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पहले जांच पूरी हो फिर मिलेगा खाना... फिलहाल ‘घर’ से ही मंगाकर खाइए

Sat, 24 Aug 2019 07:01 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 24 Aug 2019 07:01 PM IST
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Civic Amenities
उझानी (बदायूं)। जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसूताओं को दिए जाने वाले भोजन सुविधा पर पांच महीना पहले लगा पलीता अभी भी बरकरार है। ठेकेदार ने टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर लेने के बाद भी रसोई का काम नहीं संभाला, यह तो सीएमओ भी पूछने पर अपने मातहतों को नहीं बता पाए लेकिन पिछले महीना सहसवान के विधायक ने शासन स्तर पर आवाज उठाई तो अफसरों ने आनन फानन में जांच शुरू करा दी। ऐसा नहीं है कि इस दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव नहीं हुआ हो। प्रसूताएं खाने और नाश्ता के लिए जब भी स्वास्थ्य कर्मियों से पूछती हैं तो उन्हें यही बताकर हाथ खड़े कर दिए जाते हैं कि पहले जांच पूरी होने दो। तब तक तो खाना अपने-अपने घर से ही मंगाकर पेट भरना होगा।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर शनिवार को बार्डों में भर्ती प्रसूताओं और उनकी तीमारदारी में जुटे परिवार के लोगों में से कुछ को तो यह भी नहीं पता कि जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसूता को क्या-क्या सुविधा मिलनी चाहिए। फूलपुर गांव की कुसुमा पत्नी रवि के दो दिन पहले बच्चा हुआ। पिछले साल कुसुमा अपनी पड़ोसन के साथ अस्पताल पहुंची तो उसे नाश्ता में दूध, ब्रेड तो कभी फल भी मिले थे लेकिन उसने नर्सिंग स्टॉफ से पुराने दिनों का हवाला देकर खाना और नाश्ता की डिमांड रखी तो गोलमोल जवाब देकर चुप रहने को मजबूर कर दिया गया। सुकटिया निवासी विक्रम ने बताया कि पत्नी सुनीता को उसने प्रसव के लिए भर्ती कराया तो शाम तक उसने प्रसूता को खाने का इंतजार किया लेकिन अगले दिन पता लगा कि यहां तो रसोई बंद हो चुकी है।
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प्रसूताओं और उनके तीमारदारों में चंदौरा की पुनीता, रायपुर की गिरजादेवी और वरी का नगला गांव की संगीता की मानें तो उन्हें अपने घरों से ही खाना मंगाकर पेट भरना पड़ता है। फिलहाल तो उम्मीद भी नजर नहीं आती कि जल्द ही प्रसूताओं को खानपान की सुविधा का लाभ मिलने लगेगा।
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एमओआईसी ने मई में सीएमओ से कर दी थी ठेकेदार की शिकायत
उझानी। मार्च महीना के अंतिम सप्ताह में ठेकेदार प्रसूताओं को खाना और नाश्ता मुहैया कराने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर नहीं पहुंचा तो तत्कालीन एमओआईसी निरंजन सिंह ने सीएमओ को चिट्ठी लिख दी। जून महीना में फिर रिमाइंडर भेजा गया फिर भी जवाब नहीं मिला तो वह चुप बैठ गए। पिछले दिनों सीडीओ ने जांच शुरू कराई तो एमओआईसी ने पुरानी चिट्ठियों की प्रतियां और रजिस्टर भी उन्हीं के मातहतों को सौंप दिया था। अफसर तो उस समय हरकत में आए जब सहसवान के विधायक ओमकार सिंह यादव ने शासन स्तर पर शिकायत की। उन्होंने घोटाले का आरोप लगाया था।

जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसूताओं को खाना और नाश्ता नहीं मिलने को लेकर स्थानीय स्तर पर पहले ही अफसरों को अवगत कराया जा चुका है। अभिलेखीय सबूत भी दे दिए गए हैं लेकिन एक बात साफ है कि यहां सबकुछ पाकसाफ रहा है।
- डॉ. एमएल गंगवार, चिकित्साधीक्षक।
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