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जिले में 42 फर्जी शिक्षक कर रहे थे नौकरी, हाईकोर्ट के फैसले के बाद लगा झटका

Sun, 28 Feb 2021 12:05 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 28 Feb 2021 12:05 AM IST
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42 fake teachers were doing jobs in the district, a shock after the High Court verdict
बदायूं। आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा की वर्ष 2005 की बीएड डिग्री पर प्राथमिक विद्यालयों में नौकरी कर रहे सहायक अध्यापकों को हाईकोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट की इलाहाबाद खंडपीठ ने इनकी बर्खास्तगी को सही बताते हुए विशेष अपीलें खारिज कर दी हैं। जिले में भी ऐसे 42 शिक्षक शामिल थे, जिनमें छह शिक्षकों पर पूर्व में ही रिपोर्ट दर्ज कराकर बर्खास्तगी हो चुकी है।
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बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा 1500 सहायक अध्यापकों की भर्ती निकाली गई थी। इसके तहत जिले में 117 शिक्षकों की भर्ती हुई थी। इस बीच कोर्ट में डाली गई एक याचिका में कहा गया कि डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से बीएड करने वाले अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र फर्जी हैं। 13 सितंबर 2017 को कोर्ट ने इसकी जांच करने के निर्देश दिए। एसआईटी जांच में ये स्पष्ट हुआ कि आगरा से वर्ष 2005 में बीएड करने वालों की अंकतालिका फर्जी हैं। जब तक विभाग को एसआईटी ने रिपोर्ट दी, तब तक बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा अंतर्जनपदीय स्थानांतरण का विकल्प खोल दिया गया था। इसके चलते कुछ शिक्षक इधर से उधर हो गए।
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इसमें बदायूं से कई शिक्षक अन्य जिलों में चले गए। कुछ शिक्षक बदायूं मेें रुके रहे। दरअसल, फाइल मिलने के बाद विभाग ने शिक्षकों के वेतन रोकते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए बर्खास्त कर दिया था, लेकिन कुछ को कोर्ट से राहत मिल गई थी। इसके चलते छह पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई। हालांकि वेतन सभी का रुका चल रहा है। अब हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इनकी बर्खास्तगी के निर्णय को सही बताते हुए विशेष अपीलें खारिज कर दी हैं।
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इन पर हो चुकी है रिपोर्ट
- अशोक कुमार, पंकज कुमार, नीरेश कुमार, संदीप राज सिंह, राजीव कुमार और विपिन कुमार की सेवा समाप्त हो चुकी हैं। साथ ही इन लोगों पर विभाग की तरफ से एफआईआर भी दर्ज कराई जा चुकी है।
कुछ शिक्षकों ने विश्वविद्यालय को दिया था प्रत्यावेदन
- एसआईटी जांच में मामला सामने आने के बाद में 814 शिक्षकों ने विश्वविद्यालय में प्रत्यावेेदन दिया था, इसमें बदायूं जिले के 23 शिक्षक भी शामिल थे। इसके बाद विभाग की तरफ से इनके खिलाफ अग्रिम कार्रवाई नहीं की गई। इनमें यशोदा कुमारी, अरविंद कुमार राना, हरेंद्र कुमार, कुशल पाल सिंह, सतीश चंद्र यादव, यदुवीर सिंह, सुनील कुमार सिंह, प्रीति वर्मा, शशि, हरियेंद्र कुमार, श्रीनेश कुमार, रामनिवास, विष्णु कुमार सिंह, मुकुल कुमार, विजेंद्र सिंह, शिव कुमार यादव, विकास सारस्वत, ओम हरि, ओम प्रकाश, अवधेश शर्मा, नीरज कौशिक, सरिता रानी और भूप सिंह शामिल रहे हैं।

13 शिक्षकों ने की थी अभिलेखों से छेड़छाड़
- जिले में जो 42 शिक्षक मिले थे, इनमें 13 शिक्षक वो थे, जिन्होंने अभिलेखों के साथ छेड़छाड़ करके शिक्षा विभाग में नौकरी हासिल की थी। इनमें बनवारी सिंह चाहर, शैलेंद्र सिंह दिवाकर, कन्हैया लाल, मनीष चंद्र, मोहम्मद सलमान खान, रेखा वर्मा, लाल सिंह, प्रेम प्रकाश, भूपेश, मोहित कुमार, राम प्रकाश, मनमोहन सारस्वत, सत्यवीर सिंह शामिल है। इनका भी वेतन रुका हुआ चल रहा है।
कुछ शिक्षकों पर पहले ही रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है। बाकी के मामले में कोर्ट के निर्णय के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। -रामपाल सिंह राजपूत, बीएसए
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