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वसूली में आगे, इलाज में पीछे है शहर का जिला अस्पताल
Updated Sat, 14 Apr 2018 07:48 PM IST
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यहां तो जिला अस्पताल को खुद इलाज की जरूरत
कई दिनों तक नहीं बदली जाती चादरें, हर तरफ समस्याएं ही समस्याएं, मरीज परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं।
कहने को स्वास्थ्य विभाग हर व्यक्ति को सही और समय पर उपचार देने का दावा करता है, लेकिन यह दावे शहर के जिला अस्पताल में आकर फेल हो जाते हैं। सरकार मरीजों के इलाज में लाखों, करोडों रुपये खर्च कर रही है। डॉक्टरों और स्टाफ को वेतन दे रही है। बावजूद इसके अस्पताल में हर स्तर पर अव्यवस्था है। लापरवाही इतनी है कि मरीजों के बैड की चादरें 10-15 दिन तक नहीं बदली जातीं। देहात के मरीजों के लिए तो अक्सर गंदी चादर ही बिछा दी जाती है। मरीज की एक बार पट्टी करने के बाद दोबारा ध्यान नहीं दिया जाता। कर्मचारी मरीजों को इंजेक्शन लगाने से बचते है। वहीं साफ-सफाई के नामपर सिर्फ खानापूर्ति होती है। कर्मचारियों की लापरवाही की वजह से मरीज निजी अस्पताल में जाने को मजबूर हैं। शुक्रवार रात बिल्सी विधायक आरके शर्मा के बाद सीएमओ डॉ. नेमी चंद्रा और सीएमएस डॉ. आरएस यादव जिला अस्पताल में व्यवस्थाएं देखते रहे। उन्होंने तमाम निर्देश भी दिए, लेकिन शनिवार सुबह सभी निर्देश टांय-टांय फिस्स साबित हुए।
फोटो-23
इमरजेंसी वार्ड
इमरजेंसी सबसे महत्वपूर्ण वार्ड है। अन्य वार्डों की अपेक्षा यहां अधिक स्टाफ रखने के निर्देश हैं। दवाई, साफ-सफाई और रोजाना चादरें बदलने के निर्देश हैं। गंभीर मरीजों को सबसे पहले यहीं भर्ती रखा जाता है। जिससे मरीज का सही और समय पर उपचार हो सके, लेकिन इस वार्ड की हकीकत कुछ और है। वार्ड में घुसते ही लोगों को दुर्गंध का सामना करना पड़ता है। साफ-सफाई के नाम पर सुबह एक बार झाडू लग जाती है फिर कहां गंदगी हो रही है, कोई कर्मचारी झांकने तक नहीं जाता।
फोटो-19
सर्जिकल वार्ड
इस वार्ड में सर्दी-बुखार से लेकर गंभीर मरीज तक भर्ती होते हैं। एक बार मरीज आ जाए फिर उससे दवा गोली नहीं पूछी जाती। यहां शाम ढलते ही कर्मचारी स्वत: गायब हो जाते हैं। कभी-कभी दिन का स्टाफ भी गायब हो जाता है। उपचार से पहले मरीज की छुट्टी पर अधिक ध्यान दिया जाता है। इसी वार्ड में आठ अप्रैल से बिल्सी क्षेत्र के गांव जरावन निवासी लज्जावती, पूजा और आशाराम भर्ती हैं। तीनों लोग बदमाशों की पिटाई से घायल हुए थे। वार्ड में भर्ती होने से अब तक सिर्फ दो बार इनकी चोटों पर पट्टी हुई है। इनकी चोटों से मवाद निकल रहा है। चोट लगने से लज्जावती की एक आंख भी खराब हो गई है। इसके बावजूद इलाज में सिर्फ खानापूर्ति हो रही है।
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फोटो-22
बर्न वार्ड
जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में इस समय पांच मरीज भर्ती हैं। दातागंज के भटौली गांव निवासी सुशील की 13 वर्षीय बेटी रिया छह मार्च को यहां भर्ती हुई थी। रिया एक हादसे में जल गई थी। उसकी तीसरे दिन पट्टी जरूर होती है, लेकिन परिजनों का आरोप है कि उनसे हर पट्टी के सौ रुपये लिए जाते हैं। मरीज को लगाने वाली मलहम पट्टी बाहर से मंगवाई जाती है। एक बार पट्टी कराने में उनके करीब पांच-छह सौ रुपये खर्च कराए जाते हैं। यहां भर्ती जालंधरी सराय निवासी राजू, हजरतपुर थाना क्षेत्र के गांव पिपला निवासी कुंती, कुलचौरा निवासी रिंकू, ककराला निवासी मीना सभी की यही शिकायत है। रात के समय डॉक्टर तो दूर कर्मचारी भी यहां झांकने नहीं आते।
फोटो-21
हड्डी वार्ड
हड्डी वार्ड में निरीक्षण करने वाले अधिकारी सबसे कम पहुंचते हैं। यहां हड्डी रोग से संबंधित मरीजों को भर्ती किया जाता है। किसी के पैर में तो किसी के हाथ में फ्रेक्चर है। शुक्रवार रात बिल्सी विधायक आरके शर्मा ने यहां के हालात देखे थे। मरीजों के बैड पर कई दिनों से गंदी चादरें बिछी हुई थीं। वार्ड में गंदगी का अंबार लगा हुआ था। उनके निरीक्षण के बाद वार्ड में कुछ बदलाव दिखा। सभी चादरें बदल दी गईं हैं। अभी दो मरीजों के नीचे गंदी चादरें ही बिछी हुई हैं।
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दो स्टाफ नर्सों से मांगा स्पष्टीकरण
बदायूं। शुक्रवार रात जिला अस्पताल में बिल्सी विधायक आरके शर्मा ने निरीक्षण किया था। उनके बाद सीएमओ और सीएमएस पहुंचे थे। उस समय मरीजों के बेड पर गंदी चादरें बिछी पाई गई थीं। इमरजेंसी में तैनात मिले मेल स्टाफ नर्स जितेंद्र ने बताया था कि रात को सभी चादरें ताले बंद मिलती हैं। अलमारी की चाबी वार्ड इंचार्ज स्टाफ नर्स रीता सरन ले जाती हैं। इस पर सीएमओ ने स्टाफ नर्स रीता सरन और कृष्णा शर्मा से स्पष्टीकरण मांगा है।
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इमरजेंसी से नहीं हटाया रिश्वतखोर कर्मचारी
बदायूं। इस समय जिला अस्पताल की इमरजेंसी पर एक रिश्वतखोर कर्मचारी ने कब्जा जमा लिया है। पिछले दिनों इसी कर्मचारी ने महिला तीमारदार से दस हजार रुपये ठग लिए थे। पोल खुलने के दूसरे दिन कर्मचारी ने एक हजार रुपये लौटा दिए, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। आज भी रिश्वतखोर कर्मचारी मरीजों से मेडिकल कराने के नाम पर अवैध उगाही कर रहा है।
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मरीजों को लिखी जाती हैं बाहरी दवा
बदायूं। जिला अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों को लगातार बाहरी दवाएं लिखी जा रही हैं। दो डॉक्टरों के अलावा कुछ कर्मचारियों की बाहर मेडिकल स्टोर पर अपनी साठगांठ है। महंगी दवाएं लिखकर मरीजों को वहीं भेजा जाता है। शाम को अपना हिसाब कर लेते हैं।
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अस्पताल में घूमते रहते हैं जंगली जानवर
बदायूं। शहर के जिला अस्पताल में जंगली जानवरों पर कोई रोक नहीं है। सुबह से लेकर शाम तक जंगली जानवर अस्पताल परिसर में भ्रमण करते रहते हैं। वार्डों में भी घुस जाते हैं। मरीजों के बेड के नीचे पड़े रहते हैं।
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पंद्रह दिनों तक नहीं धुलती चादरें
बदायूं। स्टाफ नर्स रीता सरन के मुताबिक हर सप्ताह उन्हें 40 चादरें दी जाती हैं। उन्हीं से काम चलाना पड़ता है। पंद्रह दिन तक चादरें धुलकर नहीं आ पातीं। अब हमें नई चादरें नहीं मिलेंगी तो क्या बिछाएंगे।
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वर्जन................
जिला अस्पताल में साफ सफाई संतोषजनक नहीं पाई गई तो कर्मचारियों के वेतन आहरण पर रोक लगाई जाएगी। सभी कर्मचारी एप्रिन और नेम प्लेट लगाकर रखेंगे। लापरवाही पाए जाने पर दो स्टाफ नर्सों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। इस मामले में सीएमएस से भी जवाब मांगा गया है।
-डॉ. नेमी चंद्रा, सीएमओ
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फोटो--24
तीन दिन पहले जिला अस्पताल में भर्ती हुआ था। तभी से मेरे बेड पर चादर बिछी हुई है। रात सीएमओ साहब नई चादरें बिछाने को कह गए थे। जिस पर आज चादर दी गई है।
-पप्पू, मरीज
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फोटो--25
परिवार वालों ने मुझे तीन दिन पहले भर्ती कराया था। तभी से गंदी चादर बिछी हुई है। हमने यहां स्टाफ से भी कहा था, लेकिन किसी ने नहीं सुना।
-रामवती, मरीज
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फोटो--26
मैं यहां आठ दिन से भर्ती हूं। कोई सुधार नहीं हो रहा है। डॉक्टर से कहते हैं, तो वह घर जाने की सलाह देते हैं। तबीयत में सुधार नहीं हो रहा है तो कैसे घर चले जाएं।
-फूल सिंह
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फोटो--27
डॉक्टर कहते हैं कि तुम ठीक हो गए हो। घर चले जाओ। अब यहां दवा नहीं मिल रही। कोई देखने वाला नहीं है तो कैसे ठीक हो जाएं। नौ अप्रैल से तो चादर नहीं बदली गई है।
-सियाराम
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यहां तो जिला अस्पताल को खुद इलाज की जरूरत
कई दिनों तक नहीं बदली जाती चादरें, हर तरफ समस्याएं ही समस्याएं, मरीज परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं।
कहने को स्वास्थ्य विभाग हर व्यक्ति को सही और समय पर उपचार देने का दावा करता है, लेकिन यह दावे शहर के जिला अस्पताल में आकर फेल हो जाते हैं। सरकार मरीजों के इलाज में लाखों, करोडों रुपये खर्च कर रही है। डॉक्टरों और स्टाफ को वेतन दे रही है। बावजूद इसके अस्पताल में हर स्तर पर अव्यवस्था है। लापरवाही इतनी है कि मरीजों के बैड की चादरें 10-15 दिन तक नहीं बदली जातीं। देहात के मरीजों के लिए तो अक्सर गंदी चादर ही बिछा दी जाती है। मरीज की एक बार पट्टी करने के बाद दोबारा ध्यान नहीं दिया जाता। कर्मचारी मरीजों को इंजेक्शन लगाने से बचते है। वहीं साफ-सफाई के नामपर सिर्फ खानापूर्ति होती है। कर्मचारियों की लापरवाही की वजह से मरीज निजी अस्पताल में जाने को मजबूर हैं। शुक्रवार रात बिल्सी विधायक आरके शर्मा के बाद सीएमओ डॉ. नेमी चंद्रा और सीएमएस डॉ. आरएस यादव जिला अस्पताल में व्यवस्थाएं देखते रहे। उन्होंने तमाम निर्देश भी दिए, लेकिन शनिवार सुबह सभी निर्देश टांय-टांय फिस्स साबित हुए।
फोटो-23
इमरजेंसी वार्ड
इमरजेंसी सबसे महत्वपूर्ण वार्ड है। अन्य वार्डों की अपेक्षा यहां अधिक स्टाफ रखने के निर्देश हैं। दवाई, साफ-सफाई और रोजाना चादरें बदलने के निर्देश हैं। गंभीर मरीजों को सबसे पहले यहीं भर्ती रखा जाता है। जिससे मरीज का सही और समय पर उपचार हो सके, लेकिन इस वार्ड की हकीकत कुछ और है। वार्ड में घुसते ही लोगों को दुर्गंध का सामना करना पड़ता है। साफ-सफाई के नाम पर सुबह एक बार झाडू लग जाती है फिर कहां गंदगी हो रही है, कोई कर्मचारी झांकने तक नहीं जाता।
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सर्जिकल वार्ड
इस वार्ड में सर्दी-बुखार से लेकर गंभीर मरीज तक भर्ती होते हैं। एक बार मरीज आ जाए फिर उससे दवा गोली नहीं पूछी जाती। यहां शाम ढलते ही कर्मचारी स्वत: गायब हो जाते हैं। कभी-कभी दिन का स्टाफ भी गायब हो जाता है। उपचार से पहले मरीज की छुट्टी पर अधिक ध्यान दिया जाता है। इसी वार्ड में आठ अप्रैल से बिल्सी क्षेत्र के गांव जरावन निवासी लज्जावती, पूजा और आशाराम भर्ती हैं। तीनों लोग बदमाशों की पिटाई से घायल हुए थे। वार्ड में भर्ती होने से अब तक सिर्फ दो बार इनकी चोटों पर पट्टी हुई है। इनकी चोटों से मवाद निकल रहा है। चोट लगने से लज्जावती की एक आंख भी खराब हो गई है। इसके बावजूद इलाज में सिर्फ खानापूर्ति हो रही है।
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बर्न वार्ड
जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में इस समय पांच मरीज भर्ती हैं। दातागंज के भटौली गांव निवासी सुशील की 13 वर्षीय बेटी रिया छह मार्च को यहां भर्ती हुई थी। रिया एक हादसे में जल गई थी। उसकी तीसरे दिन पट्टी जरूर होती है, लेकिन परिजनों का आरोप है कि उनसे हर पट्टी के सौ रुपये लिए जाते हैं। मरीज को लगाने वाली मलहम पट्टी बाहर से मंगवाई जाती है। एक बार पट्टी कराने में उनके करीब पांच-छह सौ रुपये खर्च कराए जाते हैं। यहां भर्ती जालंधरी सराय निवासी राजू, हजरतपुर थाना क्षेत्र के गांव पिपला निवासी कुंती, कुलचौरा निवासी रिंकू, ककराला निवासी मीना सभी की यही शिकायत है। रात के समय डॉक्टर तो दूर कर्मचारी भी यहां झांकने नहीं आते।
फोटो-21
हड्डी वार्ड
हड्डी वार्ड में निरीक्षण करने वाले अधिकारी सबसे कम पहुंचते हैं। यहां हड्डी रोग से संबंधित मरीजों को भर्ती किया जाता है। किसी के पैर में तो किसी के हाथ में फ्रेक्चर है। शुक्रवार रात बिल्सी विधायक आरके शर्मा ने यहां के हालात देखे थे। मरीजों के बैड पर कई दिनों से गंदी चादरें बिछी हुई थीं। वार्ड में गंदगी का अंबार लगा हुआ था। उनके निरीक्षण के बाद वार्ड में कुछ बदलाव दिखा। सभी चादरें बदल दी गईं हैं। अभी दो मरीजों के नीचे गंदी चादरें ही बिछी हुई हैं।
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दो स्टाफ नर्सों से मांगा स्पष्टीकरण
बदायूं। शुक्रवार रात जिला अस्पताल में बिल्सी विधायक आरके शर्मा ने निरीक्षण किया था। उनके बाद सीएमओ और सीएमएस पहुंचे थे। उस समय मरीजों के बेड पर गंदी चादरें बिछी पाई गई थीं। इमरजेंसी में तैनात मिले मेल स्टाफ नर्स जितेंद्र ने बताया था कि रात को सभी चादरें ताले बंद मिलती हैं। अलमारी की चाबी वार्ड इंचार्ज स्टाफ नर्स रीता सरन ले जाती हैं। इस पर सीएमओ ने स्टाफ नर्स रीता सरन और कृष्णा शर्मा से स्पष्टीकरण मांगा है।
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इमरजेंसी से नहीं हटाया रिश्वतखोर कर्मचारी
बदायूं। इस समय जिला अस्पताल की इमरजेंसी पर एक रिश्वतखोर कर्मचारी ने कब्जा जमा लिया है। पिछले दिनों इसी कर्मचारी ने महिला तीमारदार से दस हजार रुपये ठग लिए थे। पोल खुलने के दूसरे दिन कर्मचारी ने एक हजार रुपये लौटा दिए, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। आज भी रिश्वतखोर कर्मचारी मरीजों से मेडिकल कराने के नाम पर अवैध उगाही कर रहा है।
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मरीजों को लिखी जाती हैं बाहरी दवा
बदायूं। जिला अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों को लगातार बाहरी दवाएं लिखी जा रही हैं। दो डॉक्टरों के अलावा कुछ कर्मचारियों की बाहर मेडिकल स्टोर पर अपनी साठगांठ है। महंगी दवाएं लिखकर मरीजों को वहीं भेजा जाता है। शाम को अपना हिसाब कर लेते हैं।
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अस्पताल में घूमते रहते हैं जंगली जानवर
बदायूं। शहर के जिला अस्पताल में जंगली जानवरों पर कोई रोक नहीं है। सुबह से लेकर शाम तक जंगली जानवर अस्पताल परिसर में भ्रमण करते रहते हैं। वार्डों में भी घुस जाते हैं। मरीजों के बेड के नीचे पड़े रहते हैं।
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पंद्रह दिनों तक नहीं धुलती चादरें
बदायूं। स्टाफ नर्स रीता सरन के मुताबिक हर सप्ताह उन्हें 40 चादरें दी जाती हैं। उन्हीं से काम चलाना पड़ता है। पंद्रह दिन तक चादरें धुलकर नहीं आ पातीं। अब हमें नई चादरें नहीं मिलेंगी तो क्या बिछाएंगे।
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वर्जन................
जिला अस्पताल में साफ सफाई संतोषजनक नहीं पाई गई तो कर्मचारियों के वेतन आहरण पर रोक लगाई जाएगी। सभी कर्मचारी एप्रिन और नेम प्लेट लगाकर रखेंगे। लापरवाही पाए जाने पर दो स्टाफ नर्सों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। इस मामले में सीएमएस से भी जवाब मांगा गया है।
-डॉ. नेमी चंद्रा, सीएमओ
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तीन दिन पहले जिला अस्पताल में भर्ती हुआ था। तभी से मेरे बेड पर चादर बिछी हुई है। रात सीएमओ साहब नई चादरें बिछाने को कह गए थे। जिस पर आज चादर दी गई है।
-पप्पू, मरीज
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परिवार वालों ने मुझे तीन दिन पहले भर्ती कराया था। तभी से गंदी चादर बिछी हुई है। हमने यहां स्टाफ से भी कहा था, लेकिन किसी ने नहीं सुना।
-रामवती, मरीज
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फोटो--26
मैं यहां आठ दिन से भर्ती हूं। कोई सुधार नहीं हो रहा है। डॉक्टर से कहते हैं, तो वह घर जाने की सलाह देते हैं। तबीयत में सुधार नहीं हो रहा है तो कैसे घर चले जाएं।
-फूल सिंह
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फोटो--27
डॉक्टर कहते हैं कि तुम ठीक हो गए हो। घर चले जाओ। अब यहां दवा नहीं मिल रही। कोई देखने वाला नहीं है तो कैसे ठीक हो जाएं। नौ अप्रैल से तो चादर नहीं बदली गई है।
-सियाराम