{"_id":"6106ef4c8ebc3e8418138815","slug":"civic-amenities-badaun-news-bly455060766","type":"story","status":"publish","title_hn":"20 झोंपड़ियां गंगा में समाईं, दो गांव खाली करने के निर्देश, 27 मकानों के ढहने का खतरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
20 झोंपड़ियां गंगा में समाईं, दो गांव खाली करने के निर्देश, 27 मकानों के ढहने का खतरा
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बदायूं। गंगा में बाढ़ और कटान के हालात लगातार बेकाबू होते जा रहे हैं। रविवार को फिर गंगा में नरौरा बैराज से 1.42 लाख से ज्यादा पानी छोड़े जानेकई स्थानों पर कटान तेज हो है। दातागंज तहसील के गांव असमया रफतपुर अहमदनगर बछौरा के बाहर बनी 20 झोपड़ियां और कई घर गंगा में समा गए। खतरे को देखते हुए दोनों गांवों को खाली करने के निर्देश दिए गए हैं।
नरौरा बैराज से पिछले तीन दिनों से गंगा में लगातार एक लाख क्सूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा जा रहा है। रविवार को भी नरौरा बैराज से 1.42 लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी गंगा में छोड़ा गया। इसके कारण कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। दातागंज तहसील के उसहैत थाना क्षेत्र के गांव असमया रफतपुर और अहमद नगर बछौरा में हालात बेकाबू से हो गए हैं। दोनों गांवों में करीब 20 झोपड़ियां कटान से गंगा की धारा के साथ बह गई हैं। वहां कई मकानों के लिए खतरा पैदा हो गया है। कई पक्के मकान गंगा के मुहाने पर आ गए हैं। भगवान दास, किशनपाल, सोमपाल, महावीर, रच्छू, रामभरोसे, भानपाल, द्वारिका, मुकेश, छत्रपाल, नेकराम, नत्थू, रक्षपाल, अवधेश, जुगेंद्र, विशुना, जसवीर, जयवीर, पन्नालाल, प्रसादी, राजेंद्र, अजयपाल, देवेंद्र, प्रसादी आदि के घरों पर कटान का खतरा मंडरा रहा है। इनके मकान कटान के चलते किसी समय गंगा में समा सकते हैं।
कटान के खतरे को देखते हुए असमया रफतपुर और अहमदनगर बछौरा के ग्रामीणों को दूसरे सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को कहा गया है। दो दिन पहले डीएम दीपा रंजन ने भी गांव का दौरा कर लोगों से सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने के लिए कहा था। हालांकि अब तक ग्रामीणों ने घरों को खाली नहीं किया है। एसडीएम दातागंज पारसनाथ मौर्य, नायब तहसीलदार रामकुमार, लेखपाल राकेश गांव में कैंप किए हैं।
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180 लोगों को दूसरे स्थान पर दी जा चुकी है आवासीय जमीन
गंगा ने पिछले वर्ष भी असमया रफतपुर गांव में कहर बरपाया था। कई मकान, झोपड़ियां गंगा में समा गए थे। इसके बाद प्रशासन ने 180 लोगों को दूसरे स्थान पर आवासीय जमीन उपलब्ध कराई थी। ये सभी परिवार बाढ़ के कारण बेघर हो गए थे, या फिर ऐसे परिवार थे जिनके मकान भविष्य में कटान की भेंट चढ़ सकते हैं। इसके बाद भी अब तक इन लोगों ने दूसरे स्थान पर घर नहीं बनाए हैं। एक फिर से अहमदनगर बछौरा पर कटान का बड़ा खतरा मंडरा रहा है। अगर इसी तरह कटान होता रहा तो पूरा गांव गंगा में समा सकता है।
प्राइमरी स्कूल और पंचायत घर में शरण ले सकेंगे ग्रामीण
उसहैत। दो दिन पहले डीएम दीपा रंजन ने अहमदनगर बछौरा और असमया रफतपुर का दौरा कर हालात का जायजा लिया था। डीएम ने बाढ़ प्रभावितों को प्राइमरी स्कूल और पंचायत भवन में राहत शिविर बनाने के निर्देश दिए थे। यहां राहत शिविर बनाने का काम भी शुरू हो गया है, लेकिन अब तक ग्रामीण शरण लेने नहीं पहुंचे थे। इसके साथ ही डीएम ने जिन लोगों के मकान कटान में चले गए हैं उनको प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं। संवाद
कटान पर नजर रखी जा रही है। बाढ़ खंड अपना काम काम रहा है। कटान के खतरे को देखते हुए तटवर्ती घरों को खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीण पंचायत भवन और सरकारी स्कूल में शरण ले सकते हैं। राजस्व टीमें लगातार कैंप कर रही हैं। बाढ़ प्रभावितों की समस्याओं का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। - पारस नाथ मौर्य, एसडीएम दातागंज
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नरौरा बैराज से पिछले तीन दिनों से गंगा में लगातार एक लाख क्सूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा जा रहा है। रविवार को भी नरौरा बैराज से 1.42 लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी गंगा में छोड़ा गया। इसके कारण कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। दातागंज तहसील के उसहैत थाना क्षेत्र के गांव असमया रफतपुर और अहमद नगर बछौरा में हालात बेकाबू से हो गए हैं। दोनों गांवों में करीब 20 झोपड़ियां कटान से गंगा की धारा के साथ बह गई हैं। वहां कई मकानों के लिए खतरा पैदा हो गया है। कई पक्के मकान गंगा के मुहाने पर आ गए हैं। भगवान दास, किशनपाल, सोमपाल, महावीर, रच्छू, रामभरोसे, भानपाल, द्वारिका, मुकेश, छत्रपाल, नेकराम, नत्थू, रक्षपाल, अवधेश, जुगेंद्र, विशुना, जसवीर, जयवीर, पन्नालाल, प्रसादी, राजेंद्र, अजयपाल, देवेंद्र, प्रसादी आदि के घरों पर कटान का खतरा मंडरा रहा है। इनके मकान कटान के चलते किसी समय गंगा में समा सकते हैं।
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कटान के खतरे को देखते हुए असमया रफतपुर और अहमदनगर बछौरा के ग्रामीणों को दूसरे सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को कहा गया है। दो दिन पहले डीएम दीपा रंजन ने भी गांव का दौरा कर लोगों से सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने के लिए कहा था। हालांकि अब तक ग्रामीणों ने घरों को खाली नहीं किया है। एसडीएम दातागंज पारसनाथ मौर्य, नायब तहसीलदार रामकुमार, लेखपाल राकेश गांव में कैंप किए हैं।
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180 लोगों को दूसरे स्थान पर दी जा चुकी है आवासीय जमीन
गंगा ने पिछले वर्ष भी असमया रफतपुर गांव में कहर बरपाया था। कई मकान, झोपड़ियां गंगा में समा गए थे। इसके बाद प्रशासन ने 180 लोगों को दूसरे स्थान पर आवासीय जमीन उपलब्ध कराई थी। ये सभी परिवार बाढ़ के कारण बेघर हो गए थे, या फिर ऐसे परिवार थे जिनके मकान भविष्य में कटान की भेंट चढ़ सकते हैं। इसके बाद भी अब तक इन लोगों ने दूसरे स्थान पर घर नहीं बनाए हैं। एक फिर से अहमदनगर बछौरा पर कटान का बड़ा खतरा मंडरा रहा है। अगर इसी तरह कटान होता रहा तो पूरा गांव गंगा में समा सकता है।
प्राइमरी स्कूल और पंचायत घर में शरण ले सकेंगे ग्रामीण
उसहैत। दो दिन पहले डीएम दीपा रंजन ने अहमदनगर बछौरा और असमया रफतपुर का दौरा कर हालात का जायजा लिया था। डीएम ने बाढ़ प्रभावितों को प्राइमरी स्कूल और पंचायत भवन में राहत शिविर बनाने के निर्देश दिए थे। यहां राहत शिविर बनाने का काम भी शुरू हो गया है, लेकिन अब तक ग्रामीण शरण लेने नहीं पहुंचे थे। इसके साथ ही डीएम ने जिन लोगों के मकान कटान में चले गए हैं उनको प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं। संवाद
कटान पर नजर रखी जा रही है। बाढ़ खंड अपना काम काम रहा है। कटान के खतरे को देखते हुए तटवर्ती घरों को खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीण पंचायत भवन और सरकारी स्कूल में शरण ले सकते हैं। राजस्व टीमें लगातार कैंप कर रही हैं। बाढ़ प्रभावितों की समस्याओं का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। - पारस नाथ मौर्य, एसडीएम दातागंज