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संभलकर पास करें बाईपास, फिर खतरनाक हुए गड्ढे
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बदायूं। बाईपास से होकर गुजरते समय बेहद सावधान रहें। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने अभियान चलाकर मिट्टी से बाईपास के किनारे और गड्ढे भरवाए थे। मगर रक्षाबंधन से पहले हुई बारिश में मिट्टी फिर बह गई, जिससे खड्ड बने गड्ढे बेहद खतरनाक हो गए हैं।
बारिश से शहर के बाहरी इलाके में बने बाईपास को लगातार नुकसान हो रहा है। जब से बरसात की शुरुआत हुई तब से बाईपास के किनारे कट रहे हैं। कटान की वजह से जगह-जगह गड्ढे हो गए। इसकी एक वजह ये बताई जा रही है कि बाईपास पर पानी के निकासी का पर्याप्त साधन नहीं है। जब बरसात होती है तो पानी सड़क और मिट्टी काटता हुआ खेतों में बह जाता है। अधिक बरसात होने पर सड़क को ज्यादा नुकसान होता है। पिछले महीने मिट्टी का कटान होने से जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो गए थे। इस पर पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने अभियान चलाकर जेसीबी से बाईपास पर बने गड्ढों में मिट्टी डलवाई थी। इसके बाद कई बार बरसात हो चुकी है।
रक्षाबंधन से पूर्व लगातार तीन दिन तक तेज बरसात हुई। इससे बाईपास को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। इस बार बारिश में बाईपास के किनारे और ज्यादा कट गए। बाईपास किनारे और गड्ढों में जो मिट्टी डलवाई गई थी वो कटकर खेतों में बह गई। उसके साथ ही जगह-जगह सड़क भी कट गई है। कहीं-कहीं बाईपास किनारे अंदर ही अंदर खोखले हो गए हैं। इससे बाईपास के किनारों पर खतरा और बढ़ गया है।
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बाईपास पर गड्ढे में धंसी थी डॉक्टर की कार
करीब एक माह पूर्व इसी बाईपास पर एक हादसा हो गया था। राजकीय मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर बरेली से मेडिकल कॉलेज जा रहे थे। इसी दौरान बाईपास पर नगला घेर और मढैया के बीच उनकी कार सड़क किनारे गड्ढे में धंस गई थी। गनीमत ये रही कि कार पलटी नहीं। वर्ना बड़ा हादसा हो सकता था।
सोत नदी के किनारे भी ढहे
बाईपास पर बने सोत नदी के पुल किनारे भी इस बरसात क्षतिग्रस्त हो गए हैं। पुल के दोनों ढलानों के किनारे पानी के बहाव से कट गई हैं। इससे सड़क में दरारें तक पड़ गई हैं। कहीं कहीं सड़क तक कट गई है। यहां भी मिट्टी डलवाकर मरम्मत कराने की कोशिश की गई लेकिन इस बरसात से पीडब्ल्यूडी की मेहनत बेकार गई।
बरसात में सड़क के किनारे कटना स्वाभाविक है। पानी के तेज बहाव से नुकसान पहुंचता है। हमने इसके किनारों पर मिट्टी डलवाई थी। अगर वह मिट्टी फिर से कट गई है तो एक फिर टीम भेजकर इसे दिखवा लेंगे। वहां मिट्टी डलवाकर सुधार कराया जाएगा। - अमर सिंह, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी
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बारिश से शहर के बाहरी इलाके में बने बाईपास को लगातार नुकसान हो रहा है। जब से बरसात की शुरुआत हुई तब से बाईपास के किनारे कट रहे हैं। कटान की वजह से जगह-जगह गड्ढे हो गए। इसकी एक वजह ये बताई जा रही है कि बाईपास पर पानी के निकासी का पर्याप्त साधन नहीं है। जब बरसात होती है तो पानी सड़क और मिट्टी काटता हुआ खेतों में बह जाता है। अधिक बरसात होने पर सड़क को ज्यादा नुकसान होता है। पिछले महीने मिट्टी का कटान होने से जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो गए थे। इस पर पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने अभियान चलाकर जेसीबी से बाईपास पर बने गड्ढों में मिट्टी डलवाई थी। इसके बाद कई बार बरसात हो चुकी है।
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रक्षाबंधन से पूर्व लगातार तीन दिन तक तेज बरसात हुई। इससे बाईपास को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। इस बार बारिश में बाईपास के किनारे और ज्यादा कट गए। बाईपास किनारे और गड्ढों में जो मिट्टी डलवाई गई थी वो कटकर खेतों में बह गई। उसके साथ ही जगह-जगह सड़क भी कट गई है। कहीं-कहीं बाईपास किनारे अंदर ही अंदर खोखले हो गए हैं। इससे बाईपास के किनारों पर खतरा और बढ़ गया है।
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बाईपास पर गड्ढे में धंसी थी डॉक्टर की कार
करीब एक माह पूर्व इसी बाईपास पर एक हादसा हो गया था। राजकीय मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर बरेली से मेडिकल कॉलेज जा रहे थे। इसी दौरान बाईपास पर नगला घेर और मढैया के बीच उनकी कार सड़क किनारे गड्ढे में धंस गई थी। गनीमत ये रही कि कार पलटी नहीं। वर्ना बड़ा हादसा हो सकता था।
सोत नदी के किनारे भी ढहे
बाईपास पर बने सोत नदी के पुल किनारे भी इस बरसात क्षतिग्रस्त हो गए हैं। पुल के दोनों ढलानों के किनारे पानी के बहाव से कट गई हैं। इससे सड़क में दरारें तक पड़ गई हैं। कहीं कहीं सड़क तक कट गई है। यहां भी मिट्टी डलवाकर मरम्मत कराने की कोशिश की गई लेकिन इस बरसात से पीडब्ल्यूडी की मेहनत बेकार गई।
बरसात में सड़क के किनारे कटना स्वाभाविक है। पानी के तेज बहाव से नुकसान पहुंचता है। हमने इसके किनारों पर मिट्टी डलवाई थी। अगर वह मिट्टी फिर से कट गई है तो एक फिर टीम भेजकर इसे दिखवा लेंगे। वहां मिट्टी डलवाकर सुधार कराया जाएगा। - अमर सिंह, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी