{"_id":"5da8b1d98ebc3e93af0f6468","slug":"civic-amenities-badaun-news-bly3805111104","type":"story","status":"publish","title_hn":"गुस्सैल नन्हेंलाल ने पहले भी दो बार की थी जान देने की कोशिश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गुस्सैल नन्हेंलाल ने पहले भी दो बार की थी जान देने की कोशिश
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उझानी (बदायूं)। बुधवार शाम कछला पुल से गंगा में मौत की छलांग लगाने वाले वृद्घ नन्हेंलाल की हालत में सुधार के बाद देर रात ही परिजन उन्हें अपने साथ घर ले गए। नन्हेंलाल ने पत्नी के प्रति हालांकि गुस्से का इजहार किया लेकिन ग्रामीणों ने उन्हें समझाकर शांत कर दिया। वह मामूली बात पर गुस्से में दो बार पहले भी जान देने की कोशिश कर चुका है।
नन्हेलाल (70) कोतवाली क्षेत्र के गांव फुलासी का निवासी है। खाना समय पर नहीं मिलने के गुस्से में वह बुधवार शाम को कछला गंगाघाट पर पहुंच गया था। वृद्व ने पुल से गंगा में छलांग लगा दी थी। वह तो गनीमत रही जो शव का अंतिम संस्कार कर रहे लोगों की नजर उस पर पड़ गई और शोर मचाने पर जुटे गोताखोरों ने उसे डूबने से बचा लिया था। गंगा में छलांग लगाते समय नन्हेलाल का एक हाथ भी घायल हो गया। परिजनों के मुताबिक नन्हेंलाल तीन-चार साल से तनाव में भी है। घरेलू मामूली बातों पर उसे पिछले साल दो बार गंगा में कूदकर जान देने की कोशिश की लेकिन तब भी घाट पर मौजूद लोगों और गोताखोरों ने उसे सकुशल बचा लिया था। उसके गुस्से की वजह से ही तीन में से दो बेटे दिल्ली चले गए। वह दिल्ली में काम करते हैं।
विज्ञापन
नन्हेलाल (70) कोतवाली क्षेत्र के गांव फुलासी का निवासी है। खाना समय पर नहीं मिलने के गुस्से में वह बुधवार शाम को कछला गंगाघाट पर पहुंच गया था। वृद्व ने पुल से गंगा में छलांग लगा दी थी। वह तो गनीमत रही जो शव का अंतिम संस्कार कर रहे लोगों की नजर उस पर पड़ गई और शोर मचाने पर जुटे गोताखोरों ने उसे डूबने से बचा लिया था। गंगा में छलांग लगाते समय नन्हेलाल का एक हाथ भी घायल हो गया। परिजनों के मुताबिक नन्हेंलाल तीन-चार साल से तनाव में भी है। घरेलू मामूली बातों पर उसे पिछले साल दो बार गंगा में कूदकर जान देने की कोशिश की लेकिन तब भी घाट पर मौजूद लोगों और गोताखोरों ने उसे सकुशल बचा लिया था। उसके गुस्से की वजह से ही तीन में से दो बेटे दिल्ली चले गए। वह दिल्ली में काम करते हैं।
विज्ञापन