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हर तरफ छाई ‘खतरे’ की धुंध...ऐसे तो सांस लेना भी होगा दुश्वार

Tue, 05 Nov 2019 02:17 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 05 Nov 2019 02:17 AM IST
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Civic Amenities
बदायूं। दीपावली के बाद आसमान में छाई धुंध हर तरफ से खतरा पैदा कर रही है। यह हृदय, फेफड़ों, आंखों आदि के लिए तो नुकसानदायक है ही, इससे दृश्यता भी कम हो रही है। दिन में ही दूर का देखना मुश्किल हो रहा है और शाम होते-होते तो दृश्यता काफी कम हो जाती है, जिससे दोपहिया और चौपहिया वाहन चालकों के लिए भी खतरा पैदा हो रहा है। आने वाले समय में कोहरा भी छाएगा तब यह धुंध और जानलेवा साबित हो जाएगी, लेकिन इससे न तो लोग ही सबक ले रहे हैं और न ही सिस्टम। पिछले दिनों में हुए कुछ हादसों का कारण ओवरस्पीड और यातायात नियमों की अनदेखी के अलावा इस धुंध को भी माना जा रहा है।
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सोमवार को भी आसमान पर धुंध यानी स्मॉग का असर रहा। दोपहर बाद कुछ धूप निकली तो धुंध कुछ हद तक कम हुई। हालांकि धूप में तेेजी नहीं थी। जानकारों के अनुसार अभी इसको हटने में समय लग सकता है। अगर इसी बीच कोहरे की शुरुआत हो जाती है तो दिक्कत और ज्यादा बढ़ जाएगी। वैसे बीते दिनों में सोमवार का दिन कुछ हद तक ठीक ही गुजरा। बीते रविवार को स्मॉग और प्रदूूषण की वजह से लोगों को काफी दिक्कत हुई। स्मॉग और प्रदूषण की इस धुंध ने पहले ही हृदय और सांस के रोगियों को दिक्कत खड़ी की थी। इसके बाद शाम होते ही सड़क हादसों की भी संख्या बढ़ गई, जिनकी वजह इस वक्त दृश्यता कम होने को भी माना जा रहा है। सुबह-शाम वाहन चालकों को ड्राइविंग करते हुए दिक्कत हो रही थी। अस्पतालों में मरीजों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है।
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प्रदूषण और बदलते मौसम में वायरल पसार रहा पांव
बदायूं। प्रदूषण और बदलते मौसम से वायरल ने भी अपने पैर पसारना शुरू कर दिए हैं। आलम यह है कि हर दूसरे घर में मरीज है। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना पहुंचने वाले मरीजों की संख्या पांच सौ से अधिक रहती है। खास बात ये है कि 40 से 50 फीसदी मरीज बुखार के होते हैं। इनमें दो-चार मरीज मलेरिया के भी होते हैं। गंभीर रूप से बीमार मरीजों को भर्ती कर लिया जाता है। प्रदूषण की वजह से सांस और हृदय संबंधी मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। आंखों में जलन की भी शिकायत मिल रही है।
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सोमवार को फिजीशियन ओपीडी के बाहर मरीजों की लंबी कतार लगी थी। डॉ. राजेश वर्मा ने बताया कि वायरल के मरीज अधिक पहुंच रहे हैं। प्रतिदिन 40 से 50 फीसदी मरीज बुखार के निकल रहे हैं। दो-चार मरीजों में मलेरिया के लक्षण सामने आ रहे हैं। सोमवार को वार्ड में मलेरिया के 15 मरीज भर्ती थे। कुछ मरीजों को टायफाइड की भी शिकायत है उनको भी दवा दी जा रही है। श्री वर्मा ने बताया कि बदलते मौसम और प्रदूषण की वजह से लोग अधिक बीमार हो रहे हैं। ऐसे में बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है।

दवा ले रहा हूं पर कोई फायदा नहीं
वैसे तो मैं सांस की बीमारी से लगभग दो वर्ष से परेशान हूं, लेकिन बीते पांच-छह दिन से दिक्कत कुछ और बढ़ गई है। दवा ले रहा हूं। फायदा ही नहीं कर रही।
-नईम कुरैशी, मोहल्ला खंडसारी

तीन दिन से बुखार आ रहा है। पहले तो निजी चिकित्सक से दवा ली, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। यहां आए तो जांच में पता चला कि मलेरिया है। तुरंत उपचार के लिए भर्ती हो गया। अब कुछ फायदा है।
-निरोत्तम, नेकपुर

बस सेवा पर धुंध का अधिक असर
बदायूं में रेलों का संचालन वैसे कम है अभी कोहरा भी नहीं पड़ रहा है। इसलिए रेल संचालन पर तो खास असर नहीं हैं लेकिन रोडवेज बसों के चालकों को स्मॉग के कारण बसें चलानें में दिक्कत उठानी पड़ रही है। चालकों का कहना है कि ऐसे मौसम में सामने देखने के लिए आंखों पर ज्यादा जोर डालना पड़ता है, फिर भी हर तरफ धुआं सा छाये रहने के कारण दिक्कत आती है। चालक बबलू कुमार ने बताया कि वैसे तो कई दिनों से धुंध छाई हुई है, लेकिन इसका असर सुबह-शाम सड़कों पर अधिक रहता है। ऐसा महसूस होता है कि कोहरा पड़ रहा है। बड़ी सतर्कता से बस चलानी पड़ती है। इसलिए आधा-एक घंटा लेट भी हो जाते हैं।

बोले विशेषज्ञ
इस समय आसमान में छाये स्मॉग की वजह से बच्चों में सांस लेने की तकलीफ हो सकती है। दमा हो सकता है और उसके लक्षण उभर सकते हैं। फेफड़े संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। ठंड में अक्सर बच्चों को निमोनिया हो जाता है। प्रदूषण से निमोनिया और खतरनाक हो सकता है। उनके शरीरिक विकास पर असर पड़ेगा। इससे बचने के लिए बच्चों को सुबह शाम घर से कम निकालें। कोई दिक्कत होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें, जिससे समय पर उनका उपचार हो सके।
-डॉ. संदीप वार्ष्णेय, बाल रोग विशेषज्ञ, महिला अस्पताल

गर्भवती महिलाओं को पहले ही सांस लेने में दिक्कत होती है। प्रदूषण से परेशानी और बढ़ सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में वैसे भी खून की कमी होती है। प्रदूषित वातावरण में अक्सीजन की मात्रा कम होती है। उसमें कार्बन मोनो आक्साइड की मात्रा ज्यादा होती है। इससे महिलाओं के ब्लड में आक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। बच्चे की बढ़त कम हो जाती है। फेफड़ों की दिक्कत बढ़ सकती है। दमा रोगियों को आईसीयू की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में धुआं नहीं होने दें। घर में अंगीठी जलाकर सोएं नहीं, मास्क लगाएं, धूल मिट्टी के स्थान पर पानी का छिड़काव करें।
-डॉ. अनामिका सिंह, स्त्री रोग विशेषज्ञ, महिला अस्पताल

एक्सपर्ट की राय
हम सभी लोगों को अपने वाहनों पर ध्यान देने की जरूरत है। हम इनका कम से कम उपयोग करें, क्योंकि इससे कार्बन मोनो ऑक्साइड, कार्बन डाई ऑक्साइड और सल्फर डाई ऑक्साइड निकलते हैं, जो पर्यावरण को प्रदूषित कर रहे हैं। वहीं मौसम में हो रहे बदलाव की वजह से कोहरा (पानी) छाने लगा है। ऐसे में ये तीनों गैस कोहरे के साथ में मिलकर ज्यादा काले गहरे रंग का नजर आने लगी हैं, जो नुकसान दायक है।

-डॉ. रूपम सक्सेना, असिस्टेंट प्रोफेसर, वनस्पति विज्ञान, एनएमएसएन दास कॉलेज

स्मॉग छाया हुआ है। क्योंकि इस समय मौसम में परिवर्तन हो रहा है। इस वक्त ठंड का मौसम आ रहा है, जिसकी वजह से कोहरा भी आता है। ऐसे में गाड़ियों और चिमनियों से निकलने वाला धुआं कोहरे के साथ में मिलकर आसमान में छाने लगा है, जो आंखों को सबसे ज्यादा परेशानी पैदा कर रहा है। यदि ज्यादा समय तक ये छाया रहा तो स्वास्थ्य पर भी इसका विपरीत असर पड़ेगा।
-डॉ. आरके शर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर, जंतु विज्ञान, एनएमएसएन दास कॉलेज
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