{"_id":"6136780b8ebc3ec7777a379f","slug":"civic-amenities-badaun-news-bly458764567","type":"story","status":"publish","title_hn":"चीनी मिल के रिटायर्ड 20 कर्मचारी हृदय रोग का शिकार, आर्थिक तंगी में जा रही जान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चीनी मिल के रिटायर्ड 20 कर्मचारी हृदय रोग का शिकार, आर्थिक तंगी में जा रही जान
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बदायूं। जिस मिल की खातिर जवानी दांव पर लगा दी, उसी के प्रबंधन के खिलाफ वृद्धावस्था में रिटायर्ड कर्मियों को अपना बकाया लेने के लिए धरना देना पड़ रहा है। करीब तीन साल से बकाया भुगतान की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे शेखूपुर चीनी मिल के 20 से ज्यादा रिटायर्ड कर्मचारी हृदयरोगी हैं। आर्थिक तंगी के कारण इलाज न होने से इनकी जान जा रही है। रिटायर्ड कर्मचारी धीर सिंह भी हृदय रोगी थे। आर्थिक तंगी में इलाज नहीं करा सके और उनकी जान चली गई।
शहर में इस्लामिया इंटर कॉलेज के पास रहने वाले धीर सिंह शेखूपुर चीनी मिल से मुख्य समयपाल पद से तीन साल पहले रिटायर हुए थे। उम्मीद थी कि रिटायर होने के बाद फंड, ग्रेच्युटी समेत अन्य भुगतान मिलेंगे तो जीविका चलाने के लिए बड़े बेटे को कोई धंधा करा देंगे, लेकिन इसका उल्टा हुआ। अब परिवार के सामने कमाई का कोई जरिया नहीं बचा है। धीर सिंह के रिटायर होने के बाद बड़े बेटे रामनरेश को कैंसर हो गया। परिवार आर्थिक तंगी में रामनरेश का इलाज नहीं करा सका और उसकी मौत हो गई। बाद में धीर सिंह की एक बेटी रीता की भी मौत हो गई। धीर सिंह भी हृदय रोगी थे। चीनी मिल से बकाया भुगतान न होने के कारण वह भी अपना इलाज नहीं करा सके और चल बसे। बेटे रामनरेश के परिवार में दो बेटे और दो बेटियां हैं। सबसे छोटे बेटे अंशु की उम्र मात्र छह साल है। यह संयुक्त परिवार इस्लामिया इंटर कॉलेज के पास एक संकरी गली में रहता है।
धीर सिंह के परिवार में उनकी पत्नी मुन्नी देवी, बेटा रिंकू सिंह और बेटी रश्मि है। रिंकू मानसिक मंदित होने के कारण कामधंधा करने में सक्षम नहीं है। पूरा परिवार पुराने घर में रहता है। घर भी जर्जर हो गया है। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि नाते-रिश्तेदारों के सहयोग से धीर सिंह का अंतिम संस्कार हो सका। धीर सिंह की पत्नी मुन्नी देवी और साढू़ राजेंद्र सिंह का कहना है कि अगर देयकों का भुगतान हो गया होता तो शायद इस परिवार में एक के बाद एक तीन लोगों की मौत आर्थिक तंगी के कारण न होती।
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रिटायर्ड मिल कर्मियों का धरना 76 वें दिन भी जारी, अफसरों ने नहीं ली सुध
शेखूपुुर चीनी मिल के रिटायर्ड कर्मचारियों का देयकों के भुगतान की मांग को लेकर सोमवार को 76 वें दिन भी मालवीय आवास पर धरना जारी रहा। आर्थिक तंगी के कारण इलाज के अभाव में धीर सिंह की मौत के बाद कर्मचारी काफी दुखी हैं। कई कर्मचारी ऐसे हैं जो बुजुर्ग होने के साथ हृदय रोग समेत अन्य बीमारियों की गिरफ्त में हैं। वे भी अपना इलाज नहीं करा पा रहे हैं।
धरना दे रहे कर्मचारियों का कहना है कि मिल प्रबंधन उनकी कोई सुध नहीं ले रहा। करीब दो सौ कर्मचारियों का मिल पर बकाया फंसा हुआ है। मिल के पास फंड होने के बाद भी भुगतान नहीं किया जा रहा है। मिल प्रबंधक का व्यवहार भी कर्मचारियों के प्रति अच्छा नहीं है। धीर सिंह की मौत के बाद भी प्रबंधन का कोई अधिकारी उनके घर नहीं पहुंचा। इतना ही नहीं धीर सिंह के परिवार को देयकों के भुगतान की प्रक्रिया भी शुरू नहीं की गई। बीमार कर्मचारियों ने भी अपनी बीमारी का हवाला दिया, लेकिन मिल प्रबंधन अनदेखी कर रहा है। सोमवार को कृष्ण्पाल, राम प्रकाश, ऐबरन सिंह, श्यामपाल, सियाराम, राम प्रसाद, धर्मपाल, जरीना बेगम, मुन्नी देवी, भाग्यवती, नसीर खां, पान सिंह आदि धरने स्थल पर बैठे।
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शहर में इस्लामिया इंटर कॉलेज के पास रहने वाले धीर सिंह शेखूपुर चीनी मिल से मुख्य समयपाल पद से तीन साल पहले रिटायर हुए थे। उम्मीद थी कि रिटायर होने के बाद फंड, ग्रेच्युटी समेत अन्य भुगतान मिलेंगे तो जीविका चलाने के लिए बड़े बेटे को कोई धंधा करा देंगे, लेकिन इसका उल्टा हुआ। अब परिवार के सामने कमाई का कोई जरिया नहीं बचा है। धीर सिंह के रिटायर होने के बाद बड़े बेटे रामनरेश को कैंसर हो गया। परिवार आर्थिक तंगी में रामनरेश का इलाज नहीं करा सका और उसकी मौत हो गई। बाद में धीर सिंह की एक बेटी रीता की भी मौत हो गई। धीर सिंह भी हृदय रोगी थे। चीनी मिल से बकाया भुगतान न होने के कारण वह भी अपना इलाज नहीं करा सके और चल बसे। बेटे रामनरेश के परिवार में दो बेटे और दो बेटियां हैं। सबसे छोटे बेटे अंशु की उम्र मात्र छह साल है। यह संयुक्त परिवार इस्लामिया इंटर कॉलेज के पास एक संकरी गली में रहता है।
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धीर सिंह के परिवार में उनकी पत्नी मुन्नी देवी, बेटा रिंकू सिंह और बेटी रश्मि है। रिंकू मानसिक मंदित होने के कारण कामधंधा करने में सक्षम नहीं है। पूरा परिवार पुराने घर में रहता है। घर भी जर्जर हो गया है। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि नाते-रिश्तेदारों के सहयोग से धीर सिंह का अंतिम संस्कार हो सका। धीर सिंह की पत्नी मुन्नी देवी और साढू़ राजेंद्र सिंह का कहना है कि अगर देयकों का भुगतान हो गया होता तो शायद इस परिवार में एक के बाद एक तीन लोगों की मौत आर्थिक तंगी के कारण न होती।
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रिटायर्ड मिल कर्मियों का धरना 76 वें दिन भी जारी, अफसरों ने नहीं ली सुध
शेखूपुुर चीनी मिल के रिटायर्ड कर्मचारियों का देयकों के भुगतान की मांग को लेकर सोमवार को 76 वें दिन भी मालवीय आवास पर धरना जारी रहा। आर्थिक तंगी के कारण इलाज के अभाव में धीर सिंह की मौत के बाद कर्मचारी काफी दुखी हैं। कई कर्मचारी ऐसे हैं जो बुजुर्ग होने के साथ हृदय रोग समेत अन्य बीमारियों की गिरफ्त में हैं। वे भी अपना इलाज नहीं करा पा रहे हैं।
धरना दे रहे कर्मचारियों का कहना है कि मिल प्रबंधन उनकी कोई सुध नहीं ले रहा। करीब दो सौ कर्मचारियों का मिल पर बकाया फंसा हुआ है। मिल के पास फंड होने के बाद भी भुगतान नहीं किया जा रहा है। मिल प्रबंधक का व्यवहार भी कर्मचारियों के प्रति अच्छा नहीं है। धीर सिंह की मौत के बाद भी प्रबंधन का कोई अधिकारी उनके घर नहीं पहुंचा। इतना ही नहीं धीर सिंह के परिवार को देयकों के भुगतान की प्रक्रिया भी शुरू नहीं की गई। बीमार कर्मचारियों ने भी अपनी बीमारी का हवाला दिया, लेकिन मिल प्रबंधन अनदेखी कर रहा है। सोमवार को कृष्ण्पाल, राम प्रकाश, ऐबरन सिंह, श्यामपाल, सियाराम, राम प्रसाद, धर्मपाल, जरीना बेगम, मुन्नी देवी, भाग्यवती, नसीर खां, पान सिंह आदि धरने स्थल पर बैठे।