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जिसकी नजर खराब, उसका बन रहा था हैवी व्हीकल डीएल

Thu, 04 Jan 2018 09:06 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,बदायूं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,बदायूं Updated Thu, 04 Jan 2018 09:06 PM IST
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ARTO unearthed DL racket
ड्राइविंग लाइसेंस
दलालों और संबंधित विभागों में सेटिंग की बदौलत गलत लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का धंधा अभी रुक नहीं रहा है। गुरुवार को एआरटीओ प्रशासन ने एक ऐसे हैवी ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदक को पकड़ा जिसे सात फुट दूर से अंगुलियां नहीं दिखाई दे रहीं थीं। हैरत इस बात की थी कि नेत्र रोग विशेषज्ञ की जांच से लेकर मोटर ड्राइविंग कॉलेज तक ने उसके पक्ष में ओके रिपोर्ट 
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लगा रखी थी। यहां तक कि एआरटीओ के स्टाफ ने भी कागजात ओके करके फीस जमा कर ली थी। एआरटीओ ने सारी कार्रवाई निरस्त कर जांच के निर्देश दिए हैं। 
एआरटीओ प्रशासन एनसी शर्मा गुरुवार दोपहर अपने कार्यालय में बैठे थे। तभी कादरचौक के लभारी निवासी हरिकेश को स्टाफ ने उनके सामने पेश किया। हरिकेश के पास उसका हैवी व्हीकल डीएल बनवाने संबंधी आवेदन था। इसमें सारी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी थीं, बस एआरटीओ की संस्तुति बाकी थी। एआरटीओ ने पूछा तो हरिकेश ने बताया कि उसे बस या ट्रक चलाने के लिए लाइसेंस चाहिए। एआरटीओ को हरिकेश की आंखों में डिफेक्ट लगा तो उन्होंने अपनी कुर्सी पर बैठे हुए ही उसे दायीं आंख बंद करने को कहा। फिर उन्होंने अपने हाथ ऊपर करके दो अंगुली दिखाकर पूछा कि यह कितनी अंगुली हैं, इस पर हरिकेश का जवाब था एक। जब तीन दिखाईं तो चार और जब पांच दिखाईं तो हरिकेश ने चार बता दीं। जब बांयी आंख बंद कराकर गिनती पूछी तो हरिकेश ने सही जानकारी दे दी। बातचीत में यह भी साफ हो गया कि वह पढ़ालिखा है और संख्या अच्छी तरह से पहचानता है। इससे एआरटीओ ने पुष्टि कर ली कि हरिकेश की बायीं आंख में दोष है। 
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जब हरिकेश से आंखों की जांच कराकर लाने को कहा गया तो उसने आवेदन के साथ लगा वह प्रमाणपत्र भी दिखा दिया जिसमें जिला अस्पताल की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुधा रानी की मुहर व हस्ताक्षर से ओके बताया गया था। साथ ही शहर के शिवशक्ति मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग कॉलेज का प्रमाणपत्र भी लगा था जिसमें हरिकेश को भारी वाहन चलाने के लिए उपयुक्त ड्राइवर माना गया है। एआरटीओ के कार्यालय में लाइसेंस की फीस भी जमा हो चुकी थी। एआरटीओ ने सारी प्रक्रिया रद्द करके जांच के निर्देश दिए हैं। 
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डॉक्टर छुट्टी पर, किसने किया कारनामा 
जिला अस्पताल में दलालों का पहले से बोलबाला रहा है। नेत्र रोग और हड्डी रोग विभाग इसके लिए खासा बदनाम है। हरिकेश के मामले में भी दलालों और स्टाफ की भूमिका हो सकती है। सीएमएस डॉ. आरएस यादव से जब नेत्र दोष के बावजूद सही की रिपोर्ट देने के बारे में जानकारी की गई तो पता लगा कि डॉ. सुधा रानी तो चार दिसंबर से अवकाश पर चल रही हैं। चूंकि डॉक्टर की मुहर के साथ 
साइन के पास तारीख नहीं पड़ी है, इसलिए मामला और संदिग्ध हो गया। अब यह भी संशय है कि डॉक्टर के असली दस्तखत हैं भी या नहीं। सीएमएस ने बताया कि मामला उनके पास आएगा तो वह अपनी डॉक्टर और स्टाफ की भूमिका की जांच कराएंगे। 


अक्सर इस तरह के वाकये पेश आते हैं जहां फर्जीवाड़ा साफतौर पर साबित होता है। इस मामले में भी ऐसी ही कहानी है। मैं संबंधित विभाग को पत्र भेजकर उनके फाल्ट के बारे में बताऊंगा। बिना देखे प्रमाणपत्र बांट रहे मोटर ट्रेनिंग कॉलेज प्रबंधन की भी जांच कर कार्रवाई की जाएगी। 
- एनसी शर्मा, एआरटीओ प्रशासन
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