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Budaun News: सनातन संस्कृति की स्थापना में अहिल्याबाई का अहम योगदान
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डायट ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में लोक गीत प्रस्तुत करती छात्रा। संवाद
बदायूं। लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर त्रिशताब्दी महोत्सव समिति के तत्वावधान में डायट ऑडिटोरियम में प्रबुद्ध महिला सम्मेलन पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र वितरण समारोह हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक धर्मेंद्र ने कहा कि हमें लोकमाता अहिल्याबाई के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। लोकमाता ने अपनी शासन व्यवस्था में आध्यात्मिक व धार्मिकता का भाव समाविष्ट किया था।
उन्होंने प्रजा के हित को सर्वोपरि रखते हुए जाति-धर्म से ऊपर उठकर शासन व्यवस्थाएं संचालित कीं। लोकमाता अहिल्याबाई भारतीय धर्म, संस्कृति व सनातन परंपरा की साक्षात प्रतिमूर्ति थीं। उनकी न्यायप्रियता अनुकरणीय थी। सनातन संस्कृति की पुनर्स्थापना में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर का अहम योगदान रहा, जो हमारे लिए सदैव स्मरणीय रहेगा।
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इस मौके पर उपजिलाधिकारी कल्पना जायसवाल, डॉ. सरला चक्रवर्ती, चेयरपर्सन उझानी पूनम अग्रवाल, विभाग प्रचारक विशाल, कार्यक्रम संयोजिका सीमा रानी, डॉ. शुभ्रा माहेश्वरी एवं सीमा चौहान मौजूद रहीं।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक धर्मेंद्र ने कहा कि हमें लोकमाता अहिल्याबाई के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। लोकमाता ने अपनी शासन व्यवस्था में आध्यात्मिक व धार्मिकता का भाव समाविष्ट किया था।
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उन्होंने प्रजा के हित को सर्वोपरि रखते हुए जाति-धर्म से ऊपर उठकर शासन व्यवस्थाएं संचालित कीं। लोकमाता अहिल्याबाई भारतीय धर्म, संस्कृति व सनातन परंपरा की साक्षात प्रतिमूर्ति थीं। उनकी न्यायप्रियता अनुकरणीय थी। सनातन संस्कृति की पुनर्स्थापना में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर का अहम योगदान रहा, जो हमारे लिए सदैव स्मरणीय रहेगा।
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इस मौके पर उपजिलाधिकारी कल्पना जायसवाल, डॉ. सरला चक्रवर्ती, चेयरपर्सन उझानी पूनम अग्रवाल, विभाग प्रचारक विशाल, कार्यक्रम संयोजिका सीमा रानी, डॉ. शुभ्रा माहेश्वरी एवं सीमा चौहान मौजूद रहीं।

डायट ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में लोक गीत प्रस्तुत करती छात्रा। संवाद