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नहाय खाय से शुरू हुई छठ पूजा
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बदायूं। संतान के कष्टों को दूर करने के लिए रखा जाने वाला छठ पूजा व्रत बुधवार को नहाय खाय के साथ शुरू हो गया। गुरुवार को खरना होगा। 20 नवंबर को अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा और 21 नवंबर को उदय होते सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा का समापन होगा।
जिले में छठ पूजा करने वालों की संख्या कम है। जनपद में बिहार और गोरखपुर के रहने वाले परिवार ही इस पर्व को यहां मनाते आ रहे हैं। बुधवार को नहाय खाय के साथ पर्व की शुरुआत हो गई। महिलाओं ने खीर पूरी खाकर व्रत की शुरुआत की। मान्यता है कि ऐसा करने पर मां पुत्र पर आने वाले संकट को स्वयं हर लेती हैं। शाम को छठ मइया का पूजन किया गया। गुरुवार को खरना या छोटी छठ पर लौका भात का प्रसाद ग्रहण किया जाएगा। माताएं ठेकुआ (गेहूं की रोटी की तरह) बनाना शुरू करेंगी। 20 नवंबर को डाला छठ के मौके पर अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। पूरी रात महिलाएं परिवार के साथ घाट किनारे रहेगी। 21 नवंबर को उदय होते सूर्य को गाय के कच्चे दूध से अर्घ्य देकर संतान के उज्ज्वल भविष्य की कामना की जाएगी। छठ पूजन के अंतिम पारण वाले दिन घरों में रोशनी की जाती है और आतिशबाजी आदि चलाकर खुशियां मनाईं जातीं हैं। त्योहार का उल्लास देखते ही बनता है।
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जिले में छठ पूजा करने वालों की संख्या कम है। जनपद में बिहार और गोरखपुर के रहने वाले परिवार ही इस पर्व को यहां मनाते आ रहे हैं। बुधवार को नहाय खाय के साथ पर्व की शुरुआत हो गई। महिलाओं ने खीर पूरी खाकर व्रत की शुरुआत की। मान्यता है कि ऐसा करने पर मां पुत्र पर आने वाले संकट को स्वयं हर लेती हैं। शाम को छठ मइया का पूजन किया गया। गुरुवार को खरना या छोटी छठ पर लौका भात का प्रसाद ग्रहण किया जाएगा। माताएं ठेकुआ (गेहूं की रोटी की तरह) बनाना शुरू करेंगी। 20 नवंबर को डाला छठ के मौके पर अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। पूरी रात महिलाएं परिवार के साथ घाट किनारे रहेगी। 21 नवंबर को उदय होते सूर्य को गाय के कच्चे दूध से अर्घ्य देकर संतान के उज्ज्वल भविष्य की कामना की जाएगी। छठ पूजन के अंतिम पारण वाले दिन घरों में रोशनी की जाती है और आतिशबाजी आदि चलाकर खुशियां मनाईं जातीं हैं। त्योहार का उल्लास देखते ही बनता है।
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