{"_id":"622ba8aa74b09e7a8f07516d","slug":"badaun-145-vidhan-sabha-2022-bisauli-142-vidhan-sabha-2022-sahaswan-143-vidhan-sabha-2022-bilsi-144-vidhan-sabha-2022-shekhupur-146-vidhan-sabha-2022-dataganj-147-vidhan-sabha-2022-badaun-news-bly478028672","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिल्सीः सपा के एमवाई वोट बैंक में ‘तड़का’ फेल.. बसपा कमजोर तो भाजपा ने पकड़ा जोर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिल्सीः सपा के एमवाई वोट बैंक में ‘तड़का’ फेल.. बसपा कमजोर तो भाजपा ने पकड़ा जोर
विज्ञापन
उझानी (बदायूं)। नए परिसीमन के बाद बिल्सी विधानसभा क्षेत्र का भूगोल कुछ इस तरह का हो गया कि सपा के एमवाई वोट बैंक की जुगलबंदी कोई ज्यादा असर नहीं दिखा सकी। साल-2012 के पहले चुनाव में बसपा ने सपा के वोट बैंक में खासकर मुसलमानों में सेंध लगाई तो वह हाथी के साथी बन गए। इसके बाद बसपा के जनाधार में तेजी से आई गिरावट ने अगले दोनों चुनावों में पार्टी प्रत्याशियों का गणित गड़बड़ा दिया। हालांकि दो बार मुख्य मुकाबले में सपा ही रही लेकिन भाजपा का जनाधार बढ़ता चला गया। इस बार हालांकि एमवाई वोट बैंक में महान दल से गठबंधन के चलते मौर्य-शाक्य वोटों का तड़का भी लगा फिर भी वह फेल हो गया।
बिल्सी सीट का भूगोल नए परिसीमन के बाद ही बदला था। उससे पहले अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। जातीय समीकरण भी बदल गए। साल-2012 में हाजी मुसर्रत अली ‘बिट्टन’ ने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और पहली बार में जीत हासिल कर ली। बसपा के बिट्टन को 57600 और बदायूं सीट छोड़ने वाले सपा के विमलकृष्ण अग्रवाल को 49272 वोट मिले थे। सबसे अहम यह कि उस वक्त कांग्रेस और महान दल के गठबंधन से चुनाव लड़े सुरेशपाल सिंह तोमर ने 23 हजार से ज्यादा वोट पाए। भाजपा की सीमा चौहान को करीब चार हजार वोट ही मिल पाए। इसके बाद 2017 में मोदी लहर के बीच भाजपा का जनाधार तेजी से बढ़ा और बरेली की आंवला सीट छोड़कर आए आरके शर्मा ने 82070 पाकर विधानसभा पहुंच गए। हाजी बिट्टन को करीब 55 हजार वोट जरूर मिले लेकिन पिछले चुनाव के मुकाबले दो हजार वोट कम मिले। भाजपा के वोट बढ़ते गए। भाजपा के हरीश शाक्य ने अब 93329 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की। सपा-महान दल गठबंधन के प्रत्याशी चंद्रप्रकाश मौर्य को 68016 मत ही मिले। ऐसा तब है जब चंद्रप्रकाश को सजातीय वोट भी मिले। बसपा ने इस बार ममता शाक्य पर दांव चला जो करीब 31 हजार वोट पर ही रह गईं। राष्ट्रीय परिवर्तन दल के डॉ. कल्लू और कांग्रेस के अंकित चौहान कोई असर नहीं छोड़ पाए।
-
बिल्सी सीट छोड़ी तो शर्मा और बिट्टन को नहीं मिली विधायकी
बिल्सी सीट पर पहली बार जीत का इतिहास रचने वाले हाजी बिट्टन को 2017 में मतदाताओं ने नकार दिया तो उन्होंने सहसवान को राजनीतिक कर्मभूमि बना लिया। बसपा ने उन्हें सहसवान से प्रत्याशी बनाया लेकिन सपा के बृजेश यादव के सामने हार का सामना करना पड़ा। कमोबेश ऐसे ही बिट्टन को हराने वाले भाजपा विधायक आरके शर्मा ने विधानसभा क्षेत्र ही नहीं बल्कि पार्टी भी बदल ली। बरेली के आंवला पहुंचे शर्मा इस बार हार गए। वह बसपा के टिकट पर एक बार आंवला के विधायक भी रह चुके हैं। बताते हैं कि शर्मा ने आंवला से लड़ने का मन बिल्सी से विधायक रहते ही बना लिया था लेकिन पार्टी बदलने का फैसला उन्होंने ऐन वक्त पर किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
बिल्सी सीट का भूगोल नए परिसीमन के बाद ही बदला था। उससे पहले अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। जातीय समीकरण भी बदल गए। साल-2012 में हाजी मुसर्रत अली ‘बिट्टन’ ने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और पहली बार में जीत हासिल कर ली। बसपा के बिट्टन को 57600 और बदायूं सीट छोड़ने वाले सपा के विमलकृष्ण अग्रवाल को 49272 वोट मिले थे। सबसे अहम यह कि उस वक्त कांग्रेस और महान दल के गठबंधन से चुनाव लड़े सुरेशपाल सिंह तोमर ने 23 हजार से ज्यादा वोट पाए। भाजपा की सीमा चौहान को करीब चार हजार वोट ही मिल पाए। इसके बाद 2017 में मोदी लहर के बीच भाजपा का जनाधार तेजी से बढ़ा और बरेली की आंवला सीट छोड़कर आए आरके शर्मा ने 82070 पाकर विधानसभा पहुंच गए। हाजी बिट्टन को करीब 55 हजार वोट जरूर मिले लेकिन पिछले चुनाव के मुकाबले दो हजार वोट कम मिले। भाजपा के वोट बढ़ते गए। भाजपा के हरीश शाक्य ने अब 93329 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की। सपा-महान दल गठबंधन के प्रत्याशी चंद्रप्रकाश मौर्य को 68016 मत ही मिले। ऐसा तब है जब चंद्रप्रकाश को सजातीय वोट भी मिले। बसपा ने इस बार ममता शाक्य पर दांव चला जो करीब 31 हजार वोट पर ही रह गईं। राष्ट्रीय परिवर्तन दल के डॉ. कल्लू और कांग्रेस के अंकित चौहान कोई असर नहीं छोड़ पाए।
विज्ञापन
-
बिल्सी सीट छोड़ी तो शर्मा और बिट्टन को नहीं मिली विधायकी
बिल्सी सीट पर पहली बार जीत का इतिहास रचने वाले हाजी बिट्टन को 2017 में मतदाताओं ने नकार दिया तो उन्होंने सहसवान को राजनीतिक कर्मभूमि बना लिया। बसपा ने उन्हें सहसवान से प्रत्याशी बनाया लेकिन सपा के बृजेश यादव के सामने हार का सामना करना पड़ा। कमोबेश ऐसे ही बिट्टन को हराने वाले भाजपा विधायक आरके शर्मा ने विधानसभा क्षेत्र ही नहीं बल्कि पार्टी भी बदल ली। बरेली के आंवला पहुंचे शर्मा इस बार हार गए। वह बसपा के टिकट पर एक बार आंवला के विधायक भी रह चुके हैं। बताते हैं कि शर्मा ने आंवला से लड़ने का मन बिल्सी से विधायक रहते ही बना लिया था लेकिन पार्टी बदलने का फैसला उन्होंने ऐन वक्त पर किया था।
विज्ञापन