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सभी पेंशनर्स की समस्याओं का एक छत के नीचे होगा समाधान
Updated Thu, 06 Dec 2018 06:15 PM IST
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सरकारी विभागों में काम कर रहे अधिकारी, कर्मचारी अपने दायित्वों के प्रति इतना लापरवाह हो गए हैं, कि वे किसी की फरियादी नहीं सुनते, अगर सुन भी लें तो अमल नहीं करते। इससे सबसे अधिक प्रभावित पेंशनर हो रहे हैं। यही वजह है कि आज के समय में उनकी समस्याओं में बढ़ोतरी हो रही है। इस संबंध में शासन स्तर पर लगातार शिकायतें पहुंचने लगीं। इसको लेकर शासन ने अब दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिसके तहत 17 दिसंबर को होने वाले पेंशनर्स दिवस में सभी कार्यालयों के अध्यक्ष उपस्थित रहेंगे। ताकि पेंशनर्स की समस्याओं का समाधान किया जा सके।
17 दिसंबर को प्रदेश के प्रत्येक जिले में पेंशनर दिवस होता है। जिसका उद्देश्य पेंशनर की समस्याओं का समाधान करना है लेकिन अधिकतर देखने में आया कि इस दिवस के माध्यम से पेंशनरों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता, बल्कि पेंशनरों को और अधिक परेशानी उठानी पड़ती है। आयोजन में अधिकतर विभागों के कार्यालय अध्यक्षों के नहीं पहुंचने की वजह से उनका कोई काम नहीं हो पाता। ऐसी शिकायतें लगातार शासन स्तर पर पहुंचने लगी। इस पर शासन ने शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए डीएम को निर्देश दिए हैं कि वह अपने स्तर से कार्यक्रम की अध्यक्षता करें, या फिर अपनी जगह अपर जिलाधिकारी / मुख्य विकास अधिकारी को नामित करें। साथ ही डीएम को निर्देश दिए कि वह अपने स्तर से जिले के सभी कार्यालय अध्यक्षों को कार्यक्रम में पहुंचने के निर्देश दें ताकि कार्यालय अध्यक्ष स्वयं या वरिष्ठ राजपत्रित अधिकारी कार्यक्रम में रहे। जिससे पेंशनरों की समस्याओं का समाधान किया जा सके।
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17 दिसंबर को प्रदेश के प्रत्येक जिले में पेंशनर दिवस होता है। जिसका उद्देश्य पेंशनर की समस्याओं का समाधान करना है लेकिन अधिकतर देखने में आया कि इस दिवस के माध्यम से पेंशनरों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता, बल्कि पेंशनरों को और अधिक परेशानी उठानी पड़ती है। आयोजन में अधिकतर विभागों के कार्यालय अध्यक्षों के नहीं पहुंचने की वजह से उनका कोई काम नहीं हो पाता। ऐसी शिकायतें लगातार शासन स्तर पर पहुंचने लगी। इस पर शासन ने शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए डीएम को निर्देश दिए हैं कि वह अपने स्तर से कार्यक्रम की अध्यक्षता करें, या फिर अपनी जगह अपर जिलाधिकारी / मुख्य विकास अधिकारी को नामित करें। साथ ही डीएम को निर्देश दिए कि वह अपने स्तर से जिले के सभी कार्यालय अध्यक्षों को कार्यक्रम में पहुंचने के निर्देश दें ताकि कार्यालय अध्यक्ष स्वयं या वरिष्ठ राजपत्रित अधिकारी कार्यक्रम में रहे। जिससे पेंशनरों की समस्याओं का समाधान किया जा सके।
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