते हुए देखा। उस समय बिजली का तार एहसान खां के शरीर के नीचे दबा हुआ था। राबिया तार नहीं देख सकीं। उन्होंने इसे दौरा समझकर पति को जमीन से उठाने की कोशिश की लेकिन वो भी करंट की चपेट में आ गईं।
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इसके कुछ देर बाद उनकी नौकरानी पशुशाला पहुंची थी। उसने ही करंट लगने की सूचना आसपास के लोगों को दी और परिवार वालों को बताया। तब कहीं तार काटकर हटाए गए और उन्हें वहां से अलग किया गया। अगर नौकरानी भी तार नहीं कटवाती तो वो भी करंट की चपेट में आ सकती थी।
मानसिक अस्पताल आगरा में है बड़ा बेटा
एहसान खां के दो बेटे और चार बेटियां हैं। बड़ा बेटा एतशाम मानसिक रोग से जूझ रहा है। इससे एहसान खां उसे मानसिक रोग अस्पताल आगरा में भर्ती करा आए थे। उनका छोटा बेटा अफनान घर पर रहता है।
पंद्रह दिन पहले तय किया था छोटी बेटी का रिश्ता
एहसान खां के चार बेटियां हैं। इनमें सबसे बड़ी बेटी का निकाह पूर्व विधायक मुस्लिम खां के बेटे अजमल से हुआ है। उससे छोटी बेटी की शादी दिल्ली में काम करने वाले नफीस अहमद से हुई है। जबकि तीसरी बेटी के पति अजीम ककराला में डॉक्टर हैं। वह अपना क्लीनिक चलाते हैं। उन्होंने सबसे छोटी बेटी की शादी करीब पंद्रह दिन पहले ही तय की थी।
भाइयों के पदचिह्नों पर चले तो मिली ठेकेदारी
-एहसान खां चार भाइयों में सबसे छोटे थे। उनके बड़े भाई अफजाल की मृत्यु हो चुकी है। उनसे छोटे दिलावर और उनसे छोटे छोटन खां हैं। चार भाई ठेकेदारी करते थे। पहले बड़े भाइयों ने ठेकेदारी शुरू की थी। उसके बाद एहसान खां ने भी दूसरे प्रांतों की चीनी मिलों में ठेकेदारी की।
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राबिया बेगम वर्ष 2007 में सभासद का चुनाव लड़ी थीं। उस चुनाव में वह जीत भी गईं और अपने वार्ड की सभासद बनीं। उनके बाद दो बार एहसान खां भी सभासद का चुनाव लड़े लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। तब से उन्होंने चुनाव भी नहीं लड़ा था। एहसान खां खेतीबाड़ी करके परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। वह ठेकेदार भी थे। उनकी पत्नी राबिया जुझारू महिला थीं। इससे पति को बचाने के चक्कर में उन्होंने मौत को गले लगा लिया।
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राबिया बेगम पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष महबूब सकलैनी की बुआ थीं। परिवारवालों की माने तो जिस समय ये हादसा हुआ उस दौरान एहसान खां अपनी पशुशाला में थे। जबकि पत्नी राबिया बेगम घर में थीं। वह इत्तेफाक से पशुशाला में पहुंचीं और उन्होंने अपने पति को छटपटाते हुए देखा। उस समय बिजली का तार एहसान खां के शरीर के नीचे दबा हुआ था। राबिया तार नहीं देख सकीं। उन्होंने इसे दौरा समझकर पति को जमीन से उठाने की कोशिश की लेकिन वो भी करंट की चपेट में आ गईं।
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इसके कुछ देर बाद उनकी नौकरानी पशुशाला पहुंची थी। उसने ही करंट लगने की सूचना आसपास के लोगों को दी और परिवार वालों को बताया। तब कहीं तार काटकर हटाए गए और उन्हें वहां से अलग किया गया। अगर नौकरानी भी तार नहीं कटवाती तो वो भी करंट की चपेट में आ सकती थी।
मानसिक अस्पताल आगरा में है बड़ा बेटा
एहसान खां के दो बेटे और चार बेटियां हैं। बड़ा बेटा एतशाम मानसिक रोग से जूझ रहा है। इससे एहसान खां उसे मानसिक रोग अस्पताल आगरा में भर्ती करा आए थे। उनका छोटा बेटा अफनान घर पर रहता है।
पंद्रह दिन पहले तय किया था छोटी बेटी का रिश्ता
एहसान खां के चार बेटियां हैं। इनमें सबसे बड़ी बेटी का निकाह पूर्व विधायक मुस्लिम खां के बेटे अजमल से हुआ है। उससे छोटी बेटी की शादी दिल्ली में काम करने वाले नफीस अहमद से हुई है। जबकि तीसरी बेटी के पति अजीम ककराला में डॉक्टर हैं। वह अपना क्लीनिक चलाते हैं। उन्होंने सबसे छोटी बेटी की शादी करीब पंद्रह दिन पहले ही तय की थी।
भाइयों के पदचिह्नों पर चले तो मिली ठेकेदारी
-एहसान खां चार भाइयों में सबसे छोटे थे। उनके बड़े भाई अफजाल की मृत्यु हो चुकी है। उनसे छोटे दिलावर और उनसे छोटे छोटन खां हैं। चार भाई ठेकेदारी करते थे। पहले बड़े भाइयों ने ठेकेदारी शुरू की थी। उसके बाद एहसान खां ने भी दूसरे प्रांतों की चीनी मिलों में ठेकेदारी की।