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बगैर सरकारी मदद के नीरजा-शिवशंकर ने लिए सात फेरे
Updated Sat, 28 Jul 2018 12:18 AM IST
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फोटो- 27 बीडीएनयूजेएचपीएच-01
बगैर सरकारी मदद के लिए सात फेरे
प्रशासन ने स्थगित कर दिया था सामूहिक विवाह कार्यक्रम
ब्लॉक अफसरों की लापरवाही से नहीं पहुंची सूचना
अमर उजाला ब्यूरो
उझानी (बदायूं)। सरकारी अनुदान पर होने वाले वैवाहिक समारोह के प्रति अफसर किस कदर लापरवाह हैं, इसका नमूना शुक्रवार को यहां मैरिज हाल में देखने को मिला। ब्लॉक स्तर पर 27 जुलाई के लिए तय वैवाहिक समारोह तीन दिन पहले ही स्थगित कर दिया गया था लेकिन स्थानीय अफसरों ने दो-तीन के घरवालों को अवगत ही नहीं कराया। नतीजा यह रहा कि एक युगल पहले से तय कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गया। कार्यक्रम स्थल पर कोई नहीं मिला तो उन्होंने ब्लॉक कर्मियों से संपर्क साधा। ब्लॉक कर्मियों से हकीकत का पता लगते ही युगल के घरवालों ने शादी करके ही घर लौटने का निर्णय किया। शादी जैसी न कोई रौनक और न ही कोई इंतजाम पर कासगंज जिले के सोरों कोतवाली के गांव तुमड़िया के शिवशंकर और पिपरौल की नीरजा परिणय सूत्र में बंधकर एक-दूजे के हो गए।
कासगंज के तुमड़िया गांव से दूल्हा शिवशंकर सुबह मैरिज होम पहुंच गया। उसके साथ परिवार के लोग भी थे। इसके कुछ देर बाद ही कोतवाली क्षेत्र के गांव पिपरौल से रामसिंह के घरवाले भी बेटी नीरजा को लेकर आ पहुंचे। दोनों पक्ष के लोगों को जब कोई व्यवस्था नजर नहीं आई तो उन्होंने ब्लॉक में एडीओ यशपाल सिंह से संपर्क साधा। एडीओ ने उन्हें बता दिया कि कार्यक्रम स्थगित हो चुका है। ब्लॉक कर्मियों ने हाथ खड़े कर दिए तो वधू नीरजा और वर शिवशंकर के घरवालों ने एक मैरिज हाल में पहुंचकर उसके मालिक नितिन गुप्ता से संपर्क साधा। दोनों पक्ष के लोगों की जिद के आगे नितिन उन्हें शादी की रस्में पूरी करने के लिए जगह मुहैया कराई। दोपहर बाद नीरजा और शिवशंकर के सात फेरों की रस्म पूरी की गई। दोनों के परिवार वालों ने इस बात की परवाह भी नहीं की कि उन्हें अब सरकारी अनुदान भी नहीं मिलेगा।
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यह है विवाह का अनुदान
सरकारी स्तर के वैवाहिक कार्यक्रम का हिस्सा बनने वाले पात्रों को अनुदान के रूप में पांच हजार रुपया खानपान के लिए, 10 हजार रुपये में कपड़े और बर्तन और 20 हजार रुपया वधू के खाते में भेजने का प्रावधान है। यह तभी संभव है जब वर और वधू पंजीकरण कराएं। -------
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समाज कल्याण विभाग की ओर से कार्यक्रम स्थगित होने के बारे में जिस समय उन्हें अवगत कराया, उसी समय पंजीकृत युगल के मोबाइल नंबर पर कॉल कर दी गई थी लेकिन नीरजा और शिवशंकर को लेकर उनके घरवाले फिर भी आ गए।
- यशपाल सिंह, एडीओ
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बगैर सरकारी मदद के लिए सात फेरे
प्रशासन ने स्थगित कर दिया था सामूहिक विवाह कार्यक्रम
ब्लॉक अफसरों की लापरवाही से नहीं पहुंची सूचना
अमर उजाला ब्यूरो
उझानी (बदायूं)। सरकारी अनुदान पर होने वाले वैवाहिक समारोह के प्रति अफसर किस कदर लापरवाह हैं, इसका नमूना शुक्रवार को यहां मैरिज हाल में देखने को मिला। ब्लॉक स्तर पर 27 जुलाई के लिए तय वैवाहिक समारोह तीन दिन पहले ही स्थगित कर दिया गया था लेकिन स्थानीय अफसरों ने दो-तीन के घरवालों को अवगत ही नहीं कराया। नतीजा यह रहा कि एक युगल पहले से तय कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गया। कार्यक्रम स्थल पर कोई नहीं मिला तो उन्होंने ब्लॉक कर्मियों से संपर्क साधा। ब्लॉक कर्मियों से हकीकत का पता लगते ही युगल के घरवालों ने शादी करके ही घर लौटने का निर्णय किया। शादी जैसी न कोई रौनक और न ही कोई इंतजाम पर कासगंज जिले के सोरों कोतवाली के गांव तुमड़िया के शिवशंकर और पिपरौल की नीरजा परिणय सूत्र में बंधकर एक-दूजे के हो गए।
कासगंज के तुमड़िया गांव से दूल्हा शिवशंकर सुबह मैरिज होम पहुंच गया। उसके साथ परिवार के लोग भी थे। इसके कुछ देर बाद ही कोतवाली क्षेत्र के गांव पिपरौल से रामसिंह के घरवाले भी बेटी नीरजा को लेकर आ पहुंचे। दोनों पक्ष के लोगों को जब कोई व्यवस्था नजर नहीं आई तो उन्होंने ब्लॉक में एडीओ यशपाल सिंह से संपर्क साधा। एडीओ ने उन्हें बता दिया कि कार्यक्रम स्थगित हो चुका है। ब्लॉक कर्मियों ने हाथ खड़े कर दिए तो वधू नीरजा और वर शिवशंकर के घरवालों ने एक मैरिज हाल में पहुंचकर उसके मालिक नितिन गुप्ता से संपर्क साधा। दोनों पक्ष के लोगों की जिद के आगे नितिन उन्हें शादी की रस्में पूरी करने के लिए जगह मुहैया कराई। दोपहर बाद नीरजा और शिवशंकर के सात फेरों की रस्म पूरी की गई। दोनों के परिवार वालों ने इस बात की परवाह भी नहीं की कि उन्हें अब सरकारी अनुदान भी नहीं मिलेगा।
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यह है विवाह का अनुदान
सरकारी स्तर के वैवाहिक कार्यक्रम का हिस्सा बनने वाले पात्रों को अनुदान के रूप में पांच हजार रुपया खानपान के लिए, 10 हजार रुपये में कपड़े और बर्तन और 20 हजार रुपया वधू के खाते में भेजने का प्रावधान है। यह तभी संभव है जब वर और वधू पंजीकरण कराएं। -------
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समाज कल्याण विभाग की ओर से कार्यक्रम स्थगित होने के बारे में जिस समय उन्हें अवगत कराया, उसी समय पंजीकृत युगल के मोबाइल नंबर पर कॉल कर दी गई थी लेकिन नीरजा और शिवशंकर को लेकर उनके घरवाले फिर भी आ गए।
- यशपाल सिंह, एडीओ