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सीडीओ ने थामी जांच की कमान, घर-घर ढूंढे गए शौचालय
बदायूं, ब्यूरो
Updated Mon, 01 Aug 2016 10:55 PM IST
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सीडीओ के साथ सात अधिकारी, एक साथ जुटे जांच में
174 शौचालय निर्माण केनाम 20.88 लाख का रुपये का घोटाला
कादरचौक ब्लाक क्षेत्र के लोहिया गांव भोजपुर नरायनपुर में 20.88 लाख रुपये से 174 शौचालय बनाए जाने की रिपोर्ट तो उच्चाधिकारियों को दे दी गई लेकिन इस गांव में एक भी शौचालय नहीं बना है। यह मामला पकड़ में आया और अमर उजाला ने खबर प्रकाशित की तो सीडीओ प्रताप सिंह भदौरिया ने अधिकारियों के बड़े दल के साथ लोहिया गांव भोजपुर नरायनपुर में धावा बोलकर तेज गति की जांच शुरू कराई। घर-घर कराई गई इस जांच में खुद सीडीओ ने भी गांव की गलियों में पहुंचकर घर-घर शौचालयों के निर्माण संबंधी जानकारी ली। इस गांव में जांच ने संकेत दिए हैं कि वास्तव में बड़ा घोटाला हुआ है। हांलाकि जांच रिपोर्ट कलेक्शन के बाद ही सीडीओ इस मामले में कार्रवाई करेंगे।
यहां बता दें कि गांव भोजपुर नरायनपुर लोहिया गांव घोषित है। वर्ष 15-16 में घोषित इस गांव में पंचायतराज विभाग ने 175 शौचालयों का निर्माण कराने को धनावंटन किया था। ग्राम प्रधान और सचिव ने इस गांव में एक भी शौचालय का निर्माण नहीं कराया है। इस बात की जानकारी अधिकारियों को भी नहीं हुई। शनिवार को डीडी पंचायत अभय कुमार शाही ने अपने निरीक्षण में पाया कि गांव में सभी शौचालयों को निर्मित दिखाया गया है। उन्हें आश्चर्य हुआ कि गांव में एक भी शौचालय नहीं बना है। उन्होंने इसे बेहद गंभीर मानते हुए उच्चाधिकारियों के संज्ञान में दिया है। इस गंभीर मामले में ग्राम प्रधान और सचिव को जवाबदेह बना दिया है। यहां बता दें जो इस गांव का सचिव है, उसे ही एडीओ का भी चार्ज मिला हुआ है। यह सब राजनीतिक वरद हस्त का कमाल है। इसमें उसके बिरादरी के एक बड़े जनप्रतिनिधि का भी आशीर्वाद बताया जाता है। सीडीओ की जांच टीम में उपायुक्त मनरेगा जय सिंह, एआर कोआपरेटिव अंबिका प्रसाद यादव, प्रभारी सहायक अभियंता डीआरडीए मो आरिफ, बीडीओ कादरचौक भीमजी उपाध्याय, तकनीकी अन्वेषक कमल मिश्रा, स्वच्छता अभियान के जिला समन्वयक जांबाज साथ रहे। इनको गांवों के कई भाग बनाकर जांच एक साथ कराई गई है। जो देर रात तक अपनी-अपनी रिपोर्ट तैयार करने में लगे रहे हैं। सीडीओ ने कहा है कि घपला तो बड़ा है। अभी सभी अधिकारियों की रिपोर्ट कंपाइल होने के बाद पूरी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। अगर, सबूतों के लिए सचिव और प्रधान के खातों की भी निगरानी होगी। इसके लिए जिम्मेदारी तय कर बड़ी कार्रवाई होगी। बाकी सबूतों पर निगरानी कराई जाएगी।
174 शौचालय निर्माण केनाम 20.88 लाख का रुपये का घोटाला
कादरचौक ब्लाक क्षेत्र के लोहिया गांव भोजपुर नरायनपुर में 20.88 लाख रुपये से 174 शौचालय बनाए जाने की रिपोर्ट तो उच्चाधिकारियों को दे दी गई लेकिन इस गांव में एक भी शौचालय नहीं बना है। यह मामला पकड़ में आया और अमर उजाला ने खबर प्रकाशित की तो सीडीओ प्रताप सिंह भदौरिया ने अधिकारियों के बड़े दल के साथ लोहिया गांव भोजपुर नरायनपुर में धावा बोलकर तेज गति की जांच शुरू कराई। घर-घर कराई गई इस जांच में खुद सीडीओ ने भी गांव की गलियों में पहुंचकर घर-घर शौचालयों के निर्माण संबंधी जानकारी ली। इस गांव में जांच ने संकेत दिए हैं कि वास्तव में बड़ा घोटाला हुआ है। हांलाकि जांच रिपोर्ट कलेक्शन के बाद ही सीडीओ इस मामले में कार्रवाई करेंगे।
यहां बता दें कि गांव भोजपुर नरायनपुर लोहिया गांव घोषित है। वर्ष 15-16 में घोषित इस गांव में पंचायतराज विभाग ने 175 शौचालयों का निर्माण कराने को धनावंटन किया था। ग्राम प्रधान और सचिव ने इस गांव में एक भी शौचालय का निर्माण नहीं कराया है। इस बात की जानकारी अधिकारियों को भी नहीं हुई। शनिवार को डीडी पंचायत अभय कुमार शाही ने अपने निरीक्षण में पाया कि गांव में सभी शौचालयों को निर्मित दिखाया गया है। उन्हें आश्चर्य हुआ कि गांव में एक भी शौचालय नहीं बना है। उन्होंने इसे बेहद गंभीर मानते हुए उच्चाधिकारियों के संज्ञान में दिया है। इस गंभीर मामले में ग्राम प्रधान और सचिव को जवाबदेह बना दिया है। यहां बता दें जो इस गांव का सचिव है, उसे ही एडीओ का भी चार्ज मिला हुआ है। यह सब राजनीतिक वरद हस्त का कमाल है। इसमें उसके बिरादरी के एक बड़े जनप्रतिनिधि का भी आशीर्वाद बताया जाता है। सीडीओ की जांच टीम में उपायुक्त मनरेगा जय सिंह, एआर कोआपरेटिव अंबिका प्रसाद यादव, प्रभारी सहायक अभियंता डीआरडीए मो आरिफ, बीडीओ कादरचौक भीमजी उपाध्याय, तकनीकी अन्वेषक कमल मिश्रा, स्वच्छता अभियान के जिला समन्वयक जांबाज साथ रहे। इनको गांवों के कई भाग बनाकर जांच एक साथ कराई गई है। जो देर रात तक अपनी-अपनी रिपोर्ट तैयार करने में लगे रहे हैं। सीडीओ ने कहा है कि घपला तो बड़ा है। अभी सभी अधिकारियों की रिपोर्ट कंपाइल होने के बाद पूरी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। अगर, सबूतों के लिए सचिव और प्रधान के खातों की भी निगरानी होगी। इसके लिए जिम्मेदारी तय कर बड़ी कार्रवाई होगी। बाकी सबूतों पर निगरानी कराई जाएगी।
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