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Budaun News: तालाब में बना दिया स्वास्थ्य केंद्र, आज तक जिम्मेदारों का नहीं चल सका पता
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दहगवां में निर्माणाधीन सीएचसी का भवन,सड़क से नीचे होने के कारण इसमें भर गया है पानी । संवाद
दहगवां। शासन की योजनाओं व धनराशि का कैसे पलीता लगाया जा रहा है यह देखना हो तो दहगवां के अधूरे पड़े स्वास्थ्य केंद्र के भवन को देख लीजिए। जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते यहां तालाब में ही स्वास्थ्य केंद्र बना दिया गया। मामला शासन तक पहुंचा, लेकिन पिछले दस साल में अब तक जिम्मेदारों का पता नहीं चल सका है। तीन महीने पहले शासन से टीम आई तो सीएमओ को इस मामले की जानकारी हो सकी।
कस्बा दहगवां में सीएचसी के निर्माण की बसपा सरकार में वर्ष 2009 में मंजूरी मिली थी। यहां भवन निर्माण का कार्य शुरू किया गया था। छह करोड़ के बजट में दो करोड़ रुपये जारी हो गए। बाकी के चार करोड़ रुपये जारी नहीं किए गए। भवन का लगभग 80 फीसदी निर्माण कार्य पूरा हो गया, बावजूद इसके अब तक भवन हैंडओवर नहीं हो सका।
15 साल से भवन हैंडओवर क्यों नहीं हो सका, जब इसकी पड़ताल की गई तो पता चला कि भवन मानक के अनुरूप नहीं बन सका है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। छानबीन में पता चला कि स्वास्थ्य विभाग जिसे मानक के अनुरूप नहीं बता रहा असल कारण उसका तालाब पर बना होना है, जबकि उसे वहीं तालाब के पास में ही बनाया जाना था।
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बताया जा रहा है कि तालाब को पाटकर वहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बना दिया गया। यही कारण है कि धीरे-धीरे भवन का फर्श बैठ रहा है। इसी कारण भवन अब तक हैंडओवर नहीं हो सका। शासन ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं।
तीन माह पूर्व शासन से आई टीम ने यहां नापतौल की थी, जमीन को देखा, संबंधित रिकॉर्ड जुटाए और अपने साथ ले गए। बताया जा रहा है कि कार्यदायी संस्था पैकफेड ने इसे बनाया था। अब इस मामले में पैकफेड के अफसरों की भी जांच चल रही है।
दस साल में नहीं तलाशे जा सके जिम्मेदार
2014 में इसकी शिकायत शासन में की गई थी। दस साल हो गए, लेकिन अब तक स्वास्थ्य विभाग यह पता नहीं लगा सका कि किसकी वजह से स्वास्थ्य केंद्र का भवन तालाब में बनाया गया। जब भवन बन रहा था तब जिम्मेदारों ने क्यों नहीं देखा। अब एक बार फिर शासन ने इस मामले की सुध ली है। तीन महीने पहले आई टीम यहां से जांच कर साक्ष्य साथ ले गई है। देखना है कि अब जिम्मेदारों के नाम सामने आ पाएंगे या नहीं।
तीन महीने पहले शासन के निर्देश पर टीम इस भवन को देखने आई थी। तब पता चला था कि तालाब में भवन बनाया गया है। भवन सही जगह व मानक अनुरूप होगा तभी स्वास्थ्य विभाग उसे अपने अधिकार में लेगा। - डॉ. रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ
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कस्बा दहगवां में सीएचसी के निर्माण की बसपा सरकार में वर्ष 2009 में मंजूरी मिली थी। यहां भवन निर्माण का कार्य शुरू किया गया था। छह करोड़ के बजट में दो करोड़ रुपये जारी हो गए। बाकी के चार करोड़ रुपये जारी नहीं किए गए। भवन का लगभग 80 फीसदी निर्माण कार्य पूरा हो गया, बावजूद इसके अब तक भवन हैंडओवर नहीं हो सका।
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15 साल से भवन हैंडओवर क्यों नहीं हो सका, जब इसकी पड़ताल की गई तो पता चला कि भवन मानक के अनुरूप नहीं बन सका है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। छानबीन में पता चला कि स्वास्थ्य विभाग जिसे मानक के अनुरूप नहीं बता रहा असल कारण उसका तालाब पर बना होना है, जबकि उसे वहीं तालाब के पास में ही बनाया जाना था।
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बताया जा रहा है कि तालाब को पाटकर वहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बना दिया गया। यही कारण है कि धीरे-धीरे भवन का फर्श बैठ रहा है। इसी कारण भवन अब तक हैंडओवर नहीं हो सका। शासन ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं।
तीन माह पूर्व शासन से आई टीम ने यहां नापतौल की थी, जमीन को देखा, संबंधित रिकॉर्ड जुटाए और अपने साथ ले गए। बताया जा रहा है कि कार्यदायी संस्था पैकफेड ने इसे बनाया था। अब इस मामले में पैकफेड के अफसरों की भी जांच चल रही है।
दस साल में नहीं तलाशे जा सके जिम्मेदार
2014 में इसकी शिकायत शासन में की गई थी। दस साल हो गए, लेकिन अब तक स्वास्थ्य विभाग यह पता नहीं लगा सका कि किसकी वजह से स्वास्थ्य केंद्र का भवन तालाब में बनाया गया। जब भवन बन रहा था तब जिम्मेदारों ने क्यों नहीं देखा। अब एक बार फिर शासन ने इस मामले की सुध ली है। तीन महीने पहले आई टीम यहां से जांच कर साक्ष्य साथ ले गई है। देखना है कि अब जिम्मेदारों के नाम सामने आ पाएंगे या नहीं।
तीन महीने पहले शासन के निर्देश पर टीम इस भवन को देखने आई थी। तब पता चला था कि तालाब में भवन बनाया गया है। भवन सही जगह व मानक अनुरूप होगा तभी स्वास्थ्य विभाग उसे अपने अधिकार में लेगा। - डॉ. रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ