{"_id":"5bf7fecebdec22414474305c","slug":"91542979278-budaun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मेला ककोड़ा: लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मेला ककोड़ा: लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी
Updated Fri, 23 Nov 2018 06:51 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मेला ककोड़ा (बदायूं) । कार्तिक पूर्णिमा पर लाखों लोग शुक्रवार को यहां आस्था के तट पर पहुंचे और पतित पावनी गंगा में डुबकी लगाई। लोगों ने गंगा स्नान कर सूर्य को अर्घ्य दिया। अपने और परिवार की कुशलता के लिए प्रार्थना की। दान पुण्य करने के बाद मेले का आनंद उठाया। करीब तीन लाख लोगों के स्नान करने का अनुमान है। उधर, कछला गंगाघाट पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई।
गुरुवार की रात से श्रद्धालुओं के आगमन का सिलसिला जो शुरू हुआ वह शुक्रवार दोपहर तक निर्बाध चलता रहा। लोगों ने मेले में घूमकर खूब मौज-मस्ती करने के साथ खरीदारी भी की। शाम ढलते ही मेला ककोड़ा रंग-बिरंगी रोशनी में डूब गया।
मेला ककोड़ा 16 नवंबर से शुरू हो गया था। उसी दिन से लोग गंगा तट पर आकर अपना डेरा जमाने लगे थे। ठंड भी श्रद्धालुओं के उत्साह को डिगा नहीं सकी। भीड़ को देखकर दुकानदारों की बांछे खिल उठीं। धूनी रमाए बैठे संतों ने हवन, यज्ञ, भजन और कीर्तन किया। श्रद्धालुओं ने गंगा मैया को धोती पहनावा किया। साथ ही जोत बजाने जैसे धार्मिक आयोजन हुए। मेले में श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह भंडारों का आयोजन हुआ। प्रशासन, पुलिस के अधिकारी और नेता मेले में डेरा जमाए रहे। सुरक्षा के खासे इंतजाम रहे।
विज्ञापन
ऐसा मना जाता है कि एकादशी से कर्तिक पूर्णिमा तक जो भी व्यक्ति गंगा स्नान करता है उसे बहुत पुण्य मिलता है। यहां भोर होते ही श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान शुरू कर दिया। आलम ये था कि तट के किनारे श्रद्धालु एक दूसरे का अंदर से निकलने का इंतजार कर रहे थे। हर कोई हर-हर गंगे का उद्घोष कर रहा था। राजस्थान से आए राजपाल मीणा ने बताया कि वैसे तो गंगा हमारे देश में कई स्थानों पर बह रही है लेकिन वह मेला ककोड़ा में ही हर साल स्नान करने के लिए आते हैं। उन्हें यहां आकर काफी सुकुन मिलता है। कानपुर के दीपक चंद और महेश पाल ने कहा कि मेला ककोड़ा का बेहद महत्व है। उनके क्षेत्र के लोग हर साल यहां पर आते हैं।
विज्ञापन
गुरुवार की रात से श्रद्धालुओं के आगमन का सिलसिला जो शुरू हुआ वह शुक्रवार दोपहर तक निर्बाध चलता रहा। लोगों ने मेले में घूमकर खूब मौज-मस्ती करने के साथ खरीदारी भी की। शाम ढलते ही मेला ककोड़ा रंग-बिरंगी रोशनी में डूब गया।
विज्ञापन
मेला ककोड़ा 16 नवंबर से शुरू हो गया था। उसी दिन से लोग गंगा तट पर आकर अपना डेरा जमाने लगे थे। ठंड भी श्रद्धालुओं के उत्साह को डिगा नहीं सकी। भीड़ को देखकर दुकानदारों की बांछे खिल उठीं। धूनी रमाए बैठे संतों ने हवन, यज्ञ, भजन और कीर्तन किया। श्रद्धालुओं ने गंगा मैया को धोती पहनावा किया। साथ ही जोत बजाने जैसे धार्मिक आयोजन हुए। मेले में श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह भंडारों का आयोजन हुआ। प्रशासन, पुलिस के अधिकारी और नेता मेले में डेरा जमाए रहे। सुरक्षा के खासे इंतजाम रहे।
विज्ञापन
ऐसा मना जाता है कि एकादशी से कर्तिक पूर्णिमा तक जो भी व्यक्ति गंगा स्नान करता है उसे बहुत पुण्य मिलता है। यहां भोर होते ही श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान शुरू कर दिया। आलम ये था कि तट के किनारे श्रद्धालु एक दूसरे का अंदर से निकलने का इंतजार कर रहे थे। हर कोई हर-हर गंगे का उद्घोष कर रहा था। राजस्थान से आए राजपाल मीणा ने बताया कि वैसे तो गंगा हमारे देश में कई स्थानों पर बह रही है लेकिन वह मेला ककोड़ा में ही हर साल स्नान करने के लिए आते हैं। उन्हें यहां आकर काफी सुकुन मिलता है। कानपुर के दीपक चंद और महेश पाल ने कहा कि मेला ककोड़ा का बेहद महत्व है। उनके क्षेत्र के लोग हर साल यहां पर आते हैं।