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जमीन मिली, आश्वासन मिले...पर नहीं मिलीं सुविधाएं

Fri, 27 Dec 2019 01:08 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 27 Dec 2019 01:08 AM IST
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Civic Amenities
उसहैत। बाढ़ की चपेट में आने के बाद में अपना गांव छोड़ने पर मजबूर हुए अहमद नगर बछौरा के लोगों के लिए उस वक्त तो तुरंत जमीन मुहैया कराते हुए उन्हें वहां पर बसा दिया गया। अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधियों ने भी तमाम आश्वासन दिए थे, लेकिन उन्हें आज तक सिवाए आश्वासन के कुछ नहीं मिल सका। यही वजह है कि इस गांव के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। अब उनकी आवाज किसी के कानों में नहीं पहुंच रही है, जिसकी वजह से ये लोग इन सर्द रातों में झुग्गी, झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं।
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शासन ने बाढ़ प्रभावित लोगों को बसाने के लिए जिला प्रशासन को पूर्व में निर्देश दिए हैं। कहा गया था कि अगर प्रदेेश के किसी भी जनपद में बाढ़ की वजह से अधिकांश गांव वालों को नुकसान हो रहा है, तो उन्हें जगह देकर दूसरी जगह पर बसाने की कवायद की जाए। दो साल पहले आयी बाढ़ ने उसहैत क्षेत्र के गांव अहमदनगर बछौरा को अपनी चपेट में लिया था, जिसके बाद में बाढ़ के पानी ने गांव के कच्चे-पक्के अधिकांश घरों को हल्के-हल्के अपनी चपेट में लिया था। ऐसी स्थिति में उन 180 परिवारों को गांव छोड़ने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं रह गया था। उस वक्त जिला प्रशासन के प्रयासों से उन लोगों को दूसरी जगह पर जमीन देकर बसाया गया। उस समय उन परिवार को पन्नी, तिरपाल और खाने पीने के लिए कुछ राहत सामग्री दी गई थी, क्योंकि बाढ़ के पानी में उनका सारा सामान उसमें समा गया था। यहां तक कि उनकी फसलें भी पूरी तरह से नष्ट हो गई थी जिस कारण इनके पास खाने तक के लिए कुछ नहीं बचा था। वर्तमान में हाल ये है कि ग्रामीणों को रहने के लिए पक्की छत तक नहीं है, बिजली और सड़क की तो बात ही क्या है।
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प्रशासन का दावा, दिया मुआवजा
-प्रशासन का दावा है कि उन्होंने उन लोगों को 95 हजार रुपये दिए थे, जिनके पक्के मकान बाढ़ में समा गए थे। जबकि जिनके कच्चे मकान थे, उनको महज 41 सौ रुपये दिए गए। इन रुपये से इन लोगों को अपने मकान बनाने थे।
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180 परिवारों की प्यास बुझाने के लिए केवल एक हैंडपंप
-180 परिवार की प्यास बुझाने के लिए जिला प्रशासन के द्वारा एक ही हैंडपंप लगाया गया है। इसके अलावा इन ग्रामीणों के पास प्यास बुझाने के लिए कोई दूसरा साधन नहीं हैं। इतनी आबादी में एक हैंडपंप से आखिरकार कैसे करके प्यास बुुझती होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है, हालात ये है सर्दी में हैंडपंप पर लोगों की भीड़ रहती है, तो गर्मियों में क्या होता होगा।
भीषण ठंड में अलाव ही सहारा
-प्रशासन शहर से लेकर नगर पालिका, पंचायत में अलाव जलाकर लोगों को ठंड से दूर रखने का प्रयास कर रहा है। साथ ही गरीब लोगों के लिए कंबल का भी वितरण कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ इन गांव वालों की तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया है। जिसकी वजह से ये लोग सर्द रातों में झुग्गी, झोपड़ी में ऐसे ही रात काटने को मजबूर हो रहे हैं। इनके लिए तो बस अलाव ही एकमात्र सहारा है और उसकी भी व्यवस्था वे खुद ही कर रहे हैं।
-गांव में रात के समय अंधेरा पसर जाता है। क्योंकि यहां पर आज तक बिजली की व्यवस्था नहीं की गई है, ऐसे में रात के समय बहुत परेशानी होती है। प्रशासन को चाहिए कि हम लोगों की समस्याओं की तरफ वह ध्यान दें।
-रामविलास
-विकास के नाम पर गांव में कोई मूलभूत सुविधाएं नहीं दी गई, पीने के पानी के लिए केवल एक हैंडपंप है। पूरे गांव के लोग इसी से अपनी प्यास बुझाते हैं। साथ ही पानी को अन्य जरूरी काम के लिए लेते हैं।
- अहमदनगर बछौरा के बाढ़ में कट चुके पक्के मकान मालिकों के लिए 95-95 हजार रुपये, झोपड़ी वाले लोगों के लिए 41 सौ रुपये दिए जा चुके हैं। उस समय मुझे जो निर्देशित किया गया था, उतना काम किया जा चुका है।

-रूपक सक्सेना, कानूनगो
अहमद नगर बछौरा गांव के कट जाने के बाद में उन लोगों दूसरी जगह पर बसाया गया था। इसके अलावा उन्हें क्या-क्या सुविधाएं दी जानी थी। इसके बारे में जानकारी नहीं है। अगर उन्हें तहसील स्तर से कोई अन्य सुविधा दी जानी थी, उन्हें दी जाएगी। क्योंकि ये प्रकरण मेरे समय का नहीं है। मैंने हाल ही मैं यहां पर ज्वाइन किया है।
-धीरज कुमार, तहसीलदार दातागंज
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