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सोत नदी से कब्जा छोड़ने को लोग होने लगे तैयार

Sun, 22 Sep 2019 06:24 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 22 Sep 2019 06:24 PM IST
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Civic Amenities
उसहैत (बदायूं)। कस्बे से होकर निकल रही सोत नदी अब दलदलनुमा दिखाई देती है। हालांकि इसके अधिकतर भाग पर यहां भी खेती हो रही है। अब पानी की दिक्कत के चलते अनेक लोग सोत नदी का अस्तित्व बचाने का मन बना रहे हैं, वह चाहते हैं कि इस संबंध में सरकार पहल करे।
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जैसे-जैसे सोत सूखी वैसे-वैसे यहां के लोगों को परेशानी बढ़ने लगी। सोत नदी का पानी क्षेत्र में कम होने के बाद जिन लोगों ने जमीन पर पशुओं को चारा या कुछ ने अस्थायी फसलें बोनी शुरू की थीं, अब वे लोग भी नदी को पुराने अस्तित्व में लाने का मन बना रहे हैं। इसके लिए वे प्रशासन का हर प्रकार से सहयोग करने के लिए तैैयार हो रहे हैं, क्योंकि अब ग्रामीणों को पानी की चिंता सताने लगी है। पहले तो वे सोत नदी के पानी से कम खर्च में सिंचाई कर लेते थे। उनके व जंगली पशुओं को पानी बहुत आसानी से मिल जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है।
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ग्रामीणों से जब सोत के बारे में बात की गई तो वे नदी के पुराने अस्तित्व को लेकर छटपटाते दिखे। उनका मानना था कि सरकार यदि चाहे तो नदी की सफाई के लिए सरकारी कार्य में वे भी पूरा सहयोग करेंगे। ग्रामीणों का कहना था कि अमर उजाला की सोत नदी को लेकर जो मुहिम चलाई जा रही है, वह तारीफ के काबिल है। सरकार को इस नदी के पुनर्जीवन के लिए आगे आना चाहिए। जनता तो चाहती है कि नदी पुनर्जीवित हो, परंतु पहल सरकार को ही करनी होगी। हम लोग नदी पर सरकार के साथ हैं। यहां बता दें कि सोत नदी के रहते हुए कभी सैकड़ों मछुआरों की रोजी रोटी चलती थी और नाविकों के नाव के सहारे परिवार चलते थे। किसानों को कम लागत पर सिंचाई मिलती थी। इन सभी को परिवार चलाने को अब बाहर जाना पड़ा या इन्हें अन्य साधन ढूंढने पड़े। वहीं अनेक स्थानों पर लोगों को अवैध स्थायी, अस्थायी कब्जे करने का अवसर मिल गया।
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क्या बोले लोग

सोत नदी को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार को आगे आना चाहिए। जनता तो चाहती है कि नदी पुनर्जीवित हो। वह स्वयं इस अभियान में साथ आ जाएंगे।
-रामवीर सिंह कश्यप, प्रधान-बारीखेड़ा

सोत नदी के खोते हुए अस्तित्व को बचाने के लिए अमर उजाला की पहल अच्छी है। इस ओर शासन-प्रशासन को भी ध्यान देना होगा। नदी में पानी नहीं रहने से जंगली जानवर खत्म होते जा रहे हैं। अपने पशुओं को लेकर भी किसानों को परेशानी आ रही है।
-छत्रपाल, ग्राम बारीखेड़ा

सरकार की मंशा यदि सोत नदी को पुनर्जीवित करने की बनती है, तो कुछ लोगों ने सोत नदी पर जो जबरदस्ती अस्थायी कब्जे कर लिए हैं वे छोड़ देंगे परन्तु कुछ लोगों ने स्थायी तौर पर भी कब्जा कर लिया है उनमे हड़कंप मचना तय है।

-सोनपाल, ग्राम बारीखेड़ा

सरकार को सोत नदी की खुदाई करानी चाहिए। इससे नदी के सोत खुल जाएंगे और नदी को लेकर पूरे जिले में किसानों में खुशी की लहर दौड़ जाएंगी। सरकार जनता से जो सहयोग चाहती है वह अवश्य मिलेगा। हम सब सरकार की मुहिम के साथ रहेंगे।
- राजीव, ग्राम बारीखेड़ा
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