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सपा के वोट बैंक का मिला साथ तो दिग्गज विधायक को हराया
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सपा- हिमांशु यादव। संवाद
- फोटो : BADAUN
बदायूं। शेखूपुर सीट पर पहली बार के लड़ाके हिमांशु यादव ने दिग्गज विधायक धर्मेंद्र शाक्य को मात देकर इतिहास रच दिया। बरसों से दो खानदानों के राजनीतिक मुकाबले में हर बार सीट बदलने की परंपरा भी उन्होंने कायम रखी। विधायक पक्ष जीत के लिए काफी आश्वस्त था पर हताशा हाथ लगी।
शेखूपुर सीट 2012 के परिसीमन के बाद बनी थी। पहले यह सीट उसहैत के नाम से थी, यहां पूर्व मंत्री भगवान सिंह शाक्य और स्व. बनवारी सिंह यादव के बीच रोमांचक चुनावी मुकाबले होते रहे। इस बार यहां से भगवान सिंह के बेटे धर्मेंद्र शाक्य भाजपा से चुनाव मैदान में थे और उनके मुकाबले बनवारी सिंह के बेटे आशीष यादव ने खुद की बजाय बेटे हिमांशु को उतारा था। सपा से ही टिकट मांग रहे मुस्लिम खां ने कामयाबी न मिलने पर बसपा से दांव ठोंक दिया था। इस बार भाजपा विधायक को सौ फीसदी जीत की उम्मीद थी। मुस्लिम खां के मैदान में आने से भी उन्हें जीत का आंकड़ा करीब आता दिख रहा था पर बसपा धड़ाम हो गई और साइकिल ने रफ्तार पकड़ ली।
शेखूपुर व इसके नाम वाली उसहैत सीट का इतिहास आमतौर पर ऐसा रहा है कि एक बार मुस्लिम खां की जीत को छोड़ दें तो बारी समय यही दोनों परिवार बारी बारी से विधायक बनते रहे हैं। इस लिहाज से हिमांशु ने धर्मेंद्र शाक्य से सीट छीनकर परंपरा कायम रखी। धर्मेंद्र शाक्य का कहना था कि वह जनादेश का सम्मान करते हैं। उन्हें काफी संख्या में वोट मिले, नहीं जीत सके तो जो कमी रह गई होगी उसे दूर करने की कोशिश करेंगे। संवाद
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शेखूपुर सीट 2012 के परिसीमन के बाद बनी थी। पहले यह सीट उसहैत के नाम से थी, यहां पूर्व मंत्री भगवान सिंह शाक्य और स्व. बनवारी सिंह यादव के बीच रोमांचक चुनावी मुकाबले होते रहे। इस बार यहां से भगवान सिंह के बेटे धर्मेंद्र शाक्य भाजपा से चुनाव मैदान में थे और उनके मुकाबले बनवारी सिंह के बेटे आशीष यादव ने खुद की बजाय बेटे हिमांशु को उतारा था। सपा से ही टिकट मांग रहे मुस्लिम खां ने कामयाबी न मिलने पर बसपा से दांव ठोंक दिया था। इस बार भाजपा विधायक को सौ फीसदी जीत की उम्मीद थी। मुस्लिम खां के मैदान में आने से भी उन्हें जीत का आंकड़ा करीब आता दिख रहा था पर बसपा धड़ाम हो गई और साइकिल ने रफ्तार पकड़ ली।
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शेखूपुर व इसके नाम वाली उसहैत सीट का इतिहास आमतौर पर ऐसा रहा है कि एक बार मुस्लिम खां की जीत को छोड़ दें तो बारी समय यही दोनों परिवार बारी बारी से विधायक बनते रहे हैं। इस लिहाज से हिमांशु ने धर्मेंद्र शाक्य से सीट छीनकर परंपरा कायम रखी। धर्मेंद्र शाक्य का कहना था कि वह जनादेश का सम्मान करते हैं। उन्हें काफी संख्या में वोट मिले, नहीं जीत सके तो जो कमी रह गई होगी उसे दूर करने की कोशिश करेंगे। संवाद
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