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दोबारा प्रयोग नहीं होंगी खून से सनी चादरें
Updated Tue, 25 Sep 2018 12:28 AM IST
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...और नहीं बदला अस्पताल प्रशासन का रवैया
मरीजों को नहीं मिल रहीं चादरें, तीमारदार कर रहे कर्मचारियों का काम
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। यह वही जिला अस्पताल है, जहां कुछ दिन पहले डीएम और अन्य अधिकारियों ने रोज निरीक्षण किया था। एक-एक करके कमियों को तलाश किया गया था और सुधार के अवसर भी दिए गए। परंतु आज तक कोई सुधार नहीं हो सका। अस्पताल के वार्डों में आज भी मरीजों को चादर नहीं मिल रहीं हैं।
जिला अस्पताल में गंदी चादर या बगैर चादर के बेड की शिकायत कोई नई नहीं हैं। वर्षों से अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस शिकायत को दूर करने के लिए नए-नए प्लान बनाता आया है। अब से करीब पांच साल पहले निरीक्षण पर आईं जेडी ने इन चादरों के रंग बदलने को कहा था। कहा था कि प्रत्येक दिन अलग-अलग रंग की चादर होंगी तो पता चलता रहेगा कि चादर पुरानी नहीं नई बिछी है। इस प्लान का क्या हुआ पता नहीं लेकिन मरीजों की शिकायत दूर नहीं हुई। यही नहीं आए दिन मरीजों को लाने-जाने के लिए स्ट्रेचर नहीं मिलती। तीमारदारों को स्वयं ही मरीजों को गोद में उठाकर ले जाना पड़ता है।
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पर्ची की दवाओं में कटौती: जिला अस्पताल के चिकित्सक मरीज को देखने के बाद एक छोटी पर्ची पर दवाएं लिखते हैं। मरीज को उसी पर्ची से ओपीडी के कमरा नंबर 12 और 20 से दवा मिलती है। यहां भी एक शिकायत कॉमन है कि पर्ची पर लिखी दवाएं पूरी नहीं मिलती। कभी-कभी चिकित्सकों को स्वयं हस्तक्षेप करना पड़ता है।
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ओपीडी में नहीं बैठते डॉक्टर: जिला अस्पताल में एक और शिकायत कॉमन है कि ओपीडी में डॉक्टर नहीं बैठते। इससे मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। कभी-कभी मरीजों को बगैर दवा लिए भी लौटना पड़ता है।
2.
दोबारा प्रयोग नहीं होंगी खून से सनी चादरें: सीएमएस
बदायूं। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. भारत भूषण पुष्कर ने इंफेक्शन रोकने के लिए एक और तरीका अपनाया है। उन्होंने कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि अस्पताल की खून से सनी चादरों की धुलाई नहीं होगी। उन्हें उपयोग नहीं किया जाएगा। उन्हें ऐसे ही नष्ट किया जाएगा। डॉ. भारत भूषण पुष्कर ने बताया कि अस्पताल में कई ऐसे घायल लोग आते हैं, जिनके शरीर से खून बहता रहता है। जिससे बेड पर बिछी चादरें खराब हो जाती हैं। कभी-कभी खून से पूरा बेड और चादरें तक लाल हो जाती हैं। उन पर स्वयं घायल तक को लेटने की इच्छा नहीं होती। कभी-कभी पुराने घायल आ जाते हैं, जिससे पूर बेड खराब हो जाता है। यह इंफेक्शन का बहुत बड़ा कारण है। ऐसे में कोई भी कर्मचारी अधिक खून से सनी चादरें नहीं उठाए। उनकी धुलाई नहीं होगी। उनको एक जगह एकत्र करके ले जाएं और उन्हें नष्ट कर दें। ऐसी किसी भी चादर का दोबारा प्रयोग नहीं होगा। इस संबंध में उन्होंने लांड्री संचालक को भी निर्देश दिए हैं।
3.
फोटो--10, 11
अव्यवस्थाओं पर गरजे
भाकियू के कार्यकर्ता
बदायूं। जिला अस्पताल में फैली अव्यवस्थाओं पर भारतीय किसान यूनियन ने सोमवार दोपहर धरना दिया। सीएमएस और एक डॉक्टर के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने व्यवस्थाएं सुधारने के लिए सीएमएस और सीएमओ को ज्ञापन सौंपा।
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सर्वेश सिंह पटेल ने कहा कि जिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं के चलते गांव देहात से आने वाले किसानों के लिए बेहद परेशानी हो रही है। जिलाध्यक्ष रवेंद्र सिंह पटेल ने कहा कि किसानों का शोषण बर्दाश्त नहीं होगा। चाहे इसके लिए उन्हें जेल जाना पड़े या लाठियां खानी पड़े। इस दौरान रामभरोसे सिंह, जमुना सिंह, शंकरलाल, सुरेंद्र सिंह, वीरेश शर्मा, हीरालाल, राधेश्याम, रविदेव, कुलदीप, रामकुमार, प्रमोद सिंह, भूपाल सिंह, कमलेश राणा, मुन्नी देवी, माया देवी, नेमवती, लक्ष्मी आदि मौजूद रहे।
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...और नहीं बदला अस्पताल प्रशासन का रवैया
मरीजों को नहीं मिल रहीं चादरें, तीमारदार कर रहे कर्मचारियों का काम
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। यह वही जिला अस्पताल है, जहां कुछ दिन पहले डीएम और अन्य अधिकारियों ने रोज निरीक्षण किया था। एक-एक करके कमियों को तलाश किया गया था और सुधार के अवसर भी दिए गए। परंतु आज तक कोई सुधार नहीं हो सका। अस्पताल के वार्डों में आज भी मरीजों को चादर नहीं मिल रहीं हैं।
जिला अस्पताल में गंदी चादर या बगैर चादर के बेड की शिकायत कोई नई नहीं हैं। वर्षों से अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस शिकायत को दूर करने के लिए नए-नए प्लान बनाता आया है। अब से करीब पांच साल पहले निरीक्षण पर आईं जेडी ने इन चादरों के रंग बदलने को कहा था। कहा था कि प्रत्येक दिन अलग-अलग रंग की चादर होंगी तो पता चलता रहेगा कि चादर पुरानी नहीं नई बिछी है। इस प्लान का क्या हुआ पता नहीं लेकिन मरीजों की शिकायत दूर नहीं हुई। यही नहीं आए दिन मरीजों को लाने-जाने के लिए स्ट्रेचर नहीं मिलती। तीमारदारों को स्वयं ही मरीजों को गोद में उठाकर ले जाना पड़ता है।
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पर्ची की दवाओं में कटौती: जिला अस्पताल के चिकित्सक मरीज को देखने के बाद एक छोटी पर्ची पर दवाएं लिखते हैं। मरीज को उसी पर्ची से ओपीडी के कमरा नंबर 12 और 20 से दवा मिलती है। यहां भी एक शिकायत कॉमन है कि पर्ची पर लिखी दवाएं पूरी नहीं मिलती। कभी-कभी चिकित्सकों को स्वयं हस्तक्षेप करना पड़ता है।
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ओपीडी में नहीं बैठते डॉक्टर: जिला अस्पताल में एक और शिकायत कॉमन है कि ओपीडी में डॉक्टर नहीं बैठते। इससे मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। कभी-कभी मरीजों को बगैर दवा लिए भी लौटना पड़ता है।
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दोबारा प्रयोग नहीं होंगी खून से सनी चादरें: सीएमएस
बदायूं। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. भारत भूषण पुष्कर ने इंफेक्शन रोकने के लिए एक और तरीका अपनाया है। उन्होंने कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि अस्पताल की खून से सनी चादरों की धुलाई नहीं होगी। उन्हें उपयोग नहीं किया जाएगा। उन्हें ऐसे ही नष्ट किया जाएगा। डॉ. भारत भूषण पुष्कर ने बताया कि अस्पताल में कई ऐसे घायल लोग आते हैं, जिनके शरीर से खून बहता रहता है। जिससे बेड पर बिछी चादरें खराब हो जाती हैं। कभी-कभी खून से पूरा बेड और चादरें तक लाल हो जाती हैं। उन पर स्वयं घायल तक को लेटने की इच्छा नहीं होती। कभी-कभी पुराने घायल आ जाते हैं, जिससे पूर बेड खराब हो जाता है। यह इंफेक्शन का बहुत बड़ा कारण है। ऐसे में कोई भी कर्मचारी अधिक खून से सनी चादरें नहीं उठाए। उनकी धुलाई नहीं होगी। उनको एक जगह एकत्र करके ले जाएं और उन्हें नष्ट कर दें। ऐसी किसी भी चादर का दोबारा प्रयोग नहीं होगा। इस संबंध में उन्होंने लांड्री संचालक को भी निर्देश दिए हैं।
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अव्यवस्थाओं पर गरजे
भाकियू के कार्यकर्ता
बदायूं। जिला अस्पताल में फैली अव्यवस्थाओं पर भारतीय किसान यूनियन ने सोमवार दोपहर धरना दिया। सीएमएस और एक डॉक्टर के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने व्यवस्थाएं सुधारने के लिए सीएमएस और सीएमओ को ज्ञापन सौंपा।
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सर्वेश सिंह पटेल ने कहा कि जिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं के चलते गांव देहात से आने वाले किसानों के लिए बेहद परेशानी हो रही है। जिलाध्यक्ष रवेंद्र सिंह पटेल ने कहा कि किसानों का शोषण बर्दाश्त नहीं होगा। चाहे इसके लिए उन्हें जेल जाना पड़े या लाठियां खानी पड़े। इस दौरान रामभरोसे सिंह, जमुना सिंह, शंकरलाल, सुरेंद्र सिंह, वीरेश शर्मा, हीरालाल, राधेश्याम, रविदेव, कुलदीप, रामकुमार, प्रमोद सिंह, भूपाल सिंह, कमलेश राणा, मुन्नी देवी, माया देवी, नेमवती, लक्ष्मी आदि मौजूद रहे।