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डेंगू से 45 की मौत, विभाग ने एक भी नहीं मानी
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जगत के गांव उनौला में लगे गंदगी के लगे ढेर। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। डेंगू के प्रकोप से अब तक 45 लोग अपनी जान गंवा बैठे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग इनमें से एक भी मौत का कारण डेंगू नहीं मान रहा है। क्योंकि दम तोड़ने वाले मरीजों को डेंगू की पुष्टि निजी लैबों की इनकी जांच में हुई थी। डेंगू की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक जिले में 330 मरीज मिल चुके हैं। इनमें 204 मरीज तो सिर्फ चार गांवों में ही हैं। सबसे ज्यादा 106 मरीज उझानी के गांव ननाखेड़ा में हैं।
इस वर्ष स्वास्थ्य विभाग ने अब तक 1678 लोगों की एलाइजा जांच कराई है। इनमें 330 लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई है। जिले के पांच ब्लॉक के 26 गांवों में डेंगू फैला हुआ है। ननाखेड़ा गांव सर्वाधिक प्रभावित है। जगत ब्लॉक के गांव उनौला में 53 डेंगू मरीज मिले हैं। अंबियापुर के गुधनी में 28 और वजीरगंज के उरैना में 17 मरीज मिले हैं। जगत के लखनपुर, सोबनपुर, दहगवां के शाहपुर ताहरखेड़ा में भी डेंगू का प्रकोप है।
नौ निजी लैबों ने भी 123 लोगों को बताया डेंगू
जिले की निजी पैथोलॉजी लैबों ने भी अब तक 123 लोगों को डेंगू की पुष्टि की है। इनमें ज्यादातर लोगों ने निजी अस्पतालों में ही इलाज कराया। इनमें काफी लोगों की जान भी चली गई। विभाग ने इन मौतों को आंकड़ों में शामिल नहीं किया। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग डेंगू की पुष्टि के लिए सिर्फ एलाइजा जांच को ही मानता है। यही कारण रहा कि मौतों को नकार दिया गया।
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गांवों का हाल : गंदगी की भरमार, मच्छर अपार
जिन चार गांवों में डेंगू के सर्वाधिक मरीज मिले हैं, वहां मच्छरजनित अन्य बीमारियों के मरीज भी काफी संख्या में हैं। इन गांवों में गंदगी से मच्छर पनप रहे हैं। वजीरगंज के गांव उरैना में छह मौतों के बावजूद सफाई व्यवस्था बदहाल है। जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। फॉगिंग नहीं हो रही है, न ही दवाओं का छिड़काव कराया जा रहा है। यही हाल उनौला का भी है। ग्रामीणों के अनुसार, मंडी समिति परिसर के बराबर स्थित खलिहान में गंदगी फैली है। यहां बुखार के सौ से ज्यादा रोगी हैं। हालांकि प्रधान भगवानदास का कहना है कि दवाओं का छिड़काव समय-समय पर कराया जा रहा है। बिल्सी के गुधनी में भी कीटनाशकों का छिड़काव नहीं कराने से लोग परेशान हैं। गांव में कई गलियों में गंदगी जमा है। जिम्मेदार गंदगी न होने और दवाओं का छिड़काव होने की बात कर रहे हैं, लेकिन हालात कुछ और ही कह रहे हैं।
पिछले वर्षों के मुकाबले इस वर्ष मच्छरजनित बीमारियों का प्रकोप कम है। यह बात सही है कि डेंगू का प्रकोप इस बार कुछ ज्यादा है। जिन स्थानों पर मरीज मिल रहे हैं, वहां लगातार विशेष अभियान चलाया जा रहा है। घर-घर मरीजों को खोजा जा रहा है। जो मौतें हुई हैं, उनका ऑडिट कराया गया है। इनमें से किसी ने भी एलाइजा जांच नहीं कराई थी। -डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ
कांग्रेसियों ने ज्ञापन देकर की छिड़काव कराने की मांग
बदायूं। प्रांतीय आह्वान पर जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष ओमकार सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने सीएमओ के नाम ज्ञापन जिला चिकित्सा प्रशासन अधिकारी को दिया। जिलाध्यक्ष ने कहा कि जिले में डेंगू विकराल रूप लेता जा रहा है। ऐसे में शहर साथ गांवों में भी कीटनाशक दवा का छिड़काव कराया जाए। जहां डॉक्टर नहीं है, वहां पर डॉक्टर की व्यवस्था की जाए। इस दौरान जिला महासचिव डॉ. राम रतन पटेल, जिला पिछड़ा कांग्रेस अध्यक्ष मोरपाल प्रजापति, सचिव सूरजपाल सिंह सोलंकी, राधेश्याम चौहान, हरिशंकर, प्रेमपाल सिंह, राम अवतार आदि मौजूद रहे। संवाद
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इस वर्ष स्वास्थ्य विभाग ने अब तक 1678 लोगों की एलाइजा जांच कराई है। इनमें 330 लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई है। जिले के पांच ब्लॉक के 26 गांवों में डेंगू फैला हुआ है। ननाखेड़ा गांव सर्वाधिक प्रभावित है। जगत ब्लॉक के गांव उनौला में 53 डेंगू मरीज मिले हैं। अंबियापुर के गुधनी में 28 और वजीरगंज के उरैना में 17 मरीज मिले हैं। जगत के लखनपुर, सोबनपुर, दहगवां के शाहपुर ताहरखेड़ा में भी डेंगू का प्रकोप है।
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नौ निजी लैबों ने भी 123 लोगों को बताया डेंगू
जिले की निजी पैथोलॉजी लैबों ने भी अब तक 123 लोगों को डेंगू की पुष्टि की है। इनमें ज्यादातर लोगों ने निजी अस्पतालों में ही इलाज कराया। इनमें काफी लोगों की जान भी चली गई। विभाग ने इन मौतों को आंकड़ों में शामिल नहीं किया। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग डेंगू की पुष्टि के लिए सिर्फ एलाइजा जांच को ही मानता है। यही कारण रहा कि मौतों को नकार दिया गया।
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गांवों का हाल : गंदगी की भरमार, मच्छर अपार
जिन चार गांवों में डेंगू के सर्वाधिक मरीज मिले हैं, वहां मच्छरजनित अन्य बीमारियों के मरीज भी काफी संख्या में हैं। इन गांवों में गंदगी से मच्छर पनप रहे हैं। वजीरगंज के गांव उरैना में छह मौतों के बावजूद सफाई व्यवस्था बदहाल है। जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। फॉगिंग नहीं हो रही है, न ही दवाओं का छिड़काव कराया जा रहा है। यही हाल उनौला का भी है। ग्रामीणों के अनुसार, मंडी समिति परिसर के बराबर स्थित खलिहान में गंदगी फैली है। यहां बुखार के सौ से ज्यादा रोगी हैं। हालांकि प्रधान भगवानदास का कहना है कि दवाओं का छिड़काव समय-समय पर कराया जा रहा है। बिल्सी के गुधनी में भी कीटनाशकों का छिड़काव नहीं कराने से लोग परेशान हैं। गांव में कई गलियों में गंदगी जमा है। जिम्मेदार गंदगी न होने और दवाओं का छिड़काव होने की बात कर रहे हैं, लेकिन हालात कुछ और ही कह रहे हैं।
पिछले वर्षों के मुकाबले इस वर्ष मच्छरजनित बीमारियों का प्रकोप कम है। यह बात सही है कि डेंगू का प्रकोप इस बार कुछ ज्यादा है। जिन स्थानों पर मरीज मिल रहे हैं, वहां लगातार विशेष अभियान चलाया जा रहा है। घर-घर मरीजों को खोजा जा रहा है। जो मौतें हुई हैं, उनका ऑडिट कराया गया है। इनमें से किसी ने भी एलाइजा जांच नहीं कराई थी। -डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ
कांग्रेसियों ने ज्ञापन देकर की छिड़काव कराने की मांग
बदायूं। प्रांतीय आह्वान पर जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष ओमकार सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने सीएमओ के नाम ज्ञापन जिला चिकित्सा प्रशासन अधिकारी को दिया। जिलाध्यक्ष ने कहा कि जिले में डेंगू विकराल रूप लेता जा रहा है। ऐसे में शहर साथ गांवों में भी कीटनाशक दवा का छिड़काव कराया जाए। जहां डॉक्टर नहीं है, वहां पर डॉक्टर की व्यवस्था की जाए। इस दौरान जिला महासचिव डॉ. राम रतन पटेल, जिला पिछड़ा कांग्रेस अध्यक्ष मोरपाल प्रजापति, सचिव सूरजपाल सिंह सोलंकी, राधेश्याम चौहान, हरिशंकर, प्रेमपाल सिंह, राम अवतार आदि मौजूद रहे। संवाद

बजीरगंज ब्लॉक के उरैना में नालियों में भरा कीचड़। संवाद- फोटो : BADAUN