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सिस्टम बेहाल- यूनिफॉर्म हाथ नहीं आई..बच्चो! अब स्वेटर के सपने देखो
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बदायूं। कई प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय के छात्र-छात्राओं को अब तक यूनिफॉर्म नसीब नहीं हो पाई है तो उधर सरकार ने बच्चों को स्वेटर मुहैया कराने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। मंशा है विद्यार्थियों को ठंड में बिना स्वेटर कांपते हुए विद्यालय न आना पड़े, लेकिन सरकार की ये तैयारी कहीं यूनिफॉर्म की तरह न रह जाए, इसको लेकर हर कोई सशंकित है।
परिषदीय स्कूलों को कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर बनाने के लिए शासन स्तर पर हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जिला स्तरीय अधिकरियों की लापरवाही की वजह से सरकारी स्कूल के बच्चों को यूनिफॉार्म तक नसीब नहीं हो रही है। बस अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक अपनी जेब की ओर ध्यान दे रहे हैं। दरअसल, शासन ने सत्र 2019-20 शुरू होने से पहले ही सभी बच्चों को निशुल्क यूनिफॉर्म के दो-दो सेट देने के आदेश जारी किए थे। इसके लिए शासन ने हर जिले को बजट भी दिया था। निर्देश थे कि बच्चों को गुणवत्ता युक्त यूनिफॉर्म उपलब्ध कराई जाए। शासन ने पिछले सत्र की अपेक्षा इस दफा प्रति सेट सौ रुपये वृद्धि कर 300 रुपये कर दिए है। खास बात यह है कि यह सत्र आधा बीत चुका है, लेकिन अभी तक अधिकतर बच्चों को यूनिफॉर्म नसीब नहीं हुई है। वहीं दूसरी ओर बच्चों को स्वेटर दिए जाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल में नामांकित तीन लाख 26 हजार 983 बच्चों को स्वेटर क्रय करने के लिए बीएसए रामपाल सिंह राजपूत की ओर से जेम पोर्टल के जरिए रजिस्टर्ड फर्मों से टेंडर मांगे गए हैं। सवाल यह उठ रहा है कि क्या स्वेटर वितरण में भी अधिकारी उसी तरह की औपचारिकताएं अपनाएंगे जैसे यूनिफॉर्म वितरण में अपनाई गई है। यदि ऐसा हुआ तो ठंड में बच्चों को स्वेटर मिलना मुश्किल हो जाएगा। हालांकि विभागीय अधिकारी दावा कर रहे हैं कि जल्द ही टेंडर होने के बाद स्वेटर भी अक्तूबर माह में बच्चों को उपलब्ध करा दिए जाएंगे।
पिछले साल सर्दी बीतने पर मिले थे स्वेटर
गत सत्र में जिले के परिषदीय स्कूलों के बच्चों को स्वेटर सर्दी बीत जाने के बाद ही मिल सके थे। इसके चलते बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल सका था। इसकी वजह से सरकार की जमकर फजीहत भी हुई थी। अगर हालत यही बने रहे, तो कोई संशय नहीं कि इस बार भी सरकार को उसी फजीहत का सामना करना पड़ सकता है।
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यूनिफॉर्म वितरण का काम चल रहा है। उम्मीद है जल्द ही सभी बच्चों को यूनिफॉर्म वितरित हो जाएगी। वहीं शासन की मंशा के अनुुरूप स्वेटर खरीदारी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
-रामपाल सिंह रापजूत, बीएसए
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परिषदीय स्कूलों को कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर बनाने के लिए शासन स्तर पर हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जिला स्तरीय अधिकरियों की लापरवाही की वजह से सरकारी स्कूल के बच्चों को यूनिफॉार्म तक नसीब नहीं हो रही है। बस अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक अपनी जेब की ओर ध्यान दे रहे हैं। दरअसल, शासन ने सत्र 2019-20 शुरू होने से पहले ही सभी बच्चों को निशुल्क यूनिफॉर्म के दो-दो सेट देने के आदेश जारी किए थे। इसके लिए शासन ने हर जिले को बजट भी दिया था। निर्देश थे कि बच्चों को गुणवत्ता युक्त यूनिफॉर्म उपलब्ध कराई जाए। शासन ने पिछले सत्र की अपेक्षा इस दफा प्रति सेट सौ रुपये वृद्धि कर 300 रुपये कर दिए है। खास बात यह है कि यह सत्र आधा बीत चुका है, लेकिन अभी तक अधिकतर बच्चों को यूनिफॉर्म नसीब नहीं हुई है। वहीं दूसरी ओर बच्चों को स्वेटर दिए जाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल में नामांकित तीन लाख 26 हजार 983 बच्चों को स्वेटर क्रय करने के लिए बीएसए रामपाल सिंह राजपूत की ओर से जेम पोर्टल के जरिए रजिस्टर्ड फर्मों से टेंडर मांगे गए हैं। सवाल यह उठ रहा है कि क्या स्वेटर वितरण में भी अधिकारी उसी तरह की औपचारिकताएं अपनाएंगे जैसे यूनिफॉर्म वितरण में अपनाई गई है। यदि ऐसा हुआ तो ठंड में बच्चों को स्वेटर मिलना मुश्किल हो जाएगा। हालांकि विभागीय अधिकारी दावा कर रहे हैं कि जल्द ही टेंडर होने के बाद स्वेटर भी अक्तूबर माह में बच्चों को उपलब्ध करा दिए जाएंगे।
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पिछले साल सर्दी बीतने पर मिले थे स्वेटर
गत सत्र में जिले के परिषदीय स्कूलों के बच्चों को स्वेटर सर्दी बीत जाने के बाद ही मिल सके थे। इसके चलते बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल सका था। इसकी वजह से सरकार की जमकर फजीहत भी हुई थी। अगर हालत यही बने रहे, तो कोई संशय नहीं कि इस बार भी सरकार को उसी फजीहत का सामना करना पड़ सकता है।
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यूनिफॉर्म वितरण का काम चल रहा है। उम्मीद है जल्द ही सभी बच्चों को यूनिफॉर्म वितरित हो जाएगी। वहीं शासन की मंशा के अनुुरूप स्वेटर खरीदारी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
-रामपाल सिंह रापजूत, बीएसए