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रूट डायवर्जन से रेलवे ने झटकी रोडवेज की इनकम
Updated Mon, 24 Jul 2017 11:14 PM IST
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बदायूं।
कासगंज से बरेली तक जाने के लिए हर दिन हजारों लोग रोडवेज बस का सहारा लेते हैं लेकिन सावन के दिनों में किए गए रूट डायवर्जन से बसों का सफर यात्रियों के लिए दुश्कर हो गया है। लंबे रूट में जाम और रोडवेज का किराया बढ़ने की वजह से यात्रियों ने बसों के बजाय ट्रेनों से सफर करना शुरू कर दिया है। यही वजह है कि सावन में सप्ताह के चार दिन शुक्रवार से सोमवार तक ट्रेनों में यात्रियों की संख्या बेतहाशा बढ़ी है और रोडवेज की बसें खाली नजर आ रही हैं। ऐसे में जाहिर है कि पहले रोडवेज को होने वाली कमाई अब रेलवे की जेब में जाने लगी है। परिवहन निगम को हर दिन लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है।
स्टेशन अधीक्षक पारस चंद्र प्रवीन ने बताया कि रूट डायवर्जन के चलते शुक्रवार, रविवार, शनिवार और सोमवार को कासंगज से बरेली आने-जाने वालों यात्रियों की भीड़ होती हैं। ट्रेनें इस कदर फुल होती हैं कि यात्रियों को खड़े होकर ही सफर करना पड़ता हैं। बरेली से बदायूं आने के लिए बसों को दातागंज होते हुए आना पड़ता है। जबकि बदायूं से बरेली जाने के लिए यात्रियों को आंवला के रास्ते होकर बस का सफर तय करना होता है। इससे एक तो सफर लंबा हो गया है, दूसरा किराया बढ़ गया है और इसके बाद भी रास्ते में जाम लगने पर दिक्कत होती है। दातागंज में बसें फंस जाती हैं तो घंटों यात्रियों को जाम से जूझना पड़ता है। इन दिक्कतों को देखते हुए यात्री अब रोडवेज बसों के बजाय सीधे ट्रेन का सफर करना मुनासिब समझ रहे हैं। उनको ट्रेन का सफर इसलिए भी मुफीद लग रहा है क्योंकि रोडवेज बसों के किराए की अपेक्षा रेलवे का किराया काफी कम है। रोडवेज से रूट डायवर्जन के दौरान 94 रुपये किराया खर्च होता है, वहीं ट्रेन का सफर मात्र 10 रुपये में हो जा रहा है। रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहे यात्रियों सोनू, विवेक का कहना था कि ट्रेन से बरेली पहुंचने में समय भी कम लग रहा है और किराया भी कम है इसलिए सावन के प्रत्येक शुक्रवार, शनिवार, रविवार और सोमवार तक ट्रेनों में ही सफर मुनासिब है। उधर, रूट डायवर्जन होने से बसों को संचालन कम हो गया है, यात्री बसों में सफर नहीं कर रहें हैं। कई बार बसों को बरेली तक पांच से 10 सवारियां लेकर जाना पड़ता हैं। सावन के अंत तक करीब एक करोड़ का घाटा होने का अनुमान परिवहन निगम के अधिकारी लगा रहे हैं। आगरा, कासगंज, ताज, बुलंदशहर आदि डिपो की आने वाले बसें सवारियां न मिलने पर बदायूं से लौट जाती हैं।
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कोट...
रूट डायवर्जन होने के बाद से ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ बढ़ गई हैं। रेलवे को मुनाफा हो रहा है। सावन के अंत तक रूट डायवर्जन रहेगा इसलिए यात्रियों की ट्रेनों भी भीड़ रहेगी।
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-पारस चंद्र प्रवीन, स्टेशन अधीक्षक
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प्रतिदिन चार से पांच लाख का नुकसान रूट डायवर्ट होने से परिवहन निगम को लग रहा है। यात्री भी रूट डायवर्जन की वजह से बसों में पहले के मुकाबले कम सफर कर रहे हैं।
-राजेश कुमार, एआरएम, रोडवेज डिपो
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कासगंज से बरेली तक जाने के लिए हर दिन हजारों लोग रोडवेज बस का सहारा लेते हैं लेकिन सावन के दिनों में किए गए रूट डायवर्जन से बसों का सफर यात्रियों के लिए दुश्कर हो गया है। लंबे रूट में जाम और रोडवेज का किराया बढ़ने की वजह से यात्रियों ने बसों के बजाय ट्रेनों से सफर करना शुरू कर दिया है। यही वजह है कि सावन में सप्ताह के चार दिन शुक्रवार से सोमवार तक ट्रेनों में यात्रियों की संख्या बेतहाशा बढ़ी है और रोडवेज की बसें खाली नजर आ रही हैं। ऐसे में जाहिर है कि पहले रोडवेज को होने वाली कमाई अब रेलवे की जेब में जाने लगी है। परिवहन निगम को हर दिन लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है।
स्टेशन अधीक्षक पारस चंद्र प्रवीन ने बताया कि रूट डायवर्जन के चलते शुक्रवार, रविवार, शनिवार और सोमवार को कासंगज से बरेली आने-जाने वालों यात्रियों की भीड़ होती हैं। ट्रेनें इस कदर फुल होती हैं कि यात्रियों को खड़े होकर ही सफर करना पड़ता हैं। बरेली से बदायूं आने के लिए बसों को दातागंज होते हुए आना पड़ता है। जबकि बदायूं से बरेली जाने के लिए यात्रियों को आंवला के रास्ते होकर बस का सफर तय करना होता है। इससे एक तो सफर लंबा हो गया है, दूसरा किराया बढ़ गया है और इसके बाद भी रास्ते में जाम लगने पर दिक्कत होती है। दातागंज में बसें फंस जाती हैं तो घंटों यात्रियों को जाम से जूझना पड़ता है। इन दिक्कतों को देखते हुए यात्री अब रोडवेज बसों के बजाय सीधे ट्रेन का सफर करना मुनासिब समझ रहे हैं। उनको ट्रेन का सफर इसलिए भी मुफीद लग रहा है क्योंकि रोडवेज बसों के किराए की अपेक्षा रेलवे का किराया काफी कम है। रोडवेज से रूट डायवर्जन के दौरान 94 रुपये किराया खर्च होता है, वहीं ट्रेन का सफर मात्र 10 रुपये में हो जा रहा है। रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहे यात्रियों सोनू, विवेक का कहना था कि ट्रेन से बरेली पहुंचने में समय भी कम लग रहा है और किराया भी कम है इसलिए सावन के प्रत्येक शुक्रवार, शनिवार, रविवार और सोमवार तक ट्रेनों में ही सफर मुनासिब है। उधर, रूट डायवर्जन होने से बसों को संचालन कम हो गया है, यात्री बसों में सफर नहीं कर रहें हैं। कई बार बसों को बरेली तक पांच से 10 सवारियां लेकर जाना पड़ता हैं। सावन के अंत तक करीब एक करोड़ का घाटा होने का अनुमान परिवहन निगम के अधिकारी लगा रहे हैं। आगरा, कासगंज, ताज, बुलंदशहर आदि डिपो की आने वाले बसें सवारियां न मिलने पर बदायूं से लौट जाती हैं।
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कोट...
रूट डायवर्जन होने के बाद से ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ बढ़ गई हैं। रेलवे को मुनाफा हो रहा है। सावन के अंत तक रूट डायवर्जन रहेगा इसलिए यात्रियों की ट्रेनों भी भीड़ रहेगी।
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-पारस चंद्र प्रवीन, स्टेशन अधीक्षक
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प्रतिदिन चार से पांच लाख का नुकसान रूट डायवर्ट होने से परिवहन निगम को लग रहा है। यात्री भी रूट डायवर्जन की वजह से बसों में पहले के मुकाबले कम सफर कर रहे हैं।
-राजेश कुमार, एआरएम, रोडवेज डिपो