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Budaun News: मंत्रिमंडल विस्तार में फिर खाली रह गई बदायूं की झोली

Sun, 10 May 2026 11:35 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 10 May 2026 11:35 PM IST
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Budaun's Lot Remains Empty Once Again in Cabinet Expansion
बदायूं। प्रदेश सरकार के बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार में एक बार फिर बदायूं जिले को निराशा हाथ लगी है। लंबे समय से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज थी कि इस बार जिले से किसी विधायक को योगी सरकार के मंत्रिमंडल में स्थान मिल सकता है, लेकिन विस्तार की सूची जारी होते ही बदायूं की उम्मीदों पर पानी फिर गया। जिले से किसी भी जनप्रतिनिधि को मंत्री पद न मिलने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में अंदरखाने निराशा साफ दिखाई दे रही है।
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राजनीतिक दृष्टि से अहम माने जाने वाले बदायूं जिले को इस बार मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मिलने की प्रबल संभावना जताई जा रही थी। इसकी सबसे बड़ी वजह आगामी वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा की राजनीतिक रणनीति को माना जा रहा था। माना जा रहा था कि पार्टी क्षेत्रीय, जातीय और संगठनात्मक संतुलन को साधते हुए बदायूं से किसी चेहरे को सरकार में शामिल कर सकती है, लेकिन अंतिम समय में जिले का नाम सूची से बाहर रह गया।
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मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब जिले की राजनीतिक फिजा पूरी तरह गर्म हो गई है। भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा आम है कि आखिर लगातार इतने वर्षों से पार्टी के लिए काम करने वाले जिले को सरकार में प्रतिनिधित्व क्यों नहीं मिल पा रहा। कई कार्यकर्ताओं का मानना है कि बदायूं जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली जिले की उपेक्षा पार्टी के स्थानीय संगठन और जनाधार पर असर डाल सकती है। गौरतलब है कि वर्ष 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद बदायूं सदर से विधायक रहे महेश चंद्र गुप्ता को नगर विकास राज्यमंत्री बनाया गया था। उस समय जिले में भाजपा कार्यकर्ताओं ने इसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना था। सरकार में जिले की भागीदारी से विकास कार्यों और प्रशासनिक प्रभाव को लेकर भी लोगों की उम्मीदें बढ़ी थीं। लेकिन बाद के वर्षों में बदायूं मंत्रिमंडल से बाहर होता चला गया और इस बार भी जिले को कोई स्थान नहीं मिला। (संवाद)
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छह सीटों वाले जिले में बराबरी का राजनीतिक मुकाबला
बदायूं जिले की छह विधानसभा सीटों में वर्तमान समय में तीन सीटों पर भाजपा और तीन सीटों पर समाजवादी पार्टी के विधायक हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ऐसा संतुलन किसी भी दल के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है, जबकि यहां पर सांसद सपा का है। भाजपा के लिए बदायूं में संगठन को और मजबूत करने तथा 2027 के चुनाव में बढ़त बनाने के लिए किसी स्थानीय विधायक को मंत्री बनाना राजनीतिक रूप से लाभकारी कदम माना जा रहा था। इसी कारण पिछले कई दिनों से जिले के कई नेताओं के नाम चर्चाओं में थे। कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि पार्टी नेतृत्व पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपने राजनीतिक समीकरण मजबूत करने के लिए बदायूं को साधने का प्रयास करेगा। हालांकि मंत्रिमंडल विस्तार में जिले की अनदेखी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

विपक्ष को मिला भाजपा पर हमला बोलने का मौका
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद विपक्षी दलों ने भी भाजपा पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। समाजवादी पार्टी के नेताओं का कहना है कि भाजपा सरकार लगातार बदायूं की उपेक्षा कर रही है। विपक्ष इसे क्षेत्रीय असंतोष और राजनीतिक उपेक्षा से जोड़कर जनता के बीच मुद्दा बनाने की तैयारी में जुट गया है। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि मंत्रिमंडल गठन और विस्तार पूरी तरह संगठन और नेतृत्व का विशेषाधिकार होता है। पार्टी में हर कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि को सम्मान मिलता है तथा भविष्य में बदायूं को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि अंदरखाने यह भी माना जा रहा है कि जिले के नेताओं की आपसी राजनीति और मजबूत दावेदारी का अभाव भी कहीं न कहीं मंत्री पद न मिलने का कारण बना।


2027 की रणनीति पर भी उठने लगे सवाल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश का हर जिला बेहद महत्वपूर्ण है। बदायूं में सपा और भाजपा के बीच सीधा राजनीतिक मुकाबला माना जाता है। ऐसे में यदि जिले को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मिलता तो पार्टी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह पैदा हो सकता था। लेकिन अब जिले के नेताओं और संगठन को कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है।
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