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नसबंदी के बाद भी गर्भवती हो गईं 35 महिलाएं
ब्यूरो /बदायूं
Updated Fri, 09 Sep 2016 11:36 PM IST
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परिवार नियोजन कार्यक्रम कितना कारगर हो रहा है, इसकी पोल उस वक्त खुल गई जब नसबंदी कराने के बावजूद 35 महिलाएं गर्भवती हो गईं। इन महिलाओं की ओर से मुआवजे के लिए जब दावा पेश किया गया तो स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। पिछले एक साल में जिले में 15 विकास खंडों पर छह-छह माह के अंतराल पर लगे शिविरों में करीब 2,150 महिलाओं ने नसबंदी कराई थी। इनमें नसबंदी फेल होने के 35 मामले सामने आए हैं। इसकी रिपोर्ट महानिदेशक परिवार कल्याण जगत नारायण गौड़ को भेजी गई है। नसबंदी के बाद भी गर्भवती होने वाली 35 महिलाओं को मुआवजे के रूप में स्वास्थ्य विभाग को 10.50 लाख रुपये देने होंगे। इस मामले में डॉक्टरों का कहना है कि कभी-कभी ऑपरेशन के बाद मरीजों की तरफ से लापरवाही बरती जाती है इससे नसबंदी फेल होने की आशंका बढ़ जाती है। सीएमओ डा. सुनील कुमार का कहना है कि नसबंदी फेल होने के कुछ मामले सामने आए हैं। सभी मामलों का परीक्षण कराया जा रहा है। कुछ मामलों में सहायता राशि की स्वीकृति के लिए फाइल महानिदेशक परिवार कल्याण को भेज दी गई है। इसके बाद ही मुआवजा निर्धारित होगा।
- ये महिलाएं हुईं गर्भवती
मीना देवी- ग्राम सिसइयां दातागंज, जमीला- बहादुरगंज उझानी, ज्ञानवती- कल्लिया काजमपुर वजीरगंज, मीना- विजय गढ़ी बदायूं, ममता -सहावर खेड़ा वजीरगंज, रेनू - हैदलपुर बिल्सी, चंद्र किरन - बसंत नगर बिल्सी, सुनीता - किश्नी दातागंज, मुन्नी बेगम- कादरबाड़ी कादरचौक, सुमन -अरेला दातागंज, गीता देवी -कादरचौक, रीता - बरौर, लीलावती - इनायतगंज, सावित्री - उतरना जगत, दुलारो -मढिय़ा भांगी कुंवमरगांव, गुड्डी -मीलाल नगला उझानी, राजेश्वरी- बरीसमसपुर सालारपुर, नीलम -चंदोखर गौटिया जगत, सुषमा - बमनौसी कादरचौक, धर्मवती -सादपुर सहसवान, ममता -खनुआ नगला दहगवां, सर्वेश कुमारी -ब्योर बिनावर, शारदा -उझौली उसहैत, शारदा -म्याऊं, शीशवाला -अगेई बिसौली, सावित्री -बिलहत बिनावर, गुड्डो देवी -गिधौल जगत, तारावती - सदाठेर कादरचौक, श्रीवती -फिरोजपुर बिसौली।
सर्जन की राय
महिलाओं की नसबंदी के दौरान उनकी एक नस में रिंग डाल कर उसे बंद कर दिया जाता है। नसबंदी होने के बाद कम से कम दो महीने तक शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए। अक्सर देखने में आया है कि दो महीने से पहले शारीरिक संबंध बनाने से महिला गर्भवती हो जाती है। कुछ मामलों में रिंग सही ढंग से अपनी जगह पर न पहुंचने की वजह से नसबंदी फेल भी हो जाती है।
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-डॉ. अवधेश कुमार, वरिष्ठ सर्जन
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- ये महिलाएं हुईं गर्भवती
मीना देवी- ग्राम सिसइयां दातागंज, जमीला- बहादुरगंज उझानी, ज्ञानवती- कल्लिया काजमपुर वजीरगंज, मीना- विजय गढ़ी बदायूं, ममता -सहावर खेड़ा वजीरगंज, रेनू - हैदलपुर बिल्सी, चंद्र किरन - बसंत नगर बिल्सी, सुनीता - किश्नी दातागंज, मुन्नी बेगम- कादरबाड़ी कादरचौक, सुमन -अरेला दातागंज, गीता देवी -कादरचौक, रीता - बरौर, लीलावती - इनायतगंज, सावित्री - उतरना जगत, दुलारो -मढिय़ा भांगी कुंवमरगांव, गुड्डी -मीलाल नगला उझानी, राजेश्वरी- बरीसमसपुर सालारपुर, नीलम -चंदोखर गौटिया जगत, सुषमा - बमनौसी कादरचौक, धर्मवती -सादपुर सहसवान, ममता -खनुआ नगला दहगवां, सर्वेश कुमारी -ब्योर बिनावर, शारदा -उझौली उसहैत, शारदा -म्याऊं, शीशवाला -अगेई बिसौली, सावित्री -बिलहत बिनावर, गुड्डो देवी -गिधौल जगत, तारावती - सदाठेर कादरचौक, श्रीवती -फिरोजपुर बिसौली।
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सर्जन की राय
महिलाओं की नसबंदी के दौरान उनकी एक नस में रिंग डाल कर उसे बंद कर दिया जाता है। नसबंदी होने के बाद कम से कम दो महीने तक शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए। अक्सर देखने में आया है कि दो महीने से पहले शारीरिक संबंध बनाने से महिला गर्भवती हो जाती है। कुछ मामलों में रिंग सही ढंग से अपनी जगह पर न पहुंचने की वजह से नसबंदी फेल भी हो जाती है।
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-डॉ. अवधेश कुमार, वरिष्ठ सर्जन