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33 लाख तक पहुंची पार्किंग ठेके की बोली
अमर उजाला ब्यूरो/ उझानी
Updated Mon, 03 Apr 2017 11:05 PM IST
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ठेका
- फोटो : अमर उजाला
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33 लाख तक पहुंची पार्किंग ठेके की बोली
- पिछले साल 58 लाख रुपये में छूटा था पार्किंग शुल्क का ठेका
- नपं के ईओ बोले- कम बोली आई है, करेंगे अफसरों से बात
पार्किंग शुल्क ठेका को लेकर कई दिन से चल रहा संशय सोमवार को भी बरकरार रहा। पालिका प्रशासन ने तीसरी बार तारीख मुकर्रर कर बोली भी लगवाई, लेकिन दावेदार 33 लाख रुपये से अधिक तक नहीं पहुंच पाए। पिछले साल ठेका 58 लाख रुपये में छूटा था। ठेका 33 लाख रुपये में ही उठेगा, यह ईओ और प्रशासनिक अफसरों के बीच बात होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
पालिका के सभागार में पार्किंग शुल्क ठेका लेने के लिए करीब आठ-नौ लोग पहुंचे। उन्होंने तहसीलदार सदर राजेंद्र प्रसाद और ईओ संजय कुमार तिवारी की ओर से पेश शर्तों पर गौर करने के बाद बोली शुरू की तो शुरुआत ही दो लाख रुपये से हुई। एक घंटा तक बोली लगने का दौरान चला, लेकिन अलापुर के फुरकान ने अंतिम बोली 33 लाख रुपया लगाई। इससे 50 हजार रुपया कम रकम की बोली रवेंद्र की थी। ईओ ने बताया कि पार्किंग शुल्क नियमानुसार ही वसूल कराया जाएगा। ठेका 33 लाख रुपये में ही रहेगा। इसकी अनुमति लेने के लिए वह अफसरों को रिपोर्ट भेज रहे हैं। यह भी संभव है कि फिर से नीलामी की प्रक्रिया शुरू की जाए। बता दें कि ठेका पार्किंग शुल्क को लेकर पहले भी दो बार बोली लगवाई जा चुकी है, लेकिन दोनों ही बार पिछले साल के मुकाबले बोली की रकम काफी कम रही थी। बोली के दौरान पालिका सदस्य प्रवीण मित्तल, अरुण अग्रवाल, सत्येंद्र गुप्ता, अब्दुल हसन नेता, लेखाकार राजेश कुमार जौहरी, मुकेश शर्मा, जेई विनय सक्सेना और निखिल आदि मौजूद थे।
पालिका कर्मी कर रहे हैं शुल्क वसूल
उझानी। ईओ संजय कुमार तिवारी ने बताया कि पिछले साल अवधेश के नाम ठेका उठा था। 31 मार्च को समय सीमा समाप्त हो जाने के बाद पालिका कर्मियों को पार्किंग शुल्क की वसूली के लिए लगाया गया है। नए सिरे से ठेका उठने तक पालिका कर्मी ही शुल्क वसूल करेंगे। ठेका लेने के इच्छुक लोगों से कह दिया गया है कि बोली चाहे जितने में छूटे लेकिन शुल्क नियमानुसार ही वसूल होगा।
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व्यापारी नेता ने सीएम को भेजा पत्र
उझानी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष मुरली मनोहर सिंघल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को फैक्स के जरिए पत्र भेजकर ठेका पार्किंग शुल्क पर रोक लगवाए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि पार्किंग शुल्क के नाम पर व्यापारियों का आर्थिक उत्पीड़न किया जाता रहा है।
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- पिछले साल 58 लाख रुपये में छूटा था पार्किंग शुल्क का ठेका
- नपं के ईओ बोले- कम बोली आई है, करेंगे अफसरों से बात
पार्किंग शुल्क ठेका को लेकर कई दिन से चल रहा संशय सोमवार को भी बरकरार रहा। पालिका प्रशासन ने तीसरी बार तारीख मुकर्रर कर बोली भी लगवाई, लेकिन दावेदार 33 लाख रुपये से अधिक तक नहीं पहुंच पाए। पिछले साल ठेका 58 लाख रुपये में छूटा था। ठेका 33 लाख रुपये में ही उठेगा, यह ईओ और प्रशासनिक अफसरों के बीच बात होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
पालिका के सभागार में पार्किंग शुल्क ठेका लेने के लिए करीब आठ-नौ लोग पहुंचे। उन्होंने तहसीलदार सदर राजेंद्र प्रसाद और ईओ संजय कुमार तिवारी की ओर से पेश शर्तों पर गौर करने के बाद बोली शुरू की तो शुरुआत ही दो लाख रुपये से हुई। एक घंटा तक बोली लगने का दौरान चला, लेकिन अलापुर के फुरकान ने अंतिम बोली 33 लाख रुपया लगाई। इससे 50 हजार रुपया कम रकम की बोली रवेंद्र की थी। ईओ ने बताया कि पार्किंग शुल्क नियमानुसार ही वसूल कराया जाएगा। ठेका 33 लाख रुपये में ही रहेगा। इसकी अनुमति लेने के लिए वह अफसरों को रिपोर्ट भेज रहे हैं। यह भी संभव है कि फिर से नीलामी की प्रक्रिया शुरू की जाए। बता दें कि ठेका पार्किंग शुल्क को लेकर पहले भी दो बार बोली लगवाई जा चुकी है, लेकिन दोनों ही बार पिछले साल के मुकाबले बोली की रकम काफी कम रही थी। बोली के दौरान पालिका सदस्य प्रवीण मित्तल, अरुण अग्रवाल, सत्येंद्र गुप्ता, अब्दुल हसन नेता, लेखाकार राजेश कुमार जौहरी, मुकेश शर्मा, जेई विनय सक्सेना और निखिल आदि मौजूद थे।
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पालिका कर्मी कर रहे हैं शुल्क वसूल
उझानी। ईओ संजय कुमार तिवारी ने बताया कि पिछले साल अवधेश के नाम ठेका उठा था। 31 मार्च को समय सीमा समाप्त हो जाने के बाद पालिका कर्मियों को पार्किंग शुल्क की वसूली के लिए लगाया गया है। नए सिरे से ठेका उठने तक पालिका कर्मी ही शुल्क वसूल करेंगे। ठेका लेने के इच्छुक लोगों से कह दिया गया है कि बोली चाहे जितने में छूटे लेकिन शुल्क नियमानुसार ही वसूल होगा।
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व्यापारी नेता ने सीएम को भेजा पत्र
उझानी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष मुरली मनोहर सिंघल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को फैक्स के जरिए पत्र भेजकर ठेका पार्किंग शुल्क पर रोक लगवाए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि पार्किंग शुल्क के नाम पर व्यापारियों का आर्थिक उत्पीड़न किया जाता रहा है।