{"_id":"99f8df20ca2b6365e3f024483c2879f6","slug":"after-20-points-the-results-indicated-zero-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"20 अंक आने के बाद रिजल्ट में दर्शाया शून्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
20 अंक आने के बाद रिजल्ट में दर्शाया शून्य
बदायूं
Updated Sat, 23 Jan 2016 07:40 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
राजकीय पॉलीटेक्निक से पेंट टेक्नालॉजी से द्वितीय वर्ष की परीक्षा दे चुके छात्र के बैक पेपर में शून्य अंक दर्शाने की वजह से छात्र फेल हो गया, जबकि बैक पेपर में उसके 20 अंक थे। इस मामले में कोई सुनवाई न होने की वजह से छात्र डिप्रेशन में आ गया है। इस मामल में छात्र जितेंद्र कुमार के पिता रामऔतार ने प्राविधिक शिक्षा परिषद के सचिव को एक पत्र भेजकर इस गंभीर त्रुटि से अवगत कराया। साथ ही उसके जल्द ही निस्तारण कराने की गुहार लगाई, जिससे उसका छात्र फाइनल इयर की परीक्षा में शामिल हो सके।
सचिव को भेजे पत्र में उसहैत थाना क्षेत्र के गांव टिकरी गांव के रामऔतार ने बताया कि उसका बेटा जितेंद्र कुमार ने राजकीय पॉलीटेक्निक से अप्रैल 2015 में परीक्षा दी थी। जुलाई में परीक्षा परिणाम घोषित होने पर मैथ के बैकपेपर में 20 अंक आ रहे थे। कुछ पेपरों में अनुपस्थित दर्शा रहा था, जबकि वह उपस्थिति थे। बोर्ड और कॉलेज में चक्कर काटने के बाद उपस्थिति तो दर्ज हो गई, लेकिन बैक पेपर का परिणाम गायब करके अंक शून्य दर्शा रहे हैं। इससे उन्हें फेल कर दिया गया, जिससे वह फाइनल की परीक्षा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। यदि उनकी सुनवाई न हुई तो उनका बेटा कहीं कुछ अनहोनी न कर ले।
सचिव को भेजे पत्र में उसहैत थाना क्षेत्र के गांव टिकरी गांव के रामऔतार ने बताया कि उसका बेटा जितेंद्र कुमार ने राजकीय पॉलीटेक्निक से अप्रैल 2015 में परीक्षा दी थी। जुलाई में परीक्षा परिणाम घोषित होने पर मैथ के बैकपेपर में 20 अंक आ रहे थे। कुछ पेपरों में अनुपस्थित दर्शा रहा था, जबकि वह उपस्थिति थे। बोर्ड और कॉलेज में चक्कर काटने के बाद उपस्थिति तो दर्ज हो गई, लेकिन बैक पेपर का परिणाम गायब करके अंक शून्य दर्शा रहे हैं। इससे उन्हें फेल कर दिया गया, जिससे वह फाइनल की परीक्षा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। यदि उनकी सुनवाई न हुई तो उनका बेटा कहीं कुछ अनहोनी न कर ले।
विज्ञापन