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शर्तिया इलाज की गारंटी दे रहे झोलाछाप
badaun
Updated Fri, 15 May 2015 07:55 PM IST
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झोलाछाप डॉक्टरों का जाल शहर से लेकर सुदूर गांवों तक फैला हुआ है। झोलाछाप जटिल से जटिल बीमारियों का शर्तिया इलाज करने की गारंटी दे रहे हैं। बीमारियों के सीजन में इन डॉक्टरों के चंगुल में फंसकर कई लोगों की जान तक जा चुकी हैं, लेकिन विभाग इन पर प्रभावी अंकुश नहीं लगा पा रहा। अब तो फुटपाथों और हथठेलों पर अवैध कारोबार चलने लगा है। कोई यौनवर्धक दवा बेच रहा है, तो कोई रूमाल से दांत उखाड़ने का कारनामा कर रहा है। ऐसे लोगों के झांसे में गांव के मरीज आसानी से फंस जाते हैं।
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जिले की बदहाल सरकारी चिकित्सा सेवाओं के कारण झोलाछाप डॉक्टरों को पनपने का मौका मिलता है। गांव-देहात में सीएचसी-पीएचसी बंद पड़ी रहती हैं। संविदा पर रखे जाने वाले डॉक्टर भी इन जगहों को मुहैया नहीं कराए जाते। प्राइवेट डॉक्टर्स का इलाज इतना महंगा होता है कि गरीब मरीज जाने से कतराते हैं। इस कारण झोलाछाप डॉक्टरों का धंधा मंदा नहीं पड़ता।
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आंकड़ा दो हजार के पार
जिले के 15 विकास खंडों में कुल झोलाछाप के अधिकारिक आंकड़े स्वास्थ्य विभाग के पास तो नहीं हैं, लेकिन विभाग के लोग मोटे तौर पर इनकी संख्या करीब दो हजार से ज्यादा आं करहे हैं। गांवों-कस्बों में झोलाछापों का धंधा खूब चमक रहा है। बिना किसी डिग्री के वे धड़ल्ले से इलाज करते हैं।
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नीम-हकीम दे रहे बांझपन, मर्दाना कमजोरी की दवा
बदायूं। अब तो सरेआम ये कारोबार होने लगा है। फुटपाथ और चौराहों पर मजमा लगाकर खुद को नीम-हकीम बताने वाले बांझपन और मर्दाना कमजोरी को दूर करने की दवाएं बेच रहे हैं। गांव-देहात के लोग इन नीम-हकीमों के चंगुल में आसानी से फंस जाते हैं। इतना ही नहीं यह शर्तिया लड़का या लड़की के जन्म की भी गारंटी लेने से नहीं चूकते। स्वास्थ्य विभाग इनको भी नजरअंदाज कर रहा है।
सिर्फ नोटिस तक सीमित रहती है कार्रवाई
बदायूं। झोलाछापों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई सिर्फ नोटिसों तक सीमित रहती है। इस बात को सभी जानते हैं कि इन नोटिस पर अभी तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। बिना किसी डिग्री और प्रशिक्षण के क्लीनिक चलाने वाले झोलाछापों के खिलाफ कार्रवाई के आंकड़ों पर गौर करें, तो एक साल में सिर्फ तीन डॉक्टरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। ये ऊंट के मुंह में जीरा के समान है।
ज्यों-ज्यों दवा की मर्ज और बढ़ता गया
बदायूं। मेडिकल साइंस और दवाओं के बारे में कोई जानकारी न होने के बावजूद झोलाछाप हर मर्ज का शर्तिया इलाज करने का दावा करते नहीं थकते। इनसे इलाज कराने वाले लोगों को फायदा तो नहीं होता, बल्कि उनका मर्ज और बढ़ जाता है। कई बार जान पर बन आती है। कुछ ऐसे झोलाछाप भी हैं, जो बड़े डॉक्टरों के नर्सिंग होम में कुछ दिन कंपाउंडरी करने केबाद अब क्लीनिक चला रहे हैं।
झोलाछापों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है। इनको नोटिए दिए जा रहे हैं। जो अपनी डिग्री और प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं करेंगे, उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। कुछ झोलाछाप को नोटिस दिए गए हैं।
-डॉ. दीपक सक्सेना, सीएमओ
जिले में झोलाछाप का मकड़जाल स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से पनप रहा है। जांच और नियमों के नाम पर डिग्री धारक डॉक्टरों को परेशान किया जाता है। झोलाछाप पर कार्रवाई नहीं होती।
-डॉ. इतेहाद आलम, सचिव इंडियन मेडिकल एसोसिएशन