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विवादित ढांचा गिराए जाने के दौरान घायल हुए थे रामबहादुर
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बिसौली। अयोध्या में राम मंदिर के पांच अगस्त को होने वाले शिलान्यास से पहले हर ओर उत्सव जैसा माहौल है। राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे लोगों का तो मानो सपना पूरा हो रहा है। लंबे संघर्ष और अदालती लड़ाई के बाद मंदिर निर्माण का रास्ता साफ होने के बाद कार सेवक 30 साल पुराना समय भी याद कर रहे हैं।
बिसौली तहसील के गांव सिद्घ बरौलिया के राम बहादुर शर्मा भी मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे। कारसेवक के रूप में 1990 में विवादित ढांचा ढहाए जाने के दौरान वह घायल भी हो गए थे। राम बहादुर शर्मा ने उस समय के अखबारों की कटिंग सहेजकर रखी हैं। 1991 में विश्व हिंदू परिषद ने राम बहादुर शर्मा को सम्मानित किया था। उनको पांच हजार रुपये राशि का चेक भी दिया गया था। अब राम मंदिर की आधारशिला रखी जा रही है। ऐसे में राम बहादुर शर्मा की खुशी का ठिकाना नहीं है। वह बताते हैं कि उस दिन अयोध्या में देश भर से लाखों कारसेवक पहुंचे थे। कार सेवकों में वह भी शामिल थे। कुछ ही मिनटों में कार सेवकों ने श्रीराम जन्मभूमि स्थल के विवादित ढांचे को ढहा दिया। राम बहादुर शर्मा का कहना है कि राम मंदिर भारत के स्वाभिमान का मामला है। उनको पता था कि एक दिन जीत मंदिर निर्माण के लिए आंदोलन करने वालों की ही होगी।
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बिसौली तहसील के गांव सिद्घ बरौलिया के राम बहादुर शर्मा भी मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे। कारसेवक के रूप में 1990 में विवादित ढांचा ढहाए जाने के दौरान वह घायल भी हो गए थे। राम बहादुर शर्मा ने उस समय के अखबारों की कटिंग सहेजकर रखी हैं। 1991 में विश्व हिंदू परिषद ने राम बहादुर शर्मा को सम्मानित किया था। उनको पांच हजार रुपये राशि का चेक भी दिया गया था। अब राम मंदिर की आधारशिला रखी जा रही है। ऐसे में राम बहादुर शर्मा की खुशी का ठिकाना नहीं है। वह बताते हैं कि उस दिन अयोध्या में देश भर से लाखों कारसेवक पहुंचे थे। कार सेवकों में वह भी शामिल थे। कुछ ही मिनटों में कार सेवकों ने श्रीराम जन्मभूमि स्थल के विवादित ढांचे को ढहा दिया। राम बहादुर शर्मा का कहना है कि राम मंदिर भारत के स्वाभिमान का मामला है। उनको पता था कि एक दिन जीत मंदिर निर्माण के लिए आंदोलन करने वालों की ही होगी।
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