{"_id":"5e1c70268ebc3e87f030817e","slug":"asha-worker-badaun-news-bly39179573","type":"story","status":"publish","title_hn":"जांच रिपोर्ट की फाइल खुली तो सेहत महकमा में फिर मचेगा घमासान!","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जांच रिपोर्ट की फाइल खुली तो सेहत महकमा में फिर मचेगा घमासान!
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उझानी (बदायूं)। पिछले महीना आशाओं के इंसेंटिव को लेकर रुपयों के लेनदेन की शिकायत के मामले में एडीएम (वित्त) की अगुवाई वाली अफसरों की चार सदस्यीय टीम की जांच रिपोर्ट सीएमओ दफ्तर में कैद है। इसे डीएम ने सीएमओ कार्यालय को भेजा था, लेकिन तत्कालीन सीएमओ ने कार्यमुक्त होने से एक दिन पहले जिले की सभी बीपीएम यूनिट में फेरबदल कर जो कार्रवाई की, वह भी संदेह के घेरे में बताई जाने लगी है। रिपोर्ट में तो बहुत कुछ सामने आया था। ऐसे में अगर जांच रिपोर्ट नये सीएमओ के सामने आई तो फिर से महकमा में घमासान का माहौल बनने से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ी आशाओं और चिकित्साधीक्षक डॉ. महेश प्रताप सिंह ने इंसेंटिव भुगतान को लेकर 26 दिसंबर को एक-दूसरे के खिलाफ जिस तरह के आरोप-प्रत्यारोप लगाए थे, उसकी जांच के दौरान एडीएम (वित्त) नरेंद्र बहादुर सिंह की अगुवाई वाली अफसरों की जांच टीम ने पूरा मामला रुपयों के लेनदेन का माना था। बताते हैं कि अफसरों ने अगले दिन ही अपनी रिपोर्ट डीएम कुमार प्रशांत के सामने पेश की तो वह सीएमओ कार्यालय में पहुंच गई। चार दिन पहले तत्कालीन सीएमओ मंजीत सिंह ने कार्यमुक्त होने से कुछ देर पहले ही जिले की सभी बीपीएम यूनिट इधर-उधर कर दीं। बीपीएम यूनिट में फेरबदल भी जांच रिपोर्ट का हिस्सा माना गया लेकिन अधिकतर स्वास्थ्य केंद्रों पर से यूनिट के सदस्यों को नई तैनाती स्थल के लिए कार्यमुक्त नहीं किया गया है। विभागीय जानकारों की मानेें तो अफसरों की जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन सीएमओ कार्रवाई करते कुछेक एमओआईसी भी फेरबदल के फेर में पड़ जाते। चूंकि, नये सीएमओ डॉ. यशपाल सिंह कार्यभार ग्रहण कर चुके हैं सो जांच रिपोर्ट की फाइल उनके सामने भी पहुंच सकती है। फेरबदल की शंका से परेशान कुछेक एमओआईसी ने कुर्सी बचाने के लिए जुगत लगानी भी शुरू कर दी है। वैसे, तत्कालीन सीएमओ ने जिले के स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्यरत बीपीएम यूनिट के सदस्यों से तबादले के लिए विकल्प मांगते समय राजनीतिक हस्तक्षेप कराने की स्थिति में कार्रवाई का अल्टीमेटम देकर चौका दिया था।
विज्ञापन
स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ी आशाओं और चिकित्साधीक्षक डॉ. महेश प्रताप सिंह ने इंसेंटिव भुगतान को लेकर 26 दिसंबर को एक-दूसरे के खिलाफ जिस तरह के आरोप-प्रत्यारोप लगाए थे, उसकी जांच के दौरान एडीएम (वित्त) नरेंद्र बहादुर सिंह की अगुवाई वाली अफसरों की जांच टीम ने पूरा मामला रुपयों के लेनदेन का माना था। बताते हैं कि अफसरों ने अगले दिन ही अपनी रिपोर्ट डीएम कुमार प्रशांत के सामने पेश की तो वह सीएमओ कार्यालय में पहुंच गई। चार दिन पहले तत्कालीन सीएमओ मंजीत सिंह ने कार्यमुक्त होने से कुछ देर पहले ही जिले की सभी बीपीएम यूनिट इधर-उधर कर दीं। बीपीएम यूनिट में फेरबदल भी जांच रिपोर्ट का हिस्सा माना गया लेकिन अधिकतर स्वास्थ्य केंद्रों पर से यूनिट के सदस्यों को नई तैनाती स्थल के लिए कार्यमुक्त नहीं किया गया है। विभागीय जानकारों की मानेें तो अफसरों की जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन सीएमओ कार्रवाई करते कुछेक एमओआईसी भी फेरबदल के फेर में पड़ जाते। चूंकि, नये सीएमओ डॉ. यशपाल सिंह कार्यभार ग्रहण कर चुके हैं सो जांच रिपोर्ट की फाइल उनके सामने भी पहुंच सकती है। फेरबदल की शंका से परेशान कुछेक एमओआईसी ने कुर्सी बचाने के लिए जुगत लगानी भी शुरू कर दी है। वैसे, तत्कालीन सीएमओ ने जिले के स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्यरत बीपीएम यूनिट के सदस्यों से तबादले के लिए विकल्प मांगते समय राजनीतिक हस्तक्षेप कराने की स्थिति में कार्रवाई का अल्टीमेटम देकर चौका दिया था।
विज्ञापन