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बहजोई के दंपती को पुलिस ने वापस कराई नवजात
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बदायूं। सदर कोतवाली पुलिस ने शनिवार को बच्ची बेचने के मामले का पर्दाफाश कर दिया। दंपती की बच्ची चोरी नहीं हुई थी, बल्कि उन्होंने स्वयं बच्ची को गोद दिया था। इसके लिए बाकायदा उन्होंने रजिस्ट्री कार्यालय जाकर लिखा-पढ़त कराई थी। जब उन्हें बच्ची के गोद लेने वाले की जाति और धर्म का पता चला तो वह मुकर गए और बच्ची को बेचने का आरोप लगा दिया। फिलहाल पुलिस ने बच्ची को वापस करा दिया है। दंपती उसे लेकर यहां से रवाना हो गए हैं।
संभल जिले के बहजोई निवासी दंपती कामिल और मौसमी ने शुक्रवार दोपहर सीएमओ को शिकायती पत्र सौंपकर आरोप लगाया था कि महिला अस्पताल में उनकी नवजात बच्ची को दस हजार रुपये में बेच दिया गया। कमलेश नाम की स्टाफ नर्स ने उन्हें सरकारी योजनाओं के तहत 10 हजार रुपये दिलाने का लालच दिया। फिर उन्हें रजिस्ट्री कार्यालय ले गई, जहां उनके फोटो खिंचवाए गए और अंगूठा लगवाकर बच्ची को एक दंपती को बेच दिया। मामला तब शक के घेरे में आया, जब दंपती ने पांचवें दिन आकर बच्ची बेचने का आरोप लगाया। इसकी जानकारी होने पर डीएम कुमार प्रशांत ने तुरंत जांच के आदेश दे दिए। इधर, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी किसी नतीजे पर पहुंचते, उससे पहले शनिवार को दंपती सदर कोतवाली पहुंच गए। पुलिस ने बच्ची ले जाने वाले दंपती को भी बुला लिया। कबूलपुरा मोहल्ला निवासी दंपती ने पुलिस को कागजात दिखाए। उन्होंने कहा कि न तो उन्होंने बच्ची को चोरी किया है और न ही बच्ची को खरीदा है। इस दंपती ने स्वयं उनको बच्ची गोद दी थी। इसकी बाकायदा लिखा पढ़त भी कराई, जिससे बाद में कोई दिक्कत न हो, लेकिन फिर वही हुआ, जिसका उन्हें डर था। अगर बच्ची गोद लेने के संबंध में लिखा पढ़त नहीं होती तो शायद दंपती जेल में होते। पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच लिखित में फैसला करा दिया, फिर बहजोई निवासी दंपती को बच्ची वापस करा दी।
काल्पनिक नाम लेकर कर दी शिकायत
महिला अस्पताल में कमलेश नाम की कोई स्टाफ नर्स नहीं है। बच्ची को वापस लेने के लिए दंपती ने काल्पनिक नाम लेकर सीएमओ को शिकायती पत्र सौंपा था। पहले तो स्वास्थ्य विभाग स्टाफ नर्स का नाम देकर चौंक गया। जब इस नाम की खोजबीन की गई तो कोई स्टाफ नर्स कमलेश नाम की नहीं निकली।
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दंपती के आरोप में शुरू से ही लगा रहा था झोल
चर्चा है कि बहजोई निवासी दंपती ने जिस तरह आरोप लगाने को कहानी गढ़ी थी, उसकी शुरुआत से ही झोल दिखाई दे रहा था। एक तो महिला डिलीवरी के दौरान मुंहबोले भाई के पास बहजोई से क्यों आई। उसे डिलीवरी करानी थी तो संभल में कराती। मान भी लें कि वहां अस्पताल नहीं थे तो बच्ची ले जाने के पांच दिन तक आवाज क्यों नहीं उठाई। अगर चर्चाओं पर गौर करें तो दंपती ने लिखा पढ़त बच्ची को गोद देने की कराई थी और इसके लिए रुपये भी लिए थे। जब उन्हें दूसरे दंपती का धर्म और जाति पता चली तो मुकर गए।
महिला अस्पताल से न तो बच्ची चोरी हुई थी और न ही बच्ची को किसी ने बेचा था। इस दंपती ने स्वयं बच्ची को गोद दिया था। वहीं बच्ची गोद लेने वाले ने रजिस्ट्री कार्यालय के कागजात भी दिखाए हैं। फिलहाल दंपती की बच्ची वापस करा दी है।
-ओमकार सिंह, इंस्पेक्टर कोतवाली
नवजात बच्ची उसके माता-पिता को मिल गई है। वे लोग बच्ची लेकर चले गए हैं। बाकी विभागीय जांच चल रही है। इसके बारे में रविवार को अस्पताल जाकर पता करेंगे।
-डॉ. मंजीत सिंह, प्रभारी सीएमओ
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संभल जिले के बहजोई निवासी दंपती कामिल और मौसमी ने शुक्रवार दोपहर सीएमओ को शिकायती पत्र सौंपकर आरोप लगाया था कि महिला अस्पताल में उनकी नवजात बच्ची को दस हजार रुपये में बेच दिया गया। कमलेश नाम की स्टाफ नर्स ने उन्हें सरकारी योजनाओं के तहत 10 हजार रुपये दिलाने का लालच दिया। फिर उन्हें रजिस्ट्री कार्यालय ले गई, जहां उनके फोटो खिंचवाए गए और अंगूठा लगवाकर बच्ची को एक दंपती को बेच दिया। मामला तब शक के घेरे में आया, जब दंपती ने पांचवें दिन आकर बच्ची बेचने का आरोप लगाया। इसकी जानकारी होने पर डीएम कुमार प्रशांत ने तुरंत जांच के आदेश दे दिए। इधर, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी किसी नतीजे पर पहुंचते, उससे पहले शनिवार को दंपती सदर कोतवाली पहुंच गए। पुलिस ने बच्ची ले जाने वाले दंपती को भी बुला लिया। कबूलपुरा मोहल्ला निवासी दंपती ने पुलिस को कागजात दिखाए। उन्होंने कहा कि न तो उन्होंने बच्ची को चोरी किया है और न ही बच्ची को खरीदा है। इस दंपती ने स्वयं उनको बच्ची गोद दी थी। इसकी बाकायदा लिखा पढ़त भी कराई, जिससे बाद में कोई दिक्कत न हो, लेकिन फिर वही हुआ, जिसका उन्हें डर था। अगर बच्ची गोद लेने के संबंध में लिखा पढ़त नहीं होती तो शायद दंपती जेल में होते। पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच लिखित में फैसला करा दिया, फिर बहजोई निवासी दंपती को बच्ची वापस करा दी।
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काल्पनिक नाम लेकर कर दी शिकायत
महिला अस्पताल में कमलेश नाम की कोई स्टाफ नर्स नहीं है। बच्ची को वापस लेने के लिए दंपती ने काल्पनिक नाम लेकर सीएमओ को शिकायती पत्र सौंपा था। पहले तो स्वास्थ्य विभाग स्टाफ नर्स का नाम देकर चौंक गया। जब इस नाम की खोजबीन की गई तो कोई स्टाफ नर्स कमलेश नाम की नहीं निकली।
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दंपती के आरोप में शुरू से ही लगा रहा था झोल
चर्चा है कि बहजोई निवासी दंपती ने जिस तरह आरोप लगाने को कहानी गढ़ी थी, उसकी शुरुआत से ही झोल दिखाई दे रहा था। एक तो महिला डिलीवरी के दौरान मुंहबोले भाई के पास बहजोई से क्यों आई। उसे डिलीवरी करानी थी तो संभल में कराती। मान भी लें कि वहां अस्पताल नहीं थे तो बच्ची ले जाने के पांच दिन तक आवाज क्यों नहीं उठाई। अगर चर्चाओं पर गौर करें तो दंपती ने लिखा पढ़त बच्ची को गोद देने की कराई थी और इसके लिए रुपये भी लिए थे। जब उन्हें दूसरे दंपती का धर्म और जाति पता चली तो मुकर गए।
महिला अस्पताल से न तो बच्ची चोरी हुई थी और न ही बच्ची को किसी ने बेचा था। इस दंपती ने स्वयं बच्ची को गोद दिया था। वहीं बच्ची गोद लेने वाले ने रजिस्ट्री कार्यालय के कागजात भी दिखाए हैं। फिलहाल दंपती की बच्ची वापस करा दी है।
-ओमकार सिंह, इंस्पेक्टर कोतवाली
नवजात बच्ची उसके माता-पिता को मिल गई है। वे लोग बच्ची लेकर चले गए हैं। बाकी विभागीय जांच चल रही है। इसके बारे में रविवार को अस्पताल जाकर पता करेंगे।
-डॉ. मंजीत सिंह, प्रभारी सीएमओ