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पटाखों की धनक और दीयों को जला मनाई दिवाली
अमर उजाला ब्यूरो, बदायूं
Updated Thu, 12 Nov 2015 07:51 PM IST
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जमीन से आसमान तक आतिशी नजारों ने सभी का मन मोहा
चायनीज पटाखे और लाइटिंग के साथ दिखा दीये और मोमवत्ती का उजाला
एक वर्ष के बाद आने वाले इस त्योहार के लिए सभी का उत्साह देखते ही बना। बच्चों, युवकों से लेकर बुजुर्गों ने भी इसे अपने अपने ढंग से मनाया। घर और प्रतिष्ठानों पर जहां चायनीज झालरें चमचमाई तो वहां मिट्टी के दीपों ने भी अपनी अहमियत बनाए रखी। मोमबत्तियों की डगमगाती रोशनी भी हुई। घर-आंगन ही नहीं, गली और मोहल्ले रोशनी से भर उठे। कोई कोना अंधेरे को ठहरने के लिए नहीं रहने दिया गया।
सूर्यास्त होते ही रोशनी का पर्व जवां होने लगा। रात 10 बजे तक यह पर्व युवा था। यही नहीं रात के 12 बजे तक लोगों ने खुशी में महालक्ष्मी का धूमधड़ाके के साथ स्वागत किया। बाकी रात में भी रुक-रुककर आतिशी धमाके होते रहे। एक अनुमान से तीन करोड़ से अधिक की आतिशबाजी लोगों ने फूंक दी।
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गिफ्ट और मिठाइयों के बीच मनी दीवाली
खुशी के इस त्योहार पर आपस में खुशियां बांटे जाने का क्रम भी खूब चला। लक्ष्मी पूजन के बाद लोगों ने अपने परिचितों के यहां गिफ्ट और मिठाइयों भिजवाई और पर्व की बधाइयां भेजीं। समाज के हर तबके ने इस परंपरा का को अपने ढंग से निभाया।
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बिजली ने निभाया साथ, लोगों ने की सराहना
रौशनी के त्योहार में रात भर बिजली रहने से दिवाली की जगमग में चार चांद लग गए। जबकि पिछले कई दिनों से लोड ज्यादा होने के कारण बिजली सप्लाई बाधित चल रही थी। बुधवार की रात सप्लाई में कोई समस्या नहीं आयी, जिससे लोगों का जेनरेटरों की गडग़ड़ाहट से भी राहत मिली।
चाइनीज के साथ इस बार स्वदेशी की भी चमक
दीपों की अवली यानी दीपावली, इस त्योहार पर दीयों के महत्व को नाम से ही समझा जा सकता है। बाजार में छाई सस्ती इलेक्ट्रॉनिक झालरों और मोमवत्ती के बढ़े इस्तेमाल से दीयों का इस्तेमाल कम जरूर हुआ है। लेकिन फिर भी जिन घरों में झालरों की जगमगाहट हुई। उन घरों में दीपक और मोमबत्तियां भी जलाई गईं। भले ही इनकी मात्रा शगुन लायक ही थी।
इस बार की दीपावली जागृति की दीपावली कही जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। लोगों ने चायनीज झालरों के साथ स्वदेशी बिजली झालरें और प्रकाश के कई आइटम दीपावली पर प्रयोग किए। यही हाल आतिशबाजी में रहा। स्वेदशी अनार, रोशनी, फुलझडिय़ां चलाई गईं।
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चायनीज पटाखे और लाइटिंग के साथ दिखा दीये और मोमवत्ती का उजाला
एक वर्ष के बाद आने वाले इस त्योहार के लिए सभी का उत्साह देखते ही बना। बच्चों, युवकों से लेकर बुजुर्गों ने भी इसे अपने अपने ढंग से मनाया। घर और प्रतिष्ठानों पर जहां चायनीज झालरें चमचमाई तो वहां मिट्टी के दीपों ने भी अपनी अहमियत बनाए रखी। मोमबत्तियों की डगमगाती रोशनी भी हुई। घर-आंगन ही नहीं, गली और मोहल्ले रोशनी से भर उठे। कोई कोना अंधेरे को ठहरने के लिए नहीं रहने दिया गया।
सूर्यास्त होते ही रोशनी का पर्व जवां होने लगा। रात 10 बजे तक यह पर्व युवा था। यही नहीं रात के 12 बजे तक लोगों ने खुशी में महालक्ष्मी का धूमधड़ाके के साथ स्वागत किया। बाकी रात में भी रुक-रुककर आतिशी धमाके होते रहे। एक अनुमान से तीन करोड़ से अधिक की आतिशबाजी लोगों ने फूंक दी।
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गिफ्ट और मिठाइयों के बीच मनी दीवाली
खुशी के इस त्योहार पर आपस में खुशियां बांटे जाने का क्रम भी खूब चला। लक्ष्मी पूजन के बाद लोगों ने अपने परिचितों के यहां गिफ्ट और मिठाइयों भिजवाई और पर्व की बधाइयां भेजीं। समाज के हर तबके ने इस परंपरा का को अपने ढंग से निभाया।
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बिजली ने निभाया साथ, लोगों ने की सराहना
रौशनी के त्योहार में रात भर बिजली रहने से दिवाली की जगमग में चार चांद लग गए। जबकि पिछले कई दिनों से लोड ज्यादा होने के कारण बिजली सप्लाई बाधित चल रही थी। बुधवार की रात सप्लाई में कोई समस्या नहीं आयी, जिससे लोगों का जेनरेटरों की गडग़ड़ाहट से भी राहत मिली।
चाइनीज के साथ इस बार स्वदेशी की भी चमक
दीपों की अवली यानी दीपावली, इस त्योहार पर दीयों के महत्व को नाम से ही समझा जा सकता है। बाजार में छाई सस्ती इलेक्ट्रॉनिक झालरों और मोमवत्ती के बढ़े इस्तेमाल से दीयों का इस्तेमाल कम जरूर हुआ है। लेकिन फिर भी जिन घरों में झालरों की जगमगाहट हुई। उन घरों में दीपक और मोमबत्तियां भी जलाई गईं। भले ही इनकी मात्रा शगुन लायक ही थी।
इस बार की दीपावली जागृति की दीपावली कही जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। लोगों ने चायनीज झालरों के साथ स्वदेशी बिजली झालरें और प्रकाश के कई आइटम दीपावली पर प्रयोग किए। यही हाल आतिशबाजी में रहा। स्वेदशी अनार, रोशनी, फुलझडिय़ां चलाई गईं।